श्रेया "अरे ये तो मेरी फ़ोटो है ना माँ?"
मां अपनी बेटी श्रेया से "हाँ बेटा जब तुझे पहली बार हॉस्पिटल से घर लाए थे, उसी दिन की फोटो है ये|"
"पर मम्मी इन सारी फोटो में कहीं दादीजी नजर नहीं आ रही" श्रेया अचंभित होकर अपनी मां से पूछती है |
माँ एक लंबी चुप्पी साधे हुए, बेटी दोबारा, "माँ बताओ ना दादी कहाँ थीं जब मेरा जन्म हुआ??????? और...... आप इतनी परेशान क्यों लग रही हो इन फोटोज़ में? प्लीज बताओ ना माँ?"
(माँ इमोशनल होते हुए) "बेटा, तेरी दादी ये नहीं चाहती थी कि मुझे लड़की हो, उन्होंने पूरे नौ महीने तक घर में लड़की का ज़िक्र तक करने के लिए मना किया था | यहां तक कि........ मुझे लड़का पैदा हो, इसके लिए कई उपाय भी करवाये थे पर जब...... उन्हें पता चला कि लड़की पैदा हुई है, वह तभी हॉस्पिटल से चली गयीं। तेरी शक्ल भी नहीं देखी उन्होंने, मुझे भी काफी बातें सुनाईं 5-6 दिन तक अपने भाई के घर पर रहीं, फिर जैसे-तैसे तेरे पापा समझा-बुझा कर उनको तेरी छठी वाले दिन घर वापस लाए और यहां वापस आकर भी उनका मुंह ही बना हुआ था |
(बेटी मां से गले लगाते हुए ) मां "चल, कोई नहीं बेटा लड़कियों की तो शुरू से समाज में यही हालत रही है यह तो सबको पता है | यह तो इस समाज के शुरू होने से ही होता आया है।
"पर मां हमारे ये हालात कब तक रहेंगे?" श्रेया ने मां से पूछा।
मां "बेटा, हम ऐसे नहीं थे तुम्हारे पापा का तो अपना बिजनेस था टूर एंड ट्रेवल्स का। पर उनकी मौत के बाद सब उनके पार्टनर्स और उनके भाई ने हड़प लिया और जब उनसे कोई हिसाब-किताब मांगा तो उल्टा हमारी तरफ ही कर्ज़ा निकाल दिया |
"मम्मी, आज पापा की 20वीं बरसी है ना, आप उदास मत हो पापा हमारे साथ हमेशा हैं और मैं भी तो हूं ना आपके साथ हमेशा |"
श्रेया अपनी मां को समझाते हुए
सीन 2
टीचर, "चलो स्टूडेंट आज मैथ्स पढ़ेंगे |" "ओके सर" सभी विद्यार्थी जवाब देते हुए परंतु श्रेया की तरफ से कोई जवाब नहीं |
"श्रेया कुछ तो बोल, सर तुझे देख रहे हैं |" श्रेया की दोस्त पलक उसके कंधे पर मारते हुए |
"हां, नहीं, हां, हां जी कहते हुए अचानक श्रेय अपनी गहरी सोच से बाहर आई |
सीन 3
(दोनों सहेलियां क्लास के बाद घर जाते हुए)
"क्या बात है श्रेया आज तुम उदास क्यों हो ?" पलक ने पूछा|
"नहीं तो, कुछ नहीं यार" श्रेया ने जवाब दिया |
"बताओ ना श्रेया तुम ऐसी नहीं हो प्लीज मुझे बताओ क्या हुआ है ?" पलक श्रेया के साथ चाय की दुकान की तरफ बढ़ते हुए दोबारा पूछते।
"बस कुछ नहीं यार आज पापा की 20वीं बरसी है, उनकी बहुत याद आ रही है मम्मी भी उदास है आज का दिन हमारे लिए बेहद खराब दिन होता है |" श्रेया ने उदास भाव से कहा।
(चाय की दुकान के अंदर पहुंच कर दोनों सहेली आमने सामने बैठ जाती हैं)
पलक राम चाचा आज ऐसी कड़क चाय दो कि मेरी दोस्त भी कड़क बन जाए।
पलक "देख श्रेया, मैं तेरी परेशानी समझती हूं और जो तुझ पर और आंटी पर बीत रही है, मैं वो भी समझती हूं पर मैं तेरी दोस्त हूं और दोस्त होने के नाते तुझे इतना समझाती हूं कि तू एग्जाम की तैयारी कर | तेरी मेहनत जरुर रंग लाएगी तू जल्दी ही बड़ी पुलिस अफसर बनेगी, भरोसा रख और मेहनत कर |"
"देख फिर तेरे पापा का भी सपना पूरा हो जाएगा सब जल्दी ठीक हो जाएगा |"
(दोनों दोस्तों के पास चाय आ जाती है)
सीन 4
(कुछ महीनों बाद श्रेया अपने फाइनल इंटरव्यू की तैयारी कर रही है, मां की तबीयत खराब रहती है)
"मां,, मां,, कुछ नहीं होगा आपको" श्रेया अपनी मां को संभालते हुए बाथरूम से लाती है,जहां उसकी माँ उल्टी कर रही थीं |
"देख बेटा मैं भी सच्चाई जानती हूं और तू भी, ज्यादा दिन नहीं है मेरे पास आखिर यह कैंसर है ही ऐसी बीमारी, ये जिसे लग जाए ना वह इंसान नहीं बच पाता पर तू मुझे माफ करना बेटा अगले महीने तेरा फाइनल इंटरव्यू है और मैं............"
ऐसा कहते हुए मां पलंग के सहारे नीचे फर्श पर ही बैठ जाती है और रोने लगती है | श्रेया भी अपनी मां के साथ वहीं बैठ जाती है और दोनों मां बेटी एक दूसरे से गले लगा कर बिलख-बिलख कर रोने लगती हैं |
सीन 5
(अगली सुबह)
"मां... मां.…... कुछ तो बोलो माँ,,, उठो माँ, जोर जोर से चिल्लाते हुए श्रेया ने सभी पड़ोस वालों के इकट्ठा कर दिया।
अंकल देखो ना मम्मी बोल क्यों नहीं रही श्रेया रोते हुए पड़ोसी से बोलती है।
सभी पड़ोसी इकट्ठा हो जाते है, उसे समझाते हैं। कोई गले लगाता है ,कोई सर पर हाथ फेर रहा है ,कोई उसके बेसुध होने पर उसके हाथ पैर पकड़ने की कोशिश कर रहा है।
बेटा हम हैं ना तेरी मां क्यों फ़िक्र करती है पड़ोस की एक आंटी श्रेया को समझाते हुए कहती है।
"हम हैं ना श्रेया हम सब एक परिवार जैसे ही तो हैं। हम सब हमेशा तेरे साथ हैं तो खुद को संभाल बच्चे | (कई सारी औरतों में से एक कहती है)
सीन 4
(कुछ महीनों बाद श्रेया अपने फाइनल इंटरव्यू की तैयारी कर रही है, मां की तबीयत खराब रहती है)
"मां,, मां,, कुछ नहीं होगा आपको" श्रेया अपनी मां को संभालते हुए बाथरूम से लाती है,जहां उसकी माँ उल्टी कर रही थीं |
"देख बेटा मैं भी सच्चाई जानती हूं और तू भी, ज्यादा दिन नहीं है मेरे पास आखिर यह कैंसर है ही ऐसी बीमारी, ये जिसे लग जाए ना वह इंसान नहीं बच पाता पर तू मुझे माफ करना बेटा अगले महीने तेरा फाइनल इंटरव्यू है और मैं............"
ऐसा कहते हुए मां पलंग के सहारे नीचे फर्श पर ही बैठ जाती है और रोने लगती है | श्रेया भी अपनी मां के साथ वहीं बैठ जाती है और दोनों मां बेटी एक दूसरे से गले लगा कर बिलख-बिलख कर रोने लगती हैं |
सीन 5
(अगली सुबह)
"मां... मां.…... कुछ तो बोलो माँ,,, उठो माँ, जोर जोर से चिल्लाते हुए श्रेया ने सभी पड़ोस वालों के इकट्ठा कर दिया।
अंकल देखो ना मम्मी बोल क्यों नहीं रही श्रेया रोते हुए पड़ोसी से बोलती है।
सभी पड़ोसी इकट्ठा हो जाते है, उसे समझाते हैं। कोई गले लगाता है ,कोई सर पर हाथ फेर रहा है ,कोई उसके बेसुध होने पर उसके हाथ पैर पकड़ने की कोशिश कर रहा है।
बेटा हम हैं ना तेरी मां क्यों फ़िक्र करती है पड़ोस की एक आंटी श्रेया को समझाते हुए कहती है।
"हम हैं ना श्रेया हम सब एक परिवार जैसे ही तो हैं। हम सब हमेशा तेरे साथ हैं तो खुद को संभाल बच्चे | (कई सारी औरतों में से एक कहती है)
मां अब हम सबके बीच में नहीं रही पर हम हमेशा तेरे साथ तेरे आसपास ही रहेंगे तू अकेली नहीं है तो खुद को अकेला मत समझ |" (एक और पड़ोसी महिला)
पड़ोसी महिलाओं में कोई उसे पुचकार रहा होता है, कोई उसके आंसू पोंछता है, उसके बालों को सहलाता है तो कोई उसको गले लगाता है।
पड़ोसी महिलाओं में कोई उसे पुचकार रहा होता है, कोई उसके आंसू पोंछता है, उसके बालों को सहलाता है तो कोई उसको गले लगाता है।
पर माँ तो आखिर मां ही होती है और श्रेया के पास तो सिर्फ एक माँ ही थी | अब कौन उसका हौसला बनेगा? अब वह फाइनल एग्जाम कैसे देगी? क्या श्रेया का पुलिस अफसर बनने का सपना कभी पूरा होगा?
ऐसे ना जाने कितने सवाल श्रेया की मां जाते-जाते छोड़ गई थी।
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