Monday, January 29, 2024

जीने की कला सिखाती 'यादगार-ए-ग़ालिब'।

मिर्जा गालिब पर अल्ताफ हुसैन हाली की लिखी उर्दू किताब 'यादगार-ए-ग़ालिब' का अनुवाद दीपक रूहानी द्वारा किया गया है और यह किताब रेख्ता पब्लिकेशन से प्रकाशित होकर आई है। हिंदी पाठक मिर्जा गालिब की पूरी जीवन यात्रा से इस किताब के जरिए वाकिफ़ हो सकेंगे। शानदार अनुवाद की वजह से किताब के पाठक मिर्जा द्वारा रचनाओं को रचने के तरीकों को समझने में कामयाब रहे हैं और इस वजह से उनकी नजरों में मिर्जा के प्रति सम्मान बढ़ता ही जाएगा। पाठकों को किताब पढ़ने के बाद यह सीख भी मिलेगी कि मुश्किल परिस्थितियों के बीच कोई शख्स, साधारण से कैसे महान बनता जाता है।



आवरण चित्र से ही ग़ालिब को जानने की जिज्ञासा बढ़ जाती है।

यादगार ए ग़ालिब किताब अल्ताफ हुसैन हाली की लिखी है, जिसका अनुवाद दीपक रूहानी ने किया है। यह खजाना रेख्ता पब्लिकेशंस की तरफ से आया है। किताब का आवरण चित्र सुंदर है, जहां हम ग़ालिब की छवि देखते हैं और पिछले आवरण में 'मिर्ज़ा ग़ालिब की पहली जीवनी' शीर्षक लिखा है, इसके अंदर लिखी जानकारी किताब पढ़ने से पहले जाननी बहुत जरूरी है।

ये अनुवाद और हाली एक परिचय, इनके साथ है किताब बनने की कहानी।

'ये अनुवाद' में अनुवादक ने किताब में किए गए अनुवाद के सफर को पूरी तरह से पाठकों के सामने रख दिया है। जिससे यह विश्वास हो उठता है कि हिंदी पाठकों को इस किताब को समझने में कोई बड़ी मुश्किल पेश नहीं आएगी। इसके बाद 'हाली एक परिचय' को किताब के अनुवादक दीपक रूहानी ने बड़े खूबसूरती के साथ लिखा है, जैसे वह हाली के बारे में लिखते हैं कि हाली न तो अतीत के प्रशंसक हैं और न ही आधुनिकता के विरोधी।

भूमिका में छिपी किताब की गहराई।

भूमिका में ग़ालिब के मान सम्मान के बारे में लिखी पंक्ति 'जमाने के ये तमाम मान सम्मान जियादा से जियादा उस बुढ़िया के जैसी कोशिश थी जो एक सूत लच्छी लेकर यूसुफ को खरीदने मिस्र के बाजार में आई थी।' यह साबित कर देती है कि ग़ालिब को वह मान सम्मान कभी नहीं मिला जिसके वह हकदार थे और इस पंक्ति को पढ़कर यह भी महसूस हो जाता है की किताब में ग़ालिब के बारे में लगभग हर जानकारी पढ़ने को मिल जाएगी।

शुरुआत से ही दमदार किताब।

यादगार ए गालिब की शुरुआत ग़ालिब की पैदाइश से होती है। लेखक ने मिर्जा से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए कई पुस्तकों की मदद ली है, जैसे पृष्ठ संख्या 24 में 'दुरूफश ए कावियानी' किताब का हवाला दिया गया है। किताब पढ़ते हिंदी पाठक भी ग़ालिब के शेर अनुवाद के जरिए समझ जाते हैं, इससे ग़ालिब को शायद अब ज्यादा लोग समझने लगें। जैसे पृष्ठ 28 में मिर्जा के फ़ारसी शेर का भावानुवाद कुछ इस तरह लिखा है ' जो कुछ कुदरत के खजाने में मौजूद है। ये सब मेरा है। फूल यद्यपि अभी शाखा से जुदा नहीं हुआ है, लेकिन मैं उसे भी अपने दामन में आया हुआ समझता हूं।'

जीवन में उस्ताद का होना जरूरी है। दाम्पत्य जीवन पर भटकी किताब।

लेखक ने गालिब के जीवन के लगभग हर पहलू को छुआ है और उसमें एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने किसी के जीवन में उस्ताद की भूमिका का महत्व बताया है। मुल्ला अब्दुस्समद और ग़ालिब के रिश्ते पर किताब में लगभग तीन पन्ने लिखे गए हैं, जो एक शिष्य के जीवन में उस्ताद का महत्व समझाने के लिए काफी हैं। मिर्ज़ा ग़ालिब का दांपत्य जीवन वह हिस्सा है, जिस पर किताब में विस्तार से लिखे जाने की आवश्यकता महसूस होती है और दांपत्य जीवन पर लिखा हुआ किताब में बिखरा सा महसूस होता है लेकिन इससे जुड़ा हर लतीफा कमाल है।

किताब वाली सीख और मिर्जा की यात्रा से उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश।

किताब में मिर्जा के बारे में रोचक तथ्य बताया गया है कि वह किराए पर किताब मंगवाते थे। आज के दौर में जब किताब पढ़ना बहुत कम हो गया है, तब मिर्जा का किराए में लेकर भी किताब पढ़ना एक बहुत बड़ी सीख दे जाता है।
लेखक ने 'कलकत्ता वालों से वाद विवाद और लखनऊ का प्रवास' से मिर्जा के व्यक्तित्व पर भी रोशनी डाली है। जैसे पृष्ठ 36 में लिखा है 'यद्यपि मिर्जा के तरफदार भी कलकत्ता में बहुत थे, मगर चुंकि मिर्जा ऐतराज़ और मुखालिफत से बहुत विचलित हो जाते थे'। इसी तरह 'सरकारी नौकरी से इंकार' जैसा किस्सा भी मिर्जा का व्यक्तित्व हमारे सामने लेकर आ जाता है।

वाह मिर्जा के साथ मिर्जा का दर्द भरा जीवन।

पृष्ठ 42 में मुस्तफा खां के बारे में मिर्जा के लिखे का फारसी से भावानुवाद किताब में चार चांद लगा देता है। 'इस वाकिए में मुस्तफा खां ने जिस तरह मेरा साथ दिया, उसे देख कर मुझे मौत का डर नही रहा। मैं मर जाऊं तो क्या परवाह? रोने वालों में मुस्तफा खां मौजूद है।

किताब में मिर्जा के परिवार के बारे में लिखा है कि कैसे वह बच्चों को लेकर हमेशा ही दुखी रहे। पृष्ठ 49 में ग़दर के हालात और इसके आगे के पृष्ठ में भाई को लेकर लिखी दर्दभरी शेर, मिर्जा के दिल में दफन दुख को हमारे सामने ले आती है।

समीक्षकों के लिए उदाहरण और लेखक की दूरदर्शिता।

मिर्जा ने 'बुरहान' किताब में जिस तरह त्रुटियां खोजी और एक नई किताब लिख डाली, वह नए लेखकों और समीक्षकों के लिए एक प्रेरणा है। पृष्ठ 55 में आज हमारे देश और समाज के हालात पर एक महत्वपूर्ण पंक्ति लिखी है। इसे पढ़कर ऐसा लगता है मानों लेखक आज के समाज पर ही लिख रहे थे 'विरोध की वजह जाहिर है। देखा-देखी कोई काम करना, न सिर्फ धार्मिक मामलों में बल्कि हर चीज, हर काम, हर इल्म और हर फन में ऐसा देखा जाता है कि खोजबीन का ख्याल न खुद किसी के दिल में आता है और न किसी दूसरे को इस काबिल समझा जाता है कि बुजुर्गों- पूर्वजों के खिलाफ कोई बात ज़बान पर लाए।'

पृष्ठ 68 में मिर्जा के आत्मसम्मान से जुड़ी उनकी खुद की लिखी पंक्ति 'समझ में नहीं आता के आपने किताब की कीमत क्यूं पूछी है? मैं निर्धन हूं, मगर कमीना नहीं हूं'  किताब को प्रभावी बनाती है, वहीं इसके साथ लेखक ने भी किताब में अपने कुछ ऐसे वाक्य लिखे हैं जो मिर्जा गालिब की इस जीवनी को पाठकों के जेहन में हमेशा जिंदा रखेंगे, जैसे किताब में एक जगह लेखक ने लिखा है 'स्वभाव में सरलता और तेज दिमाग होना एक साथ बहुत दुर्लभ होता है।'

हिमांशु जोशी
@himanshu28may

श्रेया "अरे ये तो मेरी फ़ोटो है ना माँ?"
मां अपनी बेटी श्रेया से "हाँ बेटा जब तुझे पहली बार हॉस्पिटल से घर लाए थे, उसी दिन की फोटो है ये|"

"पर मम्मी इन सारी फोटो में कहीं दादीजी नजर नहीं आ रही" श्रेया अचंभित होकर अपनी मां से पूछती है |
 
माँ एक लंबी चुप्पी साधे हुए, बेटी दोबारा,  "माँ बताओ ना दादी कहाँ थीं जब मेरा जन्म हुआ??????? और...... आप इतनी परेशान क्यों लग रही हो इन फोटोज़ में? प्लीज बताओ ना माँ?"

(माँ इमोशनल होते हुए) "बेटा, तेरी दादी ये नहीं चाहती थी कि मुझे लड़की हो, उन्होंने पूरे नौ महीने तक घर में लड़की का ज़िक्र तक करने के लिए मना किया था | यहां तक कि........ मुझे लड़का पैदा हो, इसके लिए कई उपाय भी करवाये थे पर जब...... उन्हें पता चला कि लड़की पैदा हुई है,  वह तभी हॉस्पिटल से चली गयीं।  तेरी शक्ल भी नहीं देखी उन्होंने, मुझे भी काफी बातें सुनाईं 5-6 दिन तक अपने भाई के घर पर रहीं, फिर जैसे-तैसे तेरे पापा समझा-बुझा कर उनको तेरी छठी वाले दिन घर वापस लाए और यहां वापस आकर भी उनका मुंह ही बना हुआ था |


(बेटी मां से गले लगाते हुए ) मां "चल, कोई नहीं बेटा लड़कियों की तो शुरू से समाज में यही हालत रही है यह तो सबको पता है | यह तो इस समाज के शुरू होने से ही होता आया है।

"पर मां हमारे ये हालात कब तक रहेंगे?"  श्रेया ने मां से पूछा।

मां "बेटा,  हम ऐसे नहीं थे तुम्हारे पापा का तो अपना बिजनेस था टूर एंड ट्रेवल्स का। पर उनकी मौत के बाद सब उनके पार्टनर्स और उनके भाई ने हड़प लिया और जब उनसे कोई हिसाब-किताब मांगा तो उल्टा हमारी तरफ ही कर्ज़ा निकाल दिया |

"मम्मी, आज पापा की 20वीं बरसी है ना, आप उदास मत हो पापा हमारे साथ हमेशा हैं और  मैं भी तो हूं ना आपके साथ हमेशा |"
श्रेया अपनी मां को समझाते हुए

सीन 2

टीचर,  "चलो स्टूडेंट आज मैथ्स पढ़ेंगे  |"   "ओके सर" सभी विद्यार्थी जवाब देते हुए परंतु श्रेया की तरफ से कोई जवाब नहीं |

"श्रेया कुछ तो बोल,  सर तुझे देख रहे हैं |" श्रेया की दोस्त पलक उसके कंधे पर मारते हुए |
"हां, नहीं,  हां, हां जी कहते हुए अचानक श्रेय अपनी गहरी सोच से बाहर आई |

सीन 3

(दोनों सहेलियां क्लास के बाद घर जाते हुए)

"क्या बात है श्रेया आज तुम उदास क्यों हो ?" पलक ने पूछा|

"नहीं तो, कुछ नहीं यार" श्रेया ने जवाब दिया |

"बताओ ना श्रेया तुम ऐसी नहीं हो प्लीज मुझे बताओ क्या हुआ है ?" पलक श्रेया के साथ चाय की दुकान की तरफ बढ़ते हुए दोबारा पूछते।

"बस कुछ नहीं यार आज पापा की 20वीं बरसी है,  उनकी बहुत याद आ रही है मम्मी भी उदास है आज का दिन हमारे लिए बेहद खराब दिन होता है |" श्रेया ने उदास भाव से कहा।

(चाय की दुकान के अंदर पहुंच कर दोनों सहेली आमने सामने बैठ जाती हैं)
पलक राम चाचा आज ऐसी कड़क चाय दो कि मेरी दोस्त भी कड़क बन जाए।

पलक "देख श्रेया, मैं तेरी परेशानी समझती हूं और जो तुझ पर और आंटी पर बीत रही है, मैं वो भी समझती हूं पर मैं तेरी दोस्त हूं और दोस्त होने के नाते तुझे इतना समझाती हूं कि तू एग्जाम की तैयारी कर |  तेरी मेहनत जरुर रंग लाएगी तू जल्दी ही बड़ी पुलिस अफसर बनेगी,  भरोसा रख और मेहनत कर |" 
 "देख फिर तेरे पापा का भी सपना पूरा हो जाएगा सब जल्दी ठीक हो जाएगा |"
(दोनों दोस्तों के पास चाय आ जाती है)

सीन 4
(कुछ महीनों बाद श्रेया अपने फाइनल इंटरव्यू की तैयारी कर रही है, मां की तबीयत  खराब रहती है)

"मां,, मां,, कुछ नहीं होगा आपको"  श्रेया अपनी मां को संभालते हुए बाथरूम से लाती है,जहां उसकी माँ उल्टी कर रही थीं |

"देख बेटा मैं भी सच्चाई जानती हूं और तू भी, ज्यादा दिन नहीं है मेरे पास आखिर यह कैंसर है ही ऐसी बीमारी, ये जिसे लग जाए ना वह इंसान नहीं बच पाता पर तू मुझे माफ करना बेटा अगले महीने तेरा फाइनल इंटरव्यू है और मैं............"
ऐसा कहते हुए मां पलंग के सहारे नीचे फर्श पर ही बैठ जाती है और रोने लगती है | श्रेया भी अपनी मां के साथ वहीं बैठ जाती है और दोनों मां बेटी एक दूसरे से गले लगा कर बिलख-बिलख कर रोने लगती हैं |

सीन 5
(अगली सुबह)

"मां... मां.…... कुछ तो बोलो माँ,,, उठो माँ, जोर जोर से चिल्लाते हुए श्रेया ने सभी पड़ोस वालों के इकट्ठा कर दिया।

अंकल देखो ना मम्मी बोल क्यों नहीं रही श्रेया रोते हुए पड़ोसी से बोलती है।

सभी पड़ोसी इकट्ठा हो जाते है, उसे समझाते हैं। कोई गले लगाता है ,कोई सर पर हाथ फेर रहा है ,कोई उसके बेसुध होने पर उसके हाथ पैर पकड़ने की कोशिश कर रहा है।

बेटा हम हैं ना तेरी मां क्यों फ़िक्र करती है पड़ोस की एक आंटी श्रेया को समझाते हुए कहती है।
"हम हैं ना श्रेया हम सब एक परिवार जैसे ही तो हैं। हम सब हमेशा तेरे साथ हैं तो खुद को संभाल बच्चे | (कई सारी औरतों में से एक कहती है)
 मां अब हम सबके बीच में नहीं रही पर हम हमेशा तेरे साथ तेरे आसपास ही रहेंगे तू अकेली नहीं है तो खुद को अकेला मत समझ |" (एक और पड़ोसी महिला)

पड़ोसी महिलाओं में कोई उसे पुचकार रहा होता है,  कोई उसके आंसू पोंछता है, उसके बालों को सहलाता है तो कोई उसको गले लगाता है। 

पर माँ तो आखिर मां ही होती है और श्रेया के पास तो सिर्फ एक माँ ही थी | अब कौन उसका हौसला बनेगा?  अब वह फाइनल एग्जाम कैसे देगी?  क्या श्रेया का पुलिस अफसर बनने का सपना कभी पूरा होगा? 
 ऐसे ना जाने कितने सवाल श्रेया की मां जाते-जाते छोड़ गई थी।

Sunday, January 21, 2024

बीए पास।

वो झण्डा।

पैरों में हवाई चप्पल, कमर से नीचे पहनी जीन्स और काली टीशर्ट पहना शुभम भी आज उस भीड़ में किसी राजनीतिक दल का झण्डा लहराता उछलता-कूदता दिख रहा है, जो शहर के बीच बने एक टिन शेड के उद्घाटन के लिए निकल रही है।
बताया जा रहा है कि टिन शेड को शहर के सभी भिखारियों के लिए बनाया जा रहा है लेकिन शुभम का उसके उद्घाटन के लिए जा रही भीड़ में शामिल होना मुझे समझ नही आया।

स्कूल टाइम में बड़े ही सलीके से बालों की साइड वाली मांग निकाल कर आने वाला शुभम, परफेक्ट डील डौल वाले शरीर पर प्रेस किए कपड़े पहन बड़ा ही अच्छा लगता था। 
शुभम उन लड़कों में था ,जिनकी तरह मैं बाल बनाना और बाजू फोल्ड कर दिखना चाहता था।

सालों बाद शराब पिए और मुंह में चोट खाए शुभम को खुद से पैसे मांगते देख मैं चौंक गया था।

आसपास पूछने पर पता चला कि शुभम और उसका बड़ा भाई टैक्सी में सवारी भरते हैं, जिसकी जगह टैक्सी वाले उन्हें शराब पीने के पैसे दे देते हैं। शुभम और उसका भाई एक अच्छे मध्यमवर्गीय परिवार से थे, ये परिवार उन परिवारों में से एक था जो साल 2000 के आसपास दो तीन हजार रुपए में भी अपना पेट पाल लेते थे।
कुछ सालों बाद शुभम के माता-पिता को कोई गम्भीर बीमारी हो गई थी, जिसका खर्चा पन्द्रह बीस लाख रुपए था और इनकी व्यवस्था न कर पाने की वजह से दोनों इस दुनिया से चल बसे।
स्कूल खत्म होने के बाद शुभम और उसके भाई ने पास के ही डिग्री कॉलेज से बीए पास किया था पर लाख पैर पटकने के बावजूद दोनों को अपनी बीए की डिग्री से कहीं भी नौकरी नही मिली थी।

शाम खत्म हो रही थी और अंधेरा बढ़ने लगा था, शुभम टैक्सी स्टैंड के पास जल- बुझ रही स्ट्रीट लाइट के नीचे अर्धनग्न हो नाली पर बेसुध लेटा हुआ था। जिस राजनीतिक झंडे को उसने उद्घाटन के वक्त पकड़ा था, वो वहीं उसके पेट के नीचे दबा पड़ा था।

रवि

गले में गमछा डाले रवि मेरी तरफ बढ़ा तो पहली बार में तो पहचान ही नही आया। लंगड़ाता, मुंह में गुटखा भर रवि सालों पहले के उस रवि से बिल्कुल विपरीत था जिसका चेहरा नीले रंग की स्कूल शर्ट में नीले रंग की तरह ही चमकदार था। 
रवि के पिता एक सरकारी कर्मचारी थे और बचपन से ही रवि के लिए उन्होंने किसी तरह की कोई कमी नही रखी। स्कूल में स्प्लेंडर मोटरसाइकिल लाने वाले लड़कों में रवि पहला ही रहा होगा।
स्कूल खत्म होने के बाद अन्य दोस्तों से पता चला था कि रवि ने शहर के ही कॉलेज में बीए के लिए दाखिला लिया है। 
समय समय पर रवि के पोस्टर शहर की दीवारों पर दिख जाते थे, 'डिग्री कॉलेज अध्यक्ष पद के लिए अपने रवि को विजयी बनाएं'।

छात्र राजनीति का चमकता सितारा क्षेत्र के बड़े से बड़े नेता के साथ उठता बैठता था।
झारखंड के सुदूर गांव में रोजगार का कोई अवसर न मिलने पर रवि दिल्ली चला गया। भारत की सर्वाधिक प्राप्त किए जाने वाली डिग्री 'बीए' से भला उसे दिल्ली में नौकरी भी क्या मिलती। कुछ दिनों उसने वहां किसी शोरूम में सेल्समैन की नौकरी की और उसके बाद रवि वापस झारखंड अपने गांव आ गया।

पुराने राजनीतिक सम्बन्धों के चलते रवि क्षेत्रीय विधायक जी का सामान उठाने वाला बन गया था। बाइक के लिए तेल के साथ महीने में कपड़े खरीदने का खर्चा भी रवि को मिलने लगा था। राजनीतिक पकड़ के चलते अब रवि ने जंगल की लकड़ी बेचना शुरू कर दिया है और इसी काम में कभी पैर तो कभी कंधों में चोट खाता मेरा बचपन का यार ऐसा उलझा कि खुद को भूल गया है।

हिमांशु जोशी।

Friday, January 12, 2024

'जय श्री राम' में डूबा हुआ सोशल मीडिया।

इन दिनों भारतवर्ष में सब जगह एक ही नाम की गूंज है, राम नाम की गूंज। भारत में लोग एक दूसरे का अभिवादन करने में 'नमस्ते' के साथ 'राम राम' भी बोलते आए हैं और इन दिनों यह राम राम 'जय श्री राम' में बदलता दिख रहा है। अयोध्या में 360 फीट लंबे और 235 फीट चौड़े भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है और इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी के दिन होगी। लोगों में मंदिर को देखने का भारी उत्साह दिखाई दे रहा है, सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश का अयोध्या चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े वीडियो, पोस्ट, फोटो को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर और लाइक किया जा रहा है।

फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब एक्स), वाट्सएप और यूट्यूब पर अयोध्या और राम मंदिर ट्रेंड कर रहा है। इन पर की जा रही किसी भी पोस्ट पर 'जय श्री राम' कमेंट्स की बाढ़ आ जा रही है।

फेसबुक में अयोध्या राम मंदिर लिख कर पोस्ट सर्च करने पर 'प्रेरणा झा क्वीन' नाम के अकांउट से 25 दिसम्बर 2023 को अपलोड की गई एक वीडियो दिखती है, लगभग 2300 बार देखी गई इस वीडियो में अयोध्या स्थित राम मंदिर की झलक दिखाई गई है। बैकग्राउंड में चल रहे भजन से पता चलता है कि राम मंदिर आने वाले वक्त में भारतीयों के लिए क्या होने वाला है, भजन के बोल कुछ इस तरह हैं।

सज धज के, सज धज के,

हे सज धज के लगे सबसे न्यारे राम,

बोलो जय जय श्री राम।

                           स्क्रीनशॉट - फेसबुक

मंदिर के प्रति लोगों की आस्था का अनुमान हम फेसबुक पर ही बने 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' नाम के इस पेज की लोकप्रियता से लगा सकते हैं।

पेज को लगभग 81000 लोगों द्वारा लाइक किया गया है। इसमें साल के पहले दिन रामभक्तों के मंदिर आने पर एक पोस्ट की गई, जो इस तरह थी-

आज दिनांक 1 जनवरी 2024 पर सहस्त्रों की संख्या में रामभक्तों ने अयोध्या स्थित श्री रामजन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के दर्शन किए।

                            फोटो- फेसबुक

पोस्ट लगभग छह हजार लोगों द्वारा पसंद की गई, जिससे यह पता चलता है कि लोगों में राम मंदिर को लेकर बहुत अधिक आकर्षण बना हुआ है। पोस्ट में की गई 354 टिप्पणियां 'जय श्री राम' से भरी हुई थी।

इंस्टाग्राम पर राम मंदिर

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर भी राम मंदिर की धूम मची हुई है। इंस्टाग्राम पर हैशटैग राम मंदिर से अब तक लगभग 81000 पोस्ट करी जा चुकी हैं।

                             स्क्रीनशॉट - इंस्टाग्राम

हैश टैग अयोध्या भी इंस्टाग्राम पर खासा लोकप्रिय हो रहा है। इसका इस्तेमाल अब तक एक लाख बार से ऊपर किया जा चुका है।


'संतो के संग' नाम से बने इस पेज पर श्री राम मंदिर नाम से डाली गई इस तस्वीर पर पन्द्रह हजार से ज्यादा लाइक किए गए हैं।

इस फोटो पर की गई टिप्पणियों को देखा जाए तो वहां भी राम नाम ही दिखता है।

ट्विटर से एक्स हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अयोध्या अयोध्या।

एक्स पर अयोध्या से जुड़े सभी ट्वीट बहुत तेजी के साथ पसंद किए जा रहे हैं। भाजपा की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट की है, इस वीडियो में बच्चे अयोध्या धाम स्थित भव्य राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व मनमोहक प्रस्तुति देते हुए दिखाई दे रहे हैं, इस वीडियो को पोस्ट करने के आधे घण्टे बाद ही दस हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

                               स्क्रीनशॉट - एक्स

देश भर में इस समय भगवान राम से जुड़े भजन खूब सुने जा रहे हैं, तो इन्हें गाने वालों को भी पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 'एक्स' अकाउंट पर सूर्य गायत्री का यह वीडियो साझा किया तो वह रातों रात सभी न्यूज़ चैनलों की खबर बन गई। लोग सूर्य गायत्री के बारे में जानने के लिए गूगल का सहारा लेने लगे। 11 जनवरी को साझा किए गए इस वीडियो की लोकप्रियता इतनी रही कि इसे कुछ ही दिनों में हजारों बार देख लिया गया है और  हजारों बार लाइक भी किया गया है।

                        स्क्रीनशॉट- एक्स

यूट्यूब में भी राम नाम की धूम।

वीडियो साझा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर भी अयोध्या से जुड़े वीडियो खूब देखे जा रहे हैं।

                      स्क्रीनशॉट- यूट्यूब

'नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो और चरन हो राघव के, जहा मेरा ठिकाना हो', पंक्ति वाले इस भजन को यूट्यूब पर 12 जनवरी, 2024 को ही डाले गए, इस वीडियो को चौबीस घण्टे के अंदर ही एक लाख से ऊपर बार देख लिया गया था और हजार से ज्यादा बार लाइक किया गया।

इसमें की गई टिप्पणियां भी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर राम मंदिर, अयोध्या से जुड़ी पोस्टों पर की गई टिप्पणी 'जय श्री राम' जैसी ही थी।

                      स्क्रीन शॉट - यूट्यूब

यूट्यूब पर समाचार चैनलों के अकाउंट भी लगातार देखे जा रहे हैं, लोग राम मंदिर से जुड़ी खबरों को देखने के लिए टीवी के साथ फोन से भी चिपके हुए हैं। एक न्यूज़ चैनल में राम मंदिर से जुड़ी इस खबर को हजार से ऊपर लोग लाइव देख रहे हैं और लाइव चैट में हम देख सकते हैं कि कैसे लोग 'जय श्री राम' लिख भगवान राम को याद कर रहे हैं।

हिमांशु जोशी।



Saturday, January 6, 2024

आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?

*आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?* गर्मियों के मौसम में स्कूलों की छुट्टियों के साथ ही उत्तराखंड में चार...