Friday, December 29, 2023

delhi anurag

प्रवासी मंच में लेखक अनुराग शर्मा का प्रबोधन।
अमरीका में हिंदी को कैसे देखा जा रहा है!

अनुराग शर्मा ने नई हिंदी का प्रयास करते हुए एक अप्रकाशित रचना पढ़ी।

पहली कहानी

शरीर की बीमारी को रोचकता से बताया। कैसे इंसान का शरीर उम्र बढ़ते साथ छोड़ देता है।
प्रोस्टेट कैंसर को झेलते उन्होंने ये रचना लिखी और उसे कागज पर उतारा।
फोन इस्तेमाल के बारे में भी।

गौरांग शब्द बड़ा रोचक। अंग्रेजी का इस्तेमाल भी कहानी में बड़ा रोचक था।

कहानी रोचकता ही बनाए रहती है, लेखक बाद में खोलते हैं कि बीमारी की बात, मृत्यु की बात।

 लेखक की उधेड़बुन, जीते जी तो साहित्य की बात। मृत्यु के बाद भी साहित्य की बात ही।

दूसरी कहानी।

ऐसी की सब कुछ सामने ही घटित हो रहा हो। 


एक इंसान के रिश्तों की कहानी।
जिन घटनाओं से वह जीवन भर जूझता रहता है।
माता-पिता के रिश्तों की वजह से बच्चे जो झेलते हैं, इस कहानी में हिंदी का शानदार प्रयोग।

तीसरी कहानी। अंग्रेजी में।

एक विशेषता की हर कहानी में पत्ते धीरे धीरे खुलते हैं।
अंधविश्वास से भरी कहानी कि कोई कहीं भी रहे वो अपने धर्म, अपने देश को नही भुलता। उसकी जिंदगी बस उन्हीं विचारों में डूबी रहती है। asap जैसे नए शब्दों का इस्तेमाल44 भी।

Setu..

अमरीका में लिखने वाले बहुत हैं। पुरस्कार मिल रहे हैं भारत में।
यहां की किताबें नही मिल पाती वहां। कनेक्शन नही रह पाता यहां के साहित्य से।


प्रतुल जोशी

हिंदी की सेवा और साहित्य सृजन में निरत अमरीका वासी अनुराग जी

परसों (यानी 29 December ) किसी कार्य  से दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी के कार्यालय गया तो पता चला कि वहाँ किन्ही अनुराग शर्मा जी का कार्यक्रम है। मैं भी उत्सुकतावश उस कार्यक्रम में शरीक हो गया।जब अनुराग जी बोलने लगे तो ज्ञात हुआ कि आप पिछले दो दशकों से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे हैं और वहाँ रह कर हिंदी  साहित्य के प्रचार प्रसार और साहित्य सृजन से जुड़े हैं। पिछले 5 वर्षों से आप “सेतु” नाम का की एक ऑनलाइन पत्रिका भी निकाल रहे हैं जो हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में है। अनुराग जी ने अपना एक उपन्यास अंश और एक कहानी हिंदी में और एक कहानी अंग्रेज़ी में सुनायी। अनुराग जी ने अपने करियर की शुरुआत एक बैंक अधिकारी के तौर पर की थी और फिर बैंक में उन्हें कंप्यूटर से संबंधित कार्य दिया गया। कंप्यूटर में दक्षता हासिल करने के बाद आप अमरीका चले गए और वहाँ सॉफ़्टवेयर उद्योग में पिछले 2 दशकों से काम कर रहे हैं। एक बेहद मिलनसार, मितभाषी और शानदार इंसान लगे अनुरागजी जी।




Saturday, December 9, 2023

राजेश शाह

मुक्तेश्वर से बॉलीवुड में दस्तक।

उत्तराखंड राज्य में रहकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह फ़िल्म बनाना 'समोसा एंड सन्स' के मेकरों के लिए आसान नही रहा था। इसके बारे में बात करते फिल्म के डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी और फिल्म की निर्देशक शालिनी शाह के पति राजेश शाह बताते हैं कि इस फिल्म का निर्माण कोरोना काल में हुआ था , जब बहुत सारी पाबंदियां लागू थी और उन सब के बीच अपने कलाकारों और सामान को मुंबई से यहां लाना बड़ा मुश्किल काम था। संजय मिश्रा, बृजेंद्र काला जैसे बड़े नाम ने इस फ़िल्म में काम करने के लिए हामी भरी, तो फिल्म बनाने का सपना पूरा होता चला गया।

 शालिनी शाह और राजेश शाह के साथ फिल्म के लेखक दीपक तिरुआ ने उत्तराखंड से बॉलीवुड में जो दस्तक दी है, वह उत्तराखंड में फिल्म निर्माण के जरिए बॉलीवुड तक पहुंचने का सपना देखने वालों के लिए एक प्रेरणा बन सकते हैं।
राजेश शाह इस बारे में बात करते हुए कहते हैं कि जब मैं 1989 में पुणे एफटीआईआई पढ़ने गया था तो मेरी मां रात भर रोई थी कि ये कौन सा भविष्य बनाने चला गया।
आज इतने सालों बाद भी फिल्म मेकिंग को एक अच्छे करियर के तौर पर नहीं जाना समझा जाता है, हर कोई डॉक्टर, इंजीनियर, फौजी बनना चाहता है। उत्तराखंड के कॉलेजों को अभी मुंबई,बंगाल से फिल्म मेकिंग की बराबरी करने में बहुत काम करना है क्योंकि ये अभी इन बड़े शहरों से फ़िल्म से जुड़ी पढ़ाई के मामले में पीछे हैं।
 यहां पर इनसे जुड़ी पढ़ाई कराई जानी बहुत जरूरी है।

आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?

*आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?* गर्मियों के मौसम में स्कूलों की छुट्टियों के साथ ही उत्तराखंड में चार...