Saturday, November 26, 2022

खिलाड़ियों का खिलाड़ी, वो फिल्म सिर्फ रेखा की थी.

साल 1996 में उमेश मेहरा ने 'खिलाड़ी' सीरीज की अपनी दूसरी फिल्म 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' बनाई. खिलाड़ी सीरीज की फिल्मों से अक्षय कुमार बॉलीवुड में एक बड़े एक्शन हीरो के रूप में स्थापित हो रहे थे.
खिलाड़ियों का खिलाड़ी में 'हम हैं सीधे साधे अक्षय-अक्षय' जैसे गीत के बाद, अब वह स्टार थे पर इसी फिल्म में तब उनसे कहीं बड़ी स्टार काम कर रही थी. वह स्टार थी बॉलीवुड का कोहिनूर रेखा.
रेखा का जलवा हम फिल्म की शुरुआत में कलाकारों के परिचय में देख लेते हैं, जहां फिल्म के कलाकारों की सूची में पहला नाम रेखा का था.

बस एक सीधी रेखा

खिलाड़ियों का खिलाड़ी उस साल की बहुत बड़ी हिट साबित रही थी. रेखा को इस फिल्म के लिए साल 1997 में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार और उसी साल स्टार स्क्रीन अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ खलनायिका का पुरस्कार मिला.

फिल्म के शुरुआती दृश्य में ही मैडम माया बनी रेखा ने अपनी खूबसूरती और फैशन से फिल्म में चार चांद लगा लिए थे.
चटक लाल लिपिस्टिक, फैशनेबल चश्में, बूट, इयररिंग्स, चेहरा छोड़ सर से पैर तक को ढकी हुई ड्रेस, इन सब के साथ मैडम माया का पात्र दर्शकों के दिलों दिमाग में छा जाता है.

उमेश मेहरा द्वारा लिखी गई फिल्म की कहानी भी रेस्लिंग की दुनिया से पैसा कमाने वाली मैडम माया के इर्द गिर्द बुनी गई है. मैडम माया का किरदार निभाने के लिए जिस फैशनेबल और जिद्दी चेहरे की जरूरत निर्देशक को थी, बॉलीवुड में उस चेहरे के लिए रेखा से बेहतर अन्य और कोई चेहरा हो ही नही सकता था.
फिल्म में अमेरिका में रहने वाली मैडम माया खुद से गद्दारी करने वाले अजय को सजा देती है. अजय का किरदार इंद्र कुमार द्वारा निभाया गया था, अजय को ढूंढते उसका फौजी भाई अक्षय भारत से अमेरिका पहुंच जाता है. अक्षय बने अक्षय कुमार को अपने भाई की तलाश के लिए मैडम माया के गुट में शामिल होना पड़ता है और इसके लिए अक्षय को अपनी प्रेमिका प्रिया बनी रवीना टण्डन से दूरी बनानी पड़ती है.

नकारात्मक किरदार में आने के बावजूद छा गई थी रेखा

रेखा का किरदार इस तरह का था कि उन्हें इस फिल्म में नायक से टकराना था और तब बॉलीवुड में इस तरह की फिल्में बहुत कम बनती थी, जहां कोई स्त्री बुरा किरदार निभाती थी. रेखा ने यह जोखिम लिया और एक नकारात्मक किरदार में होने के बावजूद दर्शकों के दिलों में जगह बना गई.

आज भी जब भारतीय समाज में सिगरेट और शराब को सिर्फ पुरुषों के इस्तेमाल के लिए स्वीकार किया जाता है, तब रेखा ने आज से लगभग पच्चीस साल पहले बड़े पर्दे पर इन्हें लेते इस तरह से दिखाया कि लोग रेखा के दीवाने हो गए. रेखा को चाहने वाली महिलाओं के साथ उनके लिए दीवाने पुरुषों पर रेखा द्वारा ली गई इन नशीली वस्तुओं के सेवन का क्या प्रभाव पड़ा होगा, यह भी अध्ययन का विषय है.

स्त्री के हृदय की कोमलता दिखाती मैडम माया

ऐसा नही है कि इस फिल्म से रेखा ने 'हारने वाले की पैरवी नही, जीतने वाली की तारीफ सुनना पसंद करती है माया'
जैसे संवाद के जरिए सिर्फ नकारात्मक किरदार के रूप नाम बनाया.

अक्षय के साथ उनकी कैमिस्ट्री ने मैडम माया के किरदार का कोमल पक्ष भी हमारे सामने रखा. सख्त होने के बावजूद स्त्री के ह्रदय की कोमलता को हम अक्षय के अंडरटेकर के साथ मैच से पहले मैडम माया की हालत देख समझ सकते हैं.
मैडम माया अक्षय से कहती है 'अक्षय जज्बात में मत जाओ. तुम नही जानते अंडरटेकर की ताकत को'.
यह शब्द किसी बॉस के नही बल्कि एक प्रेमिका के थे, जो अपने प्रेमी को चोट लगते नही देख सकती थी.

'इन द नाइट नो कंट्रोल' गाना ,आज भी रेखा के सबसे रोमांटिक गानों में शामिल है. रेखा ने इस गाने में अक्षय कुमार के साथ इस तरह के अंतरंग दृश्य दिए थे, जो आज की सिनेमा के हिसाब से भी बहुत थे और शायद इसलिए ही कहा जाता है कि रेखा अपने समय की अभिनेत्रियों से कहीं आगे की सोच रखती थी. अक्षय और रेखा द्वारा कीचड़ में किए गए नृत्य को रेखा के चाहने वाले हमेशा याद रखना चाहते हैं.
फिल्म बनने के दौरान फिल्म की दोनों अभिनेत्रियों के बीच अक्षय कुमार को लेकर दूरी बनने की खबरें भी आती रही थी. यह भी कहा जाता था कि रेखा की अक्षय कुमार से इतनी नजदीकी बढ़ गई थी कि वह अक्षय के लिए घर से खाना बनाकर लाती थीं.

अपनी कहानी भी कह गई रेखा

इस फिल्म में रेखा ने शराब का गिलास हाथ में पकड़ कर अपनी जिंदगी की कहानी भी बयान कर ली थी. मैडम माया ने कहा था 'जब भी हमारी किस्मत हमें मुस्कुराता हुआ देखती है तो उसे जलन होने लगती है. किस्मत माया को सब कुछ दे सकती है, प्रिया सब कुछ. अगर नहीं दे सकती तो बस एक प्यार नहीं दे सकती. जो थोड़ी देर के लिए आकर हमारे दिल में ठहर जाए. अरे, अगर हमें जरा सी खुशी मिल जाती. तो किसी का क्या बिगड़ जाता? हर बार यही हुआ है'.

रेखा को उनके जीवन की खुशी मिली हो या नही, यह तो रेखा से बेहतर शायद ही कोई बता पाए. लेकिन रेखा ने अपनी खूबसूरती, फैशन और अभिनय से बॉलीवुड के चाहने वालों के दिलों में जो जगह बनाई, वह जगह शायद ही कोई और अभिनेत्री कभी ले पाएगी.

हिमांशु जोशी.
@himanshu28may


Wednesday, November 23, 2022

रचनाकारों की शानदार कृति है 'गली गुलियाँ'

गली गुलियाँ जैसी फिल्म बनाने के लिए बड़ी हिम्मत चाहिए, वह हिम्मत निर्देशक दीपेश जैन ने दिखाई.
 ऐसी फिल्मों को निर्देशक के अनुसार दिखा पाने के लिए जिस कला की आवश्यकता होती है, मनोज बाजपेयी ने उसे अपने जीवन का सबसे बेहतरीन अभिनय करते बखूबी प्रदर्शित किया है.
गली गुलियाँ अगर हॉलीवुड में बनी होती तो आज शायद ऑस्कर के लिए सबसे प्रबल दावेदार रहती.
 यह फिल्म भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए एक खजाना है, जिसे वह सहेज कर रख सकते हैं.
पुरानी दिल्ली की गलियों, तारों, पुरानी इमारतों से निर्देशक ने दर्शकों के लिए ऐसा जाल बुना है, जिसमें दर्शक फिल्म देखते-देखते खुद को भी उलझा हुआ महसूस करते हैं.

ऐसी फिल्म जो घर में फिट नही हुई पर विदेशों में हिट हुई

 साल 2018 में 'गली गुलियाँ' भारत के सिनेमाघरों में रीलीज हो गई थी, तब इस फिल्म को भारत में तो चर्चा नही मिली थी पर विदेशों में इसे खूब सराहा गया था. अब इसे अमेजन प्राइम में रीलीज किया गया है.

इस फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो पेशे से इलेक्ट्रिशियन है और पूरी दुनिया से कट चुका है.
वह अपने पुराने घर में अकेला रहता है और उसका सिर्फ एक दोस्त है जो उससे मिलने आता रहता है.
 घरेलू हिंसा, विवाहेतर सम्बन्ध के खतरनाक परिणाम की वजह से फ़िल्म का अंत दर्शकों को अवाक कर देता है.

एक मां के संघर्ष और बच्चे के मस्तिष्क में चल रही उथल पुथल को दिखाती, ऐसी फिल्म शायद ही आज तक इतिहास में कभी बनी हो.

दमदार कास्टिंग, जिसमें हर कोई प्रभावित करता है

फिल्म की कास्टिंग बहुत सही है, हर कोई अपने किरदार पर फिट बैठता है. मनोज बाजपेयी फिल्म की शुरुआत से ही दर्शकों को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं.
इस फिल्म में अपने हावभावों से उन्होंने हिंदी फिल्म जगत में अभिनय के मामले में खुद का बहुत ऊंचा स्तर स्थापित कर लिया है. शराब पीते होटल में लड़ने का दृश्य हो या अपने कटे हाथ को खुद सिल लेना, इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए मनोज को हमेशा याद किया जाएगा.
मनोज बाजपेयी के बाद गली गुलियाँ में ओम सिंह ने अपने अभिनय के झंडे गाड़े हैं. ओम सिंह ने इस फिल्म में 'इदरीस' नाम के बच्चे का किरदार निभाया है. इदरीस ने फिल्म में अपनी उम्र के बच्चों के कई सवालों को खोजने की कोशिश करी है. ओम सिंह का मासूम चेहरा, दर्शकों की आंखों के सामने कई दिनों तक घूमता रहेगा.
नीरज काबी की संवाद अदायगी, उनकी आंखों के साथ बहुत ही दमदार हो जाती है. रणवीर शौरी ने भी मनोज बाजपेयी के दोस्त का किरदार निभाने में कोई कसर नही छोड़ी है.

फिल्म 'रॉक ऑन' में दिख चुकी सहाना गोस्वामी ने इतनी दमदार स्टार कास्ट के बीच खुद को साबित किया है.
सायरा बनकर उन्होंने इस फिल्म के जरिए समाज में महिलाओं की बुरी स्थिति को दर्शकों के सामने रखा है. उन्होंने एक महिला के उस दर्द को पूरी तरह से स्क्रीन पर दिखाने में कामयाबी पाई है, जिसमें वह अपने पति के लिए सिर्फ एक वस्तु है. शादी के पहले और बाद में महिलाओं की स्थिति किस तरह बदल जाती है, यह हम सायरा को देख समझ सकते हैं.

सम्पादन और मेकअप से खास लगती यह फिल्म

फिल्म का सम्पादन प्रभावी है. दीवार के दोनों तरफ के दृश्यों को जिस तरह से दिखाया गया है, वह फिल्म की गतिशीलता को बनाए रखता है.
मनोज बाजपेयी के नीरस जीवन की तरह ही फिल्म का फीका रंग इसे देखते हुए दर्शकों को एक अलग दुनिया में रखता है.
फिल्म का पटकथा लेखन भी सही तरीके से लिखा गया है. मेकअप और कपड़ों पर काफी मेहनत की गई है. 
मनोज बाजपेयी को देखते हुए, उनके चेहरे और कपड़ों से ही कोई हारा हुआ व्यक्ति झलकता है. नीरज काबी और रणवीर शौरी का मेकअप भी फिल्म में उनके व्यक्तित्व को दमदार बनाता है.

बैकग्राउंड स्कोर भी कलाकारों के अभिनय की तरह दर्शकों को हिलाता जाता है.

गली गुलियाँ का बैकग्राउंड स्कोर बहुत ही शानदार है. इसमें आवाजें तभी सुनाई देती हैं, जब उसकी जरूरत महसूस होती है.
आवाजों का प्रयोग इस तरह किया गया है कि यदि दर्शकों को पानी टपकने की आवाज से विचलित करना है तो वह इस आवाज से खुद को विचलित होता महसूस करेंगे.

हिमांशु जोशी
@himanshu28may

Monday, November 14, 2022

हम दोनों चाचा नेहरू और इंदिरा नही हैं

जवाहर लाल नेहरू ने अपनी बेटी को साल 1928 में तीस खत लिखे थे, ये तब लिखे गए थे जब इंदिरा गांधी दस साल की थीं.

एक पिता के अपनी बेटी को लिखे खत हमेशा जरूरी होते हैं, मुझे नही लगता था कि तुम जब मात्र 39 दिन की होगी तब मुझे तुम्हें पहला खत लिखने की जरूरत पड़ जाएगी.

7 अक्टूबर को जब तुम्हारे रोने की पहली आवाज मेरी मम्मी के कानों में पड़ी थी तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया, वो खुशी थोड़ी देर बाद तुम्हारी माँ पर आई मुसीबत की वजह से चिंता में तब्दील होने वाली थी. पोस्टपार्टम हैमरेज, जिसमें मां के नॉर्मल डिलीवरी के बाद रक्तस्राव बन्द नही होता, उसकी वजह से तुम्हारी मां कुछ दिन अस्पताल में रही. 
जब चार दिन बाद हम अस्पताल से घर लौटे तो बच्ची के पालन पोषण में भारतीय समाज में आने वाली चुनौतियां, मेरे सामने खड़ी थी.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन

कुछ दिनों बाद तुम्हारी मां के व्यवहार में बदलाव नजर आने लगा था. तुम्हारी मां तुमसे दूर जाने लगी थी, आत्महत्या की बात करती, भूलने ज्यादा लगी थी, मुझपर विश्वास नही करती थी. मुझे ये लक्षण कुछ अजीब लगे और इस बारे में मैंने इंटरनेट खंगाला तो बेबी ब्लूज़ और पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में जानकारी मिली. यह सब मेरे लिए नया था, तुम्हें सम्भालने की चुनौती भी और तुम्हारी मां को भी. नवजात शिशु थोड़ी देर भीगे कपड़ों में रहे, भूखी रही तो सीधे उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. एक दिन सांस लेने में थोड़ी आवाज आने पर ही मम्मी और मैं, तुम्हें लेकर अस्पताल दौड़े थे. 
तुम्हारी मां की स्थिति के बारे में, मैं तुम्हारी नानी को बता चुका था और तुम्हारी मौसी भी तब घर ही थी,जब मैं तुम्हें मनोचिकित्सक के पास दिखाने लेकर गया.
मौसी के साथ तुम्हारी मम्मी को मनोचिकित्सक के पास दिखाने पर दो हफ्ते की दवाई मिली और तुम्हारी मां के जल्द ठीक होने का आश्वासन भी. 
खैर, यह खुशी तब चले गई जब मनोचिकित्सक को दिखाने के अगले दिन ही तुम्हारी मां ने बाथरूम में फिनाइल पी लिया. यह सब तब हुआ जब तुम्हारा पहला महीना पूरा होने पर तुम्हारी मां और मैं बाजार से केक लेकर आए ही थे. 
मैं, तुम्हारी मां को नदी किनारे घुमा रहा था, हमेशा की तरह अच्छा खिला रहा था, हर बात समझा रहा था पर फिर भी उसने बिना सोचे यह निर्णय लिया. 
 उसका दिमाग, उसके बस में नही था. खैर, समय पर उल्टी कराने से तुम्हारी मां बच गई पर अब मैं भारतीय समाज की बनावट के एक ऐसे ढांचे से गुजरने वाला था,जिससे हर पुरुष बचना चाहता है.

सुसराल पक्ष का अविश्वास

तुम्हारी मां को कुछ होता तो ससुराल पक्ष उसकी बीमारी बताने के बावजूद मुझे उसकी मृत्यु के लिए कसूरवार ठहराता. अब उनकी तरफ से मुझसे मनोचिकित्सक की पर्ची मांगी जाने लगी, कभी तुम्हें और तुम्हारी मां को अपने घर बुलाने की बात कही जाती.
इन 39 दिनों में तुम्हारी मां को छोड़कर शायद ही हमारे घर में कोई सोया हो, पहले पोस्टपार्टम हैमरेज में तुम्हारी मां का जीवन बचाने की कोशिश और फिर इस डिप्रेशन से.
समाज की हर समस्या पर नजर रखने और उस पर लिखने की वजह से जो हिम्मत हमेशा मुझमें रहती थी, उसी हिम्मत ने यहां मुझे मजबूत बनाया.

हां, भारत में महिलाओं पर अत्याचार ज्यादा हैं पर ससुराल पक्ष के न जाने कितने परिवार सही होने के बावजूद मेरी जैसे स्थिति से गुजरते हैं,मुझे नही पता. 

तुम क्या करना

एक लड़की अपनी मां से सिर्फ अपने कैरियर और शरीर को ठीक रखने की सीख सीखी हो तो उसके लिए एक शिशु की मां बनना बड़ी चुनौती है.
मुझे नही पता कि कल क्या होगा, तुम्हारी मां कब ठीक होगी. मैं कब तक अपना सारा काम छोड़ उसपर नजर रख सकूंगा! अगर सब कुछ ठीक नही रहा और तुम्हें अपनी नानी के घर रहना पड़ा तो कल मुझे कसूरवार मत ठहराना. इस बीमारी के बारे में समझना, पुरुषों पर कानून के गलत उपयोग के बारे में समझना और तुम अपनी राह खुद बनाना. 
ऐसी राह, जिसे तुम समझदार होते ही अपना लो. यह ऐसी राह न हो , जहां हर मां बाप अपने अनुसार, अपने बच्चों को चलाना चाहता है.
जहां माता पिता फैसला लेते हैं कि मेरी बेटी क्या पढ़े, पहने, खाए, किससे शादी करे.

 यह वह राह हो जहां तुम अपना सही गलत खुद समझो और मानसिक रूप से इतनी मजबूत बनो कि तुम किसी पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी बीमारी की जद में न आओ.

हिमांशु जोशी

Thursday, November 10, 2022

भारतीय दर्शकों की 'हार्दिक शुभकामना' काम न आई.

भारतीय ओपनरों की असफलता, कमजोर फील्डिंग और बेअसर गेंदबाजी की वजह से भारत को टी ट्वेंटी वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैच में इंग्लैंड से शर्मनाक हार मिली.

एडिलेड की पिच पर सेमीफाइनल के इस महत्वपूर्ण मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का मौका दिया. स्टोक्स के पहले ओवर में स्विंग करती गेंद के आगे भारत ने पहले ओवर में सम्भली हुई बल्लेबाजी कर बिना किसी विकेट के नुकसान पर छह रन बनाए.
वोक्स ने इंग्लैंड के लिए दूसरा ओवर किया और इस ओवर की चौथी गेंद पर राहुल, पिच पर हो रहे अतिरिक्त उछाल की वजह से विकेट के पीछे खड़े कप्तान बटलर को अपना कैच थमा बैठे. कोहली ने इसी ओवर की अंतिम गेंद पर अपना खाता भी खोला.

दर्शकों से खचाखच भरे इस स्टेडियम में सैम करन इंग्लैंड के लिए तीसरा ओवर लाए और उसमें एक रन देते हुए, उन्होंने भारतीय टीम पर दबाव बनाए रखा.
वोक्स के चौथे ओवर की पहली गेंद पर कोहली ने छक्का लगाकर भारत की रनगति को तेज किया तो इसके बाद करन और राशिद के ओवर में कप्तान रोहित ने भी अपने हाथ खोले.
भारतीय पारी का सातवां ओवर लिविंगस्टोन ने डाला जिनकी लेगब्रेक गेंदबाजी पर दोनों भारतीय दिग्गज बल्लेबाज सहज नजर आए.

मैच अभी तक तो दोनों टीमों की तरफ बराबर था पर आठ ओवर में मात्र 51 रन के बाद भारत को अब तेज रनगति के साथ रन बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही थी. 
जॉर्डन के नवें ओवर में रोहित इसी कोशिश में अपना विकेट गंवा बैठे.
अब भारत की तरफ से टी20 में धमाल मचा रहे विश्व के नम्बर एक ट्वेंटी ट्वेंटी बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव पिच पर आए और उन पर विराट के साथ मिलकर भारत को बड़े स्कोर की तरफ लेकर जाने की जिम्मेदारी थी.
 इस वक्त भारत दस ओवरों में मात्र 62 रन बनाकर जूझती दिख रही थी.

सूर्या के जल्दी निपटने के बाद हार्दिक शो और विराट फिर हिट.

एडिलेड के इस खूबसूरत मैदान पर इंग्लैंड के गेंदबाजों ने अब तक अपना दबदबा बनाया था पर स्टोक्स के ग्याहरवें ओवर में सूर्या के सुदर्शन चक्र की तरह चारों तरफ घूमकर लगते शॉट देख अंग्रेज झल्लाहट में दिखे. इससे पहले कि सूर्यकुमार इंग्लैंड टीम के लिए मुसीबत बनते, राशिद ने अगले ही ओवर उन्हें पैवेलियन चलता किया. अब हार्दिक मैदान पर थे और भारतीय खेमे के चेहरे पर कम रनों की चिंता भी दिखाई देने लगी थी.
वहीं लिविंगस्टोन और वोक्स ने भारतीय बल्लेबाजों का बल्ला शांत रखा हुआ था, हर भारतीय क्रिकेट फैन को अब विराट से एक विराट पारी की उम्मीद होने लगी.
पन्द्रहवें ओवर की समाप्ति पर भारत सौ रन पहुंच गया.

भारतीय पारी के अब मात्र पांच ओवर बचे थे और जॉर्डन  की गेंद पर विराट-हार्दिक फिर ज्यादा रन बटोरने में नाकामयाब रहे.
करन द्वारा फेंके गए सत्रहवें ओवर की पहली गेंद पर छक्का जड़ने के साथ हार्दिक ने इस ओवर में ग्यारह रन बटोरे और अब हार्दिक शॉट का ट्रिगर दब गया था. जॉर्डन के अगले ओवर में हार्दिक ने पहली दो गेंदों पर छक्के जड़ दिए, इसी ओवर में विराट ने 39 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया पर ओवर की अंतिम गेंद पर राशिद के हाथों में कैच थमा विराट पैवेलियन लौट गए.
उन्नीसवें ओवर में गेंद करन के हाथों में आई और अब हार्दिक को पंत का साथ मिला. आईपीएल ट्रॉफी विजेता हार्दिक ने इस अहम मैच में अपनी अहमियत साबित करते करन की गेंदों पर जमकर धुनाई लगाई और तीन गेंदों में लगातार चौका, छक्का, चौका लगाते अपना अर्धशतक पूरा किया. 
भारतीय पारी के आखिरी ओवर में जॉर्डन के सामने ऋषभ पन्त थे, जिन्होंने पहली ही गेंद पर सिंगल लेकर स्ट्राइक हार्दिक पांड्या को दे दी. इस गेंद में भी हार्दिक को सिंगल ही मिला। ओवर की तीसरी गेंद ऋषभ से छूट गई जिस पर हार्दिक ने दौड़ लगा दी, हार्दिक को आउट होता देख ऋषभ ने नॉन स्ट्राइकर एन्ड पर दौड़ लगाकर अपना विकेट कुर्बान कर दिया. ऋषभ की यह कुर्बानी बेकार नही गई, अंतिम गेंद पर हिट विकेट आउट होने से पहले 33 गेंदों पर 63 रन बनाकर अपने कैरियर की सबसे बेहतरीन पारी खेलते हार्दिक ने एक गगनचुंबी छक्का और दनदनाता चौका लगा लिया था.

गेंदबाज़ों और बल्लेबाजों को बराबर मदद करने वाली इस पिच पर भारत ने इंग्लैंड को 169 रनों का लक्ष्य दिया, जिसे इस पर पिच पर चुनौतीपूर्ण कहा जा सकता था.

बटलर-हेल्स के तूफान में उड़ा भारत.

इंग्लैंड की पारी बटलर और हेल्स के तूफान से शुरू हुई. भुवनेश्वर ने भारतीय पारी का पहला ओवर फेंका ,जिसमें बटलर ने 13 रन लूट लिए. भारतीय क्रिकेट के नए सितारे अर्शदीप ने दूसरे ओवर में आठ रन दिए पर भुवी के अगले ओवर में हेल्स के छक्के के साथ बारह रन आए.

 इंग्लैंड की इस तेज़ शुरुआत से सहमे भारत ने अब इंग्लैंड की रनगति रोकने के लिए स्पिनर अक्षर पटेल पर विश्वास किया. अक्षर ने इस ओवर में अंग्रेज बल्लेबाजों का बल्ला थोड़ा शांत रखा पर शमी के अगले ओवर में हेल्स ने अपना रंग दिखाते छक्का-चौका लगाकर, भारतीय कप्तान के साथ हर भारतीय क्रिकेट फैन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी.
अक्षर हों या अश्विन दोनों स्पिनरों की गेंदबाजी पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के शॉट बाउंड्री पार पहुंचते रहे और अक्षर के आठवें ओवर में हेल्स ने ताबड़तोड़ पारी खेलते अपना अर्धशतक भी पूरा किया.

कमजोर फील्डिंग और स्पिन गेंदबाजी की वजह से हार्दिक के नवें ओवर के बाद इंग्लैंड का स्कोर बिना किसी विकेट के नुकसान पर 91 रन हो गया.

दसवें ओवर में गेंद फिर अर्शदीप के हाथों में थी, जिसमें उन्होंने सिर्फ सात रन दिए. अब लगा कि भारतीय गेंदबाज इंग्लैंड टीम पर थोड़ा दबाव बनाएंगे पर अगले ओवर में हार्दिक की पहली ही गेंद पर हेल्स ने फिर से छक्का लगाकर इस गलतफहमी को दूर किया. इस ओवर में अंग्रेजों ने अपने सौ रन भी पूरे किए.
इंग्लैंड को अब 54 गेंदों में सिर्फ 61 रन की जरूरत थी और उनके सारे विकेट अभी शेष थे. मैच के इस अहम पड़ाव में अनुभवी अश्विन ने गेंद थामी पर हेल्स आज अपने पूरे रंग में रहे और छक्के-चौके के साथ उन्होंने इस ओवर में 15 रन कूट दिए.
अब इंग्लैंड की जीत एक औपचारिकता भर नजर आ रही थी और भारत को जीत के लिए किसी चमत्कार की ही जरूरत थी.
गेंद साधारण दिख रहे हार्दिक के हाथों में थमाई गई और बटलर ने हार्दिक के ओवर में लगातार चौका-छक्का लगाकर अपना अर्धशतक पूरा करने के साथ हर भारतीय क्रिकेट फैन को आज निराश करने की नींव डाल दी.
तेरह ओवर की समाप्ति पर इंग्लैंड का स्कोर बिना किसी विकेट के नुकसान पर 140 रन हो गया.

भारतीय टीम और उसकी कमजोर फील्डिंग.

जीत के लिए 40 गेंदों पर 29 रनों का पीछा करते बटलर किसी दबाव में नही दिख रहे थे और शमी की गेंद को तीन बार चौके-छक्के के लिए बाउंड्री पार पहुंचाते दिखे. यहां शमी की अंतिम गेंद पर भारत की कमजोर फील्डिंग दिखी जब सूर्यकुमार यादव ने कैच तो छोड़ा ही साथ में वह गेंद को बाउंड्री पार जाने से भी नही रोक सके. इस कमजोर फील्डिंग को ऋषभ ने अगले ओवर में भी जारी रखा जब उन्होंने हेल्स की स्टम्पिंग का आसान मौका छोड़ दिया.

इंग्लैंड की पारी का सोलहवां ओवर करने शमी, बटलर के सामने थे और इस ओवर की आखिरी गेंद पर छक्का मारकर इंग्लैंड ने भारत पर दस विकेट से एकतरफा जीत हासिल करते हुए फाइनल में पाकिस्तान के साथ भिड़ंत का टिकट हासिल कर लिया.
हेल्स 47 गेंदों पर 86 रन बनाकर नाबाद रहे तो बटलर ने नाबाद रहते 49 गेंदों पर 80 रन बनाए.

हिमांशु जोशी
@himanshu28may

आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?

*आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?* गर्मियों के मौसम में स्कूलों की छुट्टियों के साथ ही उत्तराखंड में चार...