Sunday, October 31, 2021
योंही जल बहता जाता है.
Saturday, October 30, 2021
इस दीवाली घर की लक्ष्मी पर ही बात हो जाए : 'पुरुषवादी मानसिकता' आख़िर कब तक!
Monday, October 25, 2021
सरदार उधम, आज देश को 'राम मोहम्मद सिंह आज़ाद' की ही जरूरत है.
Friday, October 22, 2021
उत्तराखंड बाढ़ पर : विनाशलीला ज़ारी है, अब भी नही चेते तो कब!!
डांठ का गेट खोलने के लिये नियुक्त पालीवाल बताते हैं कि 18 अक्टूबर को प्रातः 9 बजे से 18 इंच यानी डेड़ फिट पानी खोल दिया गया था, यह सर्वाधिक है और इससे ज्यादा गेट नहीं खोला जा सकता । फिर भी पानी की पूरी निकासी नहीं हो सकती थी क्योंकि बरस रहा पानी इस निकासी से कई गुना ज्यादा था । 23 अक्टूबर को जब नैनीताल समाचार की टीम यह जानकारी ले रही थी उस वक़्त भी यह निकासी 9 इंच थी और इसको कम नहीं किया जा सकता था क्योंकि विभिन्न स्रोतों से तथा लबालब भरे सूखाताल से पानी की भारी आमद जारी थी।
पिछाड़ी बाजार (हल्द्वानी रोड )की सभी दुकानें पानी की मार से पीड़ित रहीं । यूं देखने में रेहान की इलक्ट्रोनिक्स की दुकान फिट – फाट लग रही थी पर 18 अक्टूबर की आपदा ने पूरी दुकान का सामान बरबाद कर दिया था । इलैक्ट्रिक रिपेयर की दुकानें, कम्प्रेशर और वैल्डिंग की मशीनों वाली दुकानें खुली तो थीं पर काम धंधा ठप था, क्योंकि सारी मशीनें पानी की मार से खराब हो चुकी थीं । सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के मालिक भट्ट जी का सारा राशन खराब हो चुका था और बहुत सारा बह भी चुका था ।
यही हाल नया बाजार (हल्द्वानी रोड ) का भी था । नेशनल होटल के मालिक सुनील बताते हैं कि पानी की इस मार ने होटल तो होटल उनके घर को भी नहीं छोड़ा, जो नगर पालिका क्वाटर्स में है । इसके अतिरिक्त वर्मा जी (स्वर्णकार ) , जीतेन्द्र भट्ट , मनीष जोशी और मोहन काण्डपाल आदि कई दुकानदारों के सामान या तो बह गए या खराब हो गए।
आयुर्वेदिक डाक्टर रामेश्वरी की दवाएं तो सब खराब हो ही चुकी थीं जब समाचार की टीम वहां पर पहुँची तो उनके मरीजों और दवाओं की पर्चियां जो बूरी तरह भीगी थीं उन्हें वह धूप में सुखाने का प्रयत्न कर रहीं थीं ।
हरिनगर पहुंचते पहुंचते सूचना मिली कि जी.आई. सी . फील्ड के नीचे अभी अभी भू-स्खलन हुआ है । हम जब उस स्थान पर पहुंचे तो ठीक फील्ड के दाहिने ओर धूल का गुबार हमने उठते हुए देखा और अचानक बिजली के खंभे तारों साहित जोर जोर से हिलने लगे और कई जगह चिंगारियां भी निकलने लगी क्योंकि बिजली का कोर्ई खम्बा भूस्खलन की चपेट में आ गया था। वहां पर जमा स्थानीय लोग डर के मारे जान बचाने को ऊपर की ओर भागे । समाचार की टीम द्वारा तुरन्त यह सूचना विद्युत विभाग को दी ताकि किसी संभावित दुर्धटना से बचा जा सके। हरि नगर के स्थानीय निवासियों से ज्ञात हुआ कि फिलहाल एक परिवार को एक कमरे के हिसाब से फिलहाल प्रशासन ने उनके लिए एक अस्थाई व्यवस्था कर दी है परन्तु स्थानीय निवासी अत्यधिक गुस्से में थे कि आज तक बलिया नाले के नाम पर आ रहा करोड़ो रुपया कहां गया ? और वो अपने ही शहर में शरणार्थी क्यों हो गए हैं ?
जी.आई.सी. पहुंचने पर ज्ञात हुआ कि कुछ परिवार ऐसे हैं जिन्हें हर वर्ष आपदा आने पर जी.आई.सी. में शरण मिलती है तथा पुनः अगली बार आपदा आने तक उनसे कमरा खाली करा लिया जाता है।
सूखाताल पहुंचने पर लबालब सूखाताल के दर्शन कई वर्षों बाद हुए पर ज्ञात हुआ कि अब यह काफी खाली किया जा चुका है , परन्तु स्थानीय निवासियों ने किसी किस्म के नुकसान का जिक्र नहीं किया जबकि उनके भीगे फर्श कुछ और कह रहे थे।
बिड़ला क्षेत्र के कई – कई घरों में मलवा भरा हुआ है । गोविन्द बल्लभ पन्त चिकित्सालय ( रैमजे अस्पताल ) क्षेत्र में, अस्पताल कर्मचारियों को नोटिस दे दिए गए हैं कि वह अपने क्वार्टर खाली कर दें क्योंकि मंगावली क्षेत्र से भू – स्खलन की संभावनाएं बनीं हुई हैं । शिव मन्दिर के ठीक बगल से भू-स्खलन हुआ तो है पर इस भू-स्खलन के ठीक नीचे रह रहे कर्मचारी भाग्यशाली हैं कि वो सब बच गए क्योंकि भू-स्खलन से निकला एक बड़ा पत्थर, कर्मचारी निवास तक पहुंचने से पूर्व रास्ते में ही अटक कर रह गया।
हो गई क्षति की पूर्ति तो नहीं हो सकती पर 124 वर्षों में अभी तक रिकार्ड की गई सबसे अधिक वर्षा के बावजूद गनीमत है कि किसी को भी अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ा ।"
Sunday, October 17, 2021
'पिंक' से तुलना न करें तो देखने लायक है 'रश्मि रॉकेट'
'सूर्यवंशम' जैसी फ़िल्म की शुरुआत में एक महिला के लिए जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया वह अमर्यादित थे।
संचार के साधनों में महिलाओं को उत्पाद की तरह पेश किया जाता रहा है और इस पर नियंत्रण रखने के लिए बनाई गई संस्थाएं सोती रही हैं।
बॉलीवुड में महिलाओं के अधिकारों पर बहुत कम फिल्में बनी हैं, उनमें से एक फ़िल्म 'पिंक' की दमदार अभिनेत्री तापसी पन्नू की ही फ़िल्म होने की वजह से मैंने 'रश्मि रॉकेट' (Rashmi Rocket) को देखने के लिए चुना।
आकर्ष खुराना का 15 वर्ष का अनुभव काम आया
फ़िल्म उद्योग में बिताए अपने 15 सालों के दौरान आकर्ष खुराना का दम मारो दम, कृष 3, काइट्स जैसी फिल्मों में काम करने का अनुभव है और रश्मि रॉकेट के निर्देशन में उन्होंने उसी को झोंका है।
फ़िल्म अपने कौतूहल वाले नाम की तरह ही शुरुआत से सोचने पर मजबूर कर देती है। पुलिस का थप्पड़ खाती रश्मि रॉकेट बनी तापसी पन्नू को देखने के बाद दर्शक 14 साल पहले की कहानी में पहुंच जाते हैं।
गुजरात की रश्मि रॉकेट के पिता की भूमिका में अपने छोटे से रोल में मनोज जोशी प्रभावित करते हैं तो रश्मि की मां बनी सुप्रिया पाठक ने अपना किरदार बखूबी निभाया है।
गुजरात भूकम्प के फ्लैशबैक में पहुंच कहानी फौजी ट्रेनर बने प्रियांशु पैन्यूली के प्रोत्साहन पर रॉकेट के दौड़ने पर पहुंचती है।
रॉकेट बनी तापसी बहुत जल्द अपनी दौड़ से नाम कमा लेती है।
इसी बीच गुजराती संगीत तो अच्छा लगता है पर बिन हेल्मेट के गाड़ी चलाती तापसी सही सन्देश नही देती।
प्रियांशु पैन्यूली की पहचान वेब सीरीज़ मिर्जापुर से होती थी फ़िल्म में वह तापसी के साथ जोड़ी बना जचे हैं।हल्की मूछों में फौजी बने प्रियांशु अपने सादे अभिनय से प्रभावित करते हैं, उम्मीद है फ़िल्म से उन्हें नई पहचान मिलेगी।
फ़िल्म जैसे आगे बढ़ती है हम उसमें भारतीय महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले गलत व्यवहार के बारे में जानकारी पाते हैं।
खेलों में होने वाली राजनीति पर भी फ़िल्म प्रकाश डालती है, तापसी उसे जीती हुई लगती हैं।
फ़िल्म का असली मुद्दा वहां से पता चलता है जब थप्पड़ वाला शुरुआती दृश्य वापस आता है।
जेंडर टेस्ट नाम का एक ऐसा नाजुक मुद्दा जिस पर शायद हिंदी फिल्म जगत में कभी बात हुई हो और भारतीय खेल प्रशंसकों ने भी शायद इस मुद्दे पर कभी अपने खिलाडियों का साथ दिया हो।
अभिषेक बनर्जी ने वकील के तौर पर फ़िल्म में एंट्री मारी है, जिसमें वह जेंडर टेस्ट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रश्मि के साथ- साथ जेंडर टेस्ट के शिकार अन्य खिलाड़ियों को भी न्याय दिलाना चाहते हैं। अभिषेक बनर्जी को देख यह महसूस होता है कि फ़िल्म रंग दे बसंती से शुरू हुआ उनका फ़िल्मी सफ़र अब ट्रैक पर आ जाएगा।
वह पहले घण्टे के बाद फ़िल्म की जान हैं पर कोर्टरूम की गम्भीरता वैसी नही लगती जैसी होनी चाहिए थी जबकि फ़िल्म के अंतिम 40-50 मिनट कोर्टरूम के ही हैं।
पिंक में अमिताभ बच्चन ने वकील की भूमिका के साथ जो न्याय किया था, किसी अन्य अभिनेता से उसकी बराबरी की उम्मीद रखना बेमानी ही है।
जज के रूप में सुप्रिया पिलगांवकर ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है।
फ़िल्म के संवाद और गीतों के बोल ऐसे नही हैं जो लंबे समय तक याद रखे जाएं।
गुजरात, रांची के दृश्य खूबसूरत दिखे हैं तो शादी के जोड़े में तापसी भी उतनी ही अच्छी लगी हैं।
जेंडर टेस्ट के समय तापसी को दी गई प्रताड़ना और फ़िल्म के अंतिम क्षणों में अपने होने वाले बच्चे से तापसी की बातचीत वाले दृश्य उनके दमदार अभिनय के हिस्से हैं।
अगर आप पिंक से तुलना न कर इस फ़िल्म को देखने का मूड बनाते हैं तो आप रश्मि रॉकेट से निराश नही होंगे।
जेंडर टेस्ट इन स्पोर्ट्स के बारे में गूगल सर्च करने पर आपके सामने बहुत सी जानकारियां सामने आएंगी और इस वज़ह से शायद कभी आप जेंडर टेस्ट की वजह से परेशान किसी खिलाड़ी का साथ देने आगे आएंगे, यही तो फ़िल्म का उद्देश्य है।
समीक्षक- हिमांशु जोशी
फ़िल्म- रश्मि रॉकेट
रिलीज़- जी5 ओटीटी प्लेटफॉर्म
निर्देशक- आकर्ष खुराना
निर्माता- रोनी स्क्रूवाला
संगीत- अमित त्रिवेदी
अभिनय- तापसी पन्नू, अभिषेक बनर्जी, प्रियांशु पैन्यूली, सुप्रिया पाठक, मनोज जोशी, सुप्रिया पिलगांवकर
Tuesday, October 5, 2021
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