Sunday, July 31, 2022
जवाब खाकी हो जाने का।
Sunday, July 24, 2022
कहानी और संवाद से दिल छूती 'सास बहू अचार प्राइवेट लिमिटेड'
उफ्फ ये बारिश
सूराराई पोत्रु को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार लेकिन एक सवाल भी है..
Wednesday, July 20, 2022
जादूगर.. क्या खेला रे शाबाश!!
Saturday, July 16, 2022
विराट पर्वम ''बंदूक की नोक पर शांति नही है''
Wednesday, July 13, 2022
8 जुलाई को अमरनाथ में बादल फटने की वजह से 16 लोगों की मौत हो गई और लगभग 40 लोग लापता हैं। आपदा के बाद 11 जुलाई से अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू तो हो चुकी है लेकिन जो लोग इस आपदा में मारे गए वो अब कभी अपने घर वापस नही लौटेंगे और उनके रिश्तेदारों का इंतजार हमेशा लंबा ही होता रहेगा।
ये बात सही है कि अमरनाथ हो या चारधाम कोई भी तीर्थ यात्रा लंबे समय तक रोकी नही जा सकती, लेकिन यात्रियों की संख्या में नियंत्रण लगाने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन को बेहतर बना कर जानमाल की हानि कम की जा सकती है।
एक नज़र अमरनाथ में आई आपदाओं के इतिहास पर।
वी सी स्कॉट ओ कॉनर वर्ष ने साल 1920 में लिखी किताब 'द चार्म ऑफ कश्मीर' में अपनी अमरनाथ यात्रा के बारे में लिखते हुए जून के आसपास अमरनाथ यात्रा को बड़ा मुश्किल करार दिया है। यह किताब http://pahar.in/ पर उपलब्ध है।
अमरनाथ यात्रा के दौरान अब तक का सबसे पहला बड़ा हादसा साल 1969 में हुआ था, तब जुलाई महीने में बादल फटने से करीब 100 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
21 अगस्त 1996 के दिन अमरनाथ यात्रा के दौरान मौसम बदलने की वजह से 243 लोगों के मारे गए थे। भविष्य में ऐसी ही घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की तरफ से नीतीश के सेनगुप्ता कमीशन गठित किया गया था।
पिछले साल 28 जुलाई को भी इस बार की तरह गुफा के पास बादल फटा था लेकिन कोरोना वायरस के कारण यात्रा बंद होने की वजह से तब जान माल की हानि नही हुई थी।
नीतीश.के.सेनगुप्ता रिपोर्ट की सिफारिशें नज़रंदाज़ की गई
15 जुलाई 2004 को गृह मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में कहा गया था कि नीतीश.के.सेनगुप्ता रिपोर्ट के अनुसार अमरनाथ यात्रा में प्रतिदिन 3500 यात्रियों को ही भेजा जाना चाहिए, जिसमें पहलगाम रूट से 2800 और बालटाल से 700 यात्रियों को ही यात्रा की अनुमति दी जाए।
इस साल चल रही अमरनाथ यात्रा में आपदा प्रबंधन की तैयारियों में लापरवाही साफ देखी जा सकती है। खराब मौसम की जानकारी होते हुए भी पवित्र अमरनाथ गुफा यात्रा दर्शन के दौरान नीतीश.के.सेनगुप्ता की रिपोर्ट पर कोई ध्यान नही दिया गया।
यात्रियों की सीमित संख्या रखने और यात्रा के रास्ते में बसासत को कम करने के गम्भीर प्रयास भी नही किए गए।
अमरनाथ गुफा के दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या पर नजर डालें तो 'श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड' की वेबसाइट में इस साल अमरनाथ आने वाले यात्रियों की संख्या नहीं दिख रही है लेकिन दैनिक जागरण की खबर के अनुसार अमरनाथ यात्रा के पहले सात दिन में ही एक लाख लोगों ने पवित्र गुफा के दर्शन कर लिए थे।
साल 2019 में लगभग 3,42,000 लोगों ने अमरनाथ यात्रा पूरी की थी, 20 जुलाई 2019 को एक दिन में सबसे अधिक 20,915 यात्री पवित्र गुफा गए थे।
लंगरों को बारातघर बना दिया गया
केदारनाथ आपदा में मुख्य मंदिर के आसपास हुई बेतरतीब बसासत की वजह से मरने वाले लोगों की संख्या अधिक थी और ऐसा ही कुछ अमरनाथ में भी हुआ है। अमरनाथ यात्रा में लाखों लोगों की आमद की वजह से यात्रा के रास्तों में टेंट और दुकानों की भरमार रहती है।
2017 में 'अमरनाथ यात्रा: एक सैनिक तीर्थ यात्रा' नाम से आई रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 में अमरनाथ यात्रा में पड़ने वाले टेंट और दुकानों की संख्या 6130 थी।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है अमरनाथ यात्रा के रास्ते में जो लंगर भूखे और थके यात्रियों को आराम देने के लिए बनाए गए थे, अब वह किसी शादी की पार्टी सा एहसास देते हैं। उदाहरण के लिए पौषपत्री में भंडारे के दौरान 100 से अधिक व्यंजन खिलाए जाते हैं। इन लंगरों में भीड़ बहुत अधिक रहती है और इस आपदा में भी आपदा क्षेत्र के लंगर में बहुत अधिक लोगों के जमा होने की खबर सामने आई है।
तकनीक का इस्तेमाल क्यों नही!
उत्तराखंड में 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद डॉप्लर रडार लगाने की बात शुरू हुई और मुक्तेश्वर में रडार शुरू भी हो चुका है।
डॉप्लर रडार बादलों में मौजूद पानी के कणों का आकंलन कर सटीक डाटा देता है, जिससे पूर्वानुमान लगाया जाता है कि कितने मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। डॉप्लर रडार लगभग सौ किलोमीटर क्षेत्र में होने वाले मौसम के बदलाव की जानकारी दे सकता है। इस उपकरण के माध्यम से तेज पानी बरसने के आधे घंटे पहले ही सटीक डाटा मिल सकता है।
अमरनाथ यात्रा के दौरान भी पवित्र गुफा के आसपास हर साल डॉप्लर रडार लगाने की बात होती है पर आपदा के दौरान यह किसी काम नही आया और न ही मौसम विभाग तेज वर्षा की सटीक जानकारी देने में कामयाब रहा।
हिमांशु जोशी।
Tuesday, July 12, 2022
बारिश का प्यार
Monday, July 11, 2022
वो बेहतर आपदा प्रबंधन से घर लौट सकते थे.
इस 8 जुलाई को अमरनाथ में बादल फटने की वजह से 16 लोगों की मौत हो गई और लगभग 40 लोग लापता हुए. 11 जुलाई से अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू तो हो चुकी है लेकिन जो लोग इस आपदा में मारे गए वह अब कभी अपने घर वापस नही लौटेंगे और उनके रिश्तेदारों का इंतजार हमेशा लंबा ही होता रहेगा.
https://twitter.com/ANI/status/1545401194520379392?t=FJnj2FlZsv7__wRhVER9ig&s=19
यह बात सही है कि अमरनाथ हो या चारधाम कोई भी तीर्थ यात्रा रोकी नही जा सकती , लेकिन यात्रियों की संख्या में नियंत्रण लगाने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन को बेहतर बना कर जानमाल की हानि कम की जा सकती है.
अमरनाथ में आपदाओं का इतिहास पुराना है
वी सी स्कॉट ओ कॉनर वर्ष ने साल 1920 में लिखी किताब 'द चार्म ऑफ कश्मीर' में अपनी अमरनाथ यात्रा के बारे में लिखते हुए जून के आसपास अमरनाथ यात्रा को बड़ा मुश्किल करार दिया है.
अमरनाथ यात्रा के दौरान सबसे पहला बड़ा हादसा साल 1969 में हुआ था, तब जुलाई महीने में बादल फटने से करीब 100 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी.
21 अगस्त 1996 के दिन अमरनाथ यात्रा के दौरान मौसम बदलने की वजह से 243 लोगों के मारे गए थे. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की तरफ से नीतीश के सेनगुप्ता कमीशन गठित किया गया था.
पिछले साल 28 जुलाई को भी इस बार की तरह गुफा के पास बादल फटा था लेकिन कोरोनावायरस बंद होने की वजह से तब जान माल की हानि नही हुई थी.
https://twitter.com/AmitShah/status/1420375043448573956?t=A2zYTtK35N3SrKQfjRBXcg&s=08
नीतीश के सेनगुप्ता रिपोर्ट का लिखा शायद अब दिखता नही
15 जुलाई 2004 को गृह मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में कहा गया था कि नीतीश.के.सेनगुप्ता रिपोर्ट के अनुसार अमरनाथ यात्रा में प्रतिदिन 3500 यात्रियों को ही भेजा जाना चाहिए, जिसमें पहलगाम रूट से 2800 और बालटाल से 700 को ही यात्रा की अनुमति दी जाए.
इस साल चल रही अमरनाथ यात्रा में आपदा प्रबंधन की तैयारियों में लापरवाही साफ देखी जा सकती है. खराब मौसम की जानकारी होते हुए भी पवित्र अमरनाथ गुफा यात्रा दर्शन के दौरान नीतीश.के.सेनगुप्ता की रिपोर्ट पर कोई ध्यान नही दिया गया. यात्रियों की सीमित संख्या रखने और यात्रा के रास्ते में बसासत को कम करने के गम्भीर प्रयास भी नही किए गए.
अमरनाथ गुफा के दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या पर नजर डालें तो 'श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड' की वेबसाइट में इस साल अमरनाथ आने वाले यात्रियों की संख्या नहीं दिख रही है लेकिन दैनिक जागरण की खबर के अनुसार अमरनाथ यात्रा के पहले सात दिन में ही एक लाख लोगों ने पवित्र गुफा के दर्शन कर लिए थे
साल 2019 में लगभग 3,42,000 लोगों ने अमरनाथ यात्रा पूरी की थी, 20 जुलाई 2019 को एक दिन में सबसे अधिक 20,915 यात्री पवित्र गुफा गए थे.
लंगर जब बारातघर बन जाएंगे तो भीड़ क्यों न हो
केदारनाथ आपदा में मुख्य मंदिर के आसपास हुई बेतरतीब बसासत की वजह से मरने वाले लोगों की संख्या अधिक थी और ऐसा ही कुछ अमरनाथ में भी हुआ है. अमरनाथ यात्रा में लाखों लोगों की आमद की वजह से यात्रा के रास्तों में टेंट और दुकानों की भरमार रहती है.
2017 में 'अमरनाथ यात्रा: एक सैनिक तीर्थ यात्रा' नाम से आई रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 में अमरनाथ यात्रा में पड़ने वाले टेंट और दुकानों की संख्या 6130 थी.
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है अमरनाथ यात्रा के रास्ते में जो लंगर भूखे और थके यात्रियों को आराम देने के लिए बनाए गए थे, अब वह किसी शादी की पार्टी सा एहसास देते हैं. उदाहरण के लिए पौषपत्री में भंडारे के दौरान 100 से अधिक व्यंजन खिलाए जाते हैं. इन लंगरों में भीड़ बहुत अधिक रहती है और इस आपदा में भी आपदा क्षेत्र के लंगर में बहुत अधिक लोगों के जमा होने की खबर सामने आई है.
तकनीक हैं पर इस्तेमाल नही हुआ
उत्तराखंड में 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद डॉप्लर रडार लगाने की बात शुरू हुई और मुक्तेश्वर में रडार शुरू भी हो चुका है.
https://twitter.com/ANI/status/1432382783058366464?t=31FCT-cZsRlIR92jEmcevw&s=19
डॉप्लर रडार बादलों में मौजूद पानी के कणों का आकंलन कर सटीक डाटा देता है, जिससे पूर्वानुमान लगाया जाता है कि कितने मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है. डॉप्लर रडार लगभग सौ किलोमीटर क्षेत्र में होने वाले मौसम के बदलाव की जानकारी दे सकता है. इस उपकरण के माध्यम से तेज पानी बरसने के आधे घंटे पहले ही सटीक डाटा मिल सकता है.
https://twitter.com/KNO_NEWS/status/1144611621748105216?t=h7186jjXVVtfZAL7dlWSQw&s=19
अमरनाथ यात्रा के दौरान भी पवित्र गुफा के आसपास हर साल डॉप्लर रडार लगाने की बात होती है पर आपदा के दौरान यह किसी काम नही आया और न ही मौसम विभाग तेज वर्षा की सटीक जानकारी देने में कामयाब रहा.
https://twitter.com/KNO_NEWS/status/1144611621748105216?t=h7186jjXVVtfZAL7dlWSQw&s=19
हिमांशु जोशी
@himanshu28may
Wednesday, July 6, 2022
हैप्पी बर्थडे धोनी : थाला का सफर अब भी जारी है.
जन्मदिन मुबारक हो कप्तान। आपके अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की कामना करता हूँ | @msdhoni #HappyBirthdayMSDhoni
https://twitter.com/pragyanojha/status/1544879467327135744
प्रज्ञान ओझा ने आज महेंद्र सिंह धोनी के लिए उनके 41वें जन्मदिन पर ये ट्वीट किया है.
यही हैं धोनी जो अपने समकालीन क्रिकेटरों के लिए हमेशा कप्तान थे और रहेंगे. धोनी सिर्फ भारत ही नही दुनिया भर में क्रिकेट समझने और जानने वाले लोगों के बीच सम्मान पाते हैं.
जब अंग्रेजों की जमीन पर भारतीयता की जीत हुई
साल 2011 की बात है भारत इंग्लैंड दौरे के दौरान लॉर्ड्स में खेला गया पहला मैच 196 रनों से हार गया था. नॉटिंघम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी में भारत पर 184 रनों की लीड चढ़ा ली थी.
इशांत शर्मा की गेंद पर इयान मॉर्गन ने लेग साइड पर शॉट खेला और 131 रन पर खेल रहे इयान बेल रन दौड़ने लगे, बाउंड्री पर प्रवीण कुमार ने गेंद रोकी पर खुद उन्हें भी नही पता था कि गेंद बाउंड्री से टकराई या नही. बेल गेंद को बाउंड्री पर सोचकर क्रीज छूने नही गए और अभिनव मुकुंद ने हल्के से गिल्लियां बिखेर दी थी. थर्ड अंपायर ने इयान बेल को आउट करार दिया और चायकाल का समय भी हो गया, निराश बेल पैवेलियन वापस लौट गए. चाय के बाद जब भारतीय टीम मैदान पर उतरी तो इंग्लैंड के दर्शक भारतीय टीम की हूटिंग 'बू बू' से करने लगे, लेकिन जैसे ही इयान बेल ग्राउंड पर उतरे तो ग्राउंड पर भारतीय टीम की हो रही ये हूटिंग तालियों में तब्दील हो गई. धोनी ने इयान बेल के खिलाफ की अपील वापस लेकर, उन्हें फिर से खेलने का मौका दे दिया था. भारत ये टेस्ट 319 रनों से हार गया था पर अंग्रेजों की जमीन पर ये भारतीयता की जीत थी.
बाद में इयान बेल ने इस घटना पर खुद की गलती भी मानी थी और इसी घटना के लिए धोनी को साल 2020 में आइसीसी की तरफ से इस दशक का स्पिरिट ऑफ क्रिकेट अवॉर्ड दिया गया.
https://twitter.com/ICC/status/1343509742623178753
कप्तान धोनी
महेन्द्र सिंह धोनी एक अच्छे विकेटकीपर, बल्लेबाज ही नही एक सफलतम कप्तान भी हैं. इस खिलाड़ी के कई रूप हैं, कई पारियां हैं जो क्रिकेटप्रेमियों की कभी न भूलने वाली यादें बन चुकी हैं. जसप्रीत बुमराह, युजवेंद्र चहल, दीपक चाहर और न जाने कितने क्रिकेटर जिनका क्रिकेट धोनी ने उनके शुरुआती दिनों में सजाया और संवारा है.
भारतीयों की रगों में क्रिकेट दौड़ता है. यहां शतकों का सैकड़ा बनाने वाले सचिन को 'भगवान' का दर्जा मिला तो नायाब महेंद्र सिंह धोनी के रूप में एक 'थाला' भी मिला.
https://twitter.com/CSKFansOfficial/status/1544883391341797376
क्रिकेट पर जान छिड़कते इस देश के लोगों के बीच से जब 1983 के वर्ल्ड कप की यादें धुंधली पड़ने लगी थी. तब धोनी ने करोड़ों भारतीय क्रिकेटप्रेमियों का वो सपना पूरा किया, जिसकी आस में वो सालों से न जाने कितनी कॉपियों में भारत की टीम लिखते और मिटाते आए थे.
धोनी युग की शुरुआत
साल 2003 में हम ऑस्ट्रेलिया से वर्ल्ड कप के फाइनल में हारे और इस हार कई क्रिकेट प्रेमियों के दिलों को गहरा जख्म दे गई थी.
इन्हीं जख्मों पर मरहम लगाने की खोज में साल 2004 के अंत में धोनी को भारतीय क्रिकेट टीम में लाया गया और 2007 में वेस्टइंडीज के निराशाजनक एकदिवसीय वर्ल्डकप के बाद उन्हें भारतीय टीम का कप्तान बना दिया गया. ये वो कप्तान था जो भारतीय क्रिकेट का भविष्य बदलने आया था, धोनी ने साल 2007 में पहली बार खेले जा रहे टी-20 विश्व कप का खिताब भारत को दिलवाया. ये जीत इसलिए खास थी क्योंकि फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराया था.
साल 2009 में भारतीय क्रिकेट टीम उनकी कप्तानी में टेस्ट की नम्बर वन टीम बन चुकी थी.
सचिन के लिए जब हमारा दिल डूबा जा रहा था कि कहीं साल 2011 के वर्ल्ड कप में भी उन्हें विश्व कप नसीब न हो तब वो धोनी ही थे, जो तेजी से कदम उचकाते ग्राउंड में जाते ही अपनी रणनीति से विपक्षियों को पस्त कर सचिन को वर्ल्ड कप चूमने का मौका दे गए.
पूरी सीरीज में युवराज का बेहतरीन खेल हो या श्रीलंका के खिलाफ मुंबई में खेले गए फाइनल मैच के अंत में धोनी द्वारा जड़ा गया विजयी छक्का, इस सीरीज की हर याद भारतीय क्रिकेट प्रेमियों ने हमेशा के लिए अपने दिल में बसा ली.
जून 2013 में इंग्लैंड को पांच रन से हरा धोनी ने भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का दूसरा खिताब दिलवाया. इसके साथ ही धोनी विश्व के अकेले ऐसे कप्तान बन गए, जिन्होंने आईसीसी की तीनों ट्रॉफियां जीती हों
मैदान के बाहर भी चौंकाते धोनी
ऐसा नहीं है कि धोनी ने मैदान में अपने किए कारनामों से ही लोगों को चौंकाया है, धोनी ने मैदान के बाहर लिए अपने फैसलों से भी क्रिकेट को फॉलो करने वाले लोगों को चौंकाया. साल 2014 में धोनी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच में ही टेस्ट क्रिकेट से सन्यास लेने का एलान कर दिया.
https://twitter.com/BCCI/status/549852435586752513
2015 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप के ठीक पहले धोनी एक खूबसूरत बच्ची के पिता बने, लेकिन भारत को वर्ल्ड कप जिताने के मिशन पर ध्यान देने के लिए धोनी उसे देखने तक नही आए.
अफसोस भारत इस विश्व कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गया और इसके बाद ही धोनी अपनी बेटी से मिले.
विवादों से भला कौन बचता है
कैप्टन कूल कहे जाने वाले धोनी का विवादों से भी नाता रहा. चेन्नई सुपरकिंग्स के बैन पर उनकी साधी गयी चुप्पी पर काफी सवाल खड़े हुए. इसके साथ ही वरिष्ठ खिलाड़ियों को टीम से बाहर निकालने को लेकर भी धोनी पर आरोप भी लगते रहे हैं.
तभी तो धोनी हैं बाहुबली, अंतरराष्ट्रीय के बाद अब आईपीएल में कमाल
जुलाई 2015 में चेन्नई सुपरकिंग्स पर अवैध सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के आरोपों को लेकर दो साल का बैन लगा दिया गया और धोनी आईपीएल में नई नवेली टीम पुणे सुपरजाइंट्स के साथ जुड़ गए. यहां धोनी कमाल नहीं दिखा सके और आलोचकों के निशाने पर आ गए.
पर धोनी तो धोनी हैं. दो साल के बैन के बाद साल 2018 में जब आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की वापसी हुई, तब धोनी ने उसे खिताब जिताने के साथ ही आलोचकों के मुंह पर ताले जड़ दिए.
इसके बाद साल 2019 के आईपीएल में धोनी की टीम फाइनल में मुंबई से सिर्फ एक रन से हारी थी.
इंग्लैंड में खेले गये साल 2019 के एकदिवसीय क्रिकेट विश्वकप में धोनी के प्रदर्शन पर बीच विश्वकप में ही आलोचक कहने लगे कि धोनी तो अब धीमा हो गया है. धोनी फिर से अपने आलोचकों को चुप ही करने वाले थे कि सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहद दबाव भरे मैच में अच्छा खेलने के बाद रन आउट हो गए, धोनी रनआउट क्या हुए उनके साथ जबरदस्त खेल रहे जडेजा के भी कंधे झुक गए और भारत का उस विश्वकप में सफर वहीं खत्म हो गया.
धोनी फिर क्रिकेट से दूर रहे और 2020 में स्वतंत्रता दिवस की शाम करोड़ों धोनी प्रेमियों का दिल तोड़ते उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए खुद को रिटायर घोषित कर दिया.
https://twitter.com/ICC/status/1294646852613177344
साल 2020 के आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स प्लेऑफ से बाहर होने वाली पहली टीम बनी लेकिन 2021 के आईपीएल में धोनी ने चेन्नई को उसका चौथा आईपीएल खिताब जिताया.
धोनी के साल 2022 आईपीएल में कप्तानी न करने के फैसले के बाद रविन्द्र जडेजा को कप्तानी दी गई थी, लेकिन रवींद्र जडेजा के बीच आईपीएल में कप्तानी पद छोड़ने के बाद धोनी को ये जिम्मेदारी फिर से दे दी गई.
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ हुए मैच से पहले पीले रंग से रंगी दर्शक दीर्घा के शोर के बीच धोनी ने आईपीएल में अपने भविष्य पर भी बड़ा बयान दे दिया था, उन्होंने 2023 में आईपीएल खेलने की संभावना से इंकार नही किया.
https://twitter.com/IPL/status/1520762355483049985
साल 2022 में धोनी कप्तान पद पर वापसी के बावजूद चेन्नई को प्लेऑफ तक नही पहुंचा पाए, हालांकि अगले आईपीएल के लिए वो अभी से तैयार हैं और अपने घुटने की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज रांची से करीब सत्तर किलोमीटर दूर लापुंग गांव में करवा रहे हैं. मीडिया में धोनी का ये इलाज भी चर्चा का विषय बना हुआ है. थाला का सफर अब भी जारी है और शायद हमेशा रहेगा.
हिमांशु जोशी
@himanshu28may
Monday, July 4, 2022
एक औरत को करीब से समझाती 'बांझ'
Sunday, July 3, 2022
प्लास्टिक की लत छोड़ना समुदाय का ही काम है.
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?
*आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?* गर्मियों के मौसम में स्कूलों की छुट्टियों के साथ ही उत्तराखंड में चार...
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