Sunday, July 24, 2022

उफ्फ ये बारिश

सबके लिए एक सी नही ये पहली बारिश

 बारिश, बारिश में निकलते इंद्रधनुष जैसे ही इंसान के जीवन में भी कई रंग होते हैं।
 जैसे मौसम होते हैं न उतार चढ़ाव भरे, कभी फूल खिलाता बसंत, कभी सड़ी गर्मी, कभी कड़कड़ाती सर्दी।
ऐसे ही इंसान के जीवन में भी हर समय एक सा नही रहता।

बारिश की बात ही कर लें में कोई इसमें घर बैठ कर चाय पकौड़ी खा रहा होता है,कोई सड़क पर अपनी प्रेमिका के साथ बाहों में बाहें डाल घूम रहा होता है तो कोई भारी बारिश की वजह से आई बाढ़ में उफ्फ ये बारिश कहता अपने घर का सामान बचाने की जद्दोजहद में लगा रहता है।

 बारिश का मौसम आते ही उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने कल की चिंता होने लग जाती है। उफ्फ ये बारिश करते लोग अपना जीवन सुरक्षित रखने की कोशिश में लगे रहते हैं, उन्हें पता नही होता कि पहाड़ के किस कोने में कब जलजला आ जाए और सब कुछ खत्म कर दे।

ये कहानी भी उत्तराखंड की ही है जहां एक परिवार के लिए बारिश अभिशाप बन गई।

उत्तराखंड के चम्पावत जिले में कैड़ागांव का रहने वाला दिनेश साल 2021 में हुई बारिश से बहुत खुश था क्योंकि दसवीं में पढ़ने वाले दिनेश को अब बाढ़ की वजह से स्कूल नही जाना पड़ेगा। ये तो वो बचपन से ही देखता आ रहा था, बाढ़ में घर के अंदर कैद रहना। उसके स्कूल जाने वाले रास्ते में आने वाली नदी बरसात के दिनों में उफान पर रहती थी और आम दिनों की तरह उसे पार नही किया जा सकता था।

दिनेश अपने भाई बिट्टू के साथ बारिश आने पर खूब मजे करता था ,गांव के सारे बच्चे बारिश में पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों में फिसलते हुए जाते। 

दिनेश, बिट्टू उसके पापा रमेश और मां सविता अपनी छोटी सी जिंदगी में बहुत खुश थे। रमेश उत्तराखंड रोडवेज में ड्राइवर थे।
मनहूस दिसम्बर मानों इस परिवार की खुशियों को निगलने के लिए तैयार था, एक रात रमेश को हार्टअटैक आया और वो चल बसे।
गांव के कुछ रिश्तेदार सविता को तीन चार दिन तक तो ढांढस बंधाते रहे लेकिन फिर कोई उनके घर झांकने तक नही आया।
 रोडवेज में मृतक आश्रित की भर्ती बंद थी और रोडवेज की सात सौ रुपए पेंशन।
सविता अपने छोटे छोटे बच्चों का भविष्य अंधकार में देख बहुत परेशान थी और इसी टेंशन में वो भी 2022 की बरसात से पहले एक दिन जहर खाकर इस दुनिया के पचड़ों से मुक्त हो गई।

दसवीं में पढ़ने वाले दिनेश को समय से पहले समझदार होना पड़ा। घर बनाने के लिए 15 लाख का बैंक लोन उसके सामने किसी दानव की तरह मुंह फैलाए खड़ा था।

दिनेश अपने सगे रिश्तेदारों के यहां मदद मांगने गया पर वो मदद दस हजार भी नही पहुंची।
बिजली का बिल, गैस का खर्चा, छोटे भाई बिट्टू जरूरत। अकेला मनोज क्या-क्या करता, वो तो अभी दुनिया को समझ ही रहा था वहीं सातवीं में पढ़ने वाला बिट्टू तो अभी दुनिया को समझा भी नही था।

बारिश आ गई, उफ्फ ये बारिश।
घर की नई नई छत टप टप कर टपकने लगी थी। दिनेश के जीवन की तरह उसमें भी कहीं दरार पड़ने लगी थी। एक दिन बिट्टू को उसके पड़ोस में रहने वाले शेरा दुकानदार ने बाहर रखा नमक चोरी करने पर बहुत मारा पर दिनेश ने घर में बिट्टू से कुछ नही कहा।

भारी बारिश की वजह से गांव के नीचे बहने वाली नदी उफान पर थी, लेकिन दिनेश निर्णय ले चुका था कि घर से निकल रोडवेज के अधिकारियों और प्रदेश के नेताओं से कुछ मदद मांगेगा। शायद उसे दो तीन साल बाद रोडवेज में बंद पड़ी मृतक आश्रित की नौकरी ही मिल जाए।

मौसम की पहली बारिश से ही उधड़ चुकी खतरनाक पहाड़ी सड़क में अपनी स्वर्गीय मां के बचाए कुछ पैसे लिए दिनेश 80 किलोमीटर दूर टनकपुर पहुंचा ,जहां रोडवेज के किसी भी अधिकारी ने उसकी मदद करने से हाथ खड़े कर दिए। वो मृतक आश्रित बन करने के सरकारी आदेश का हवाला देते। 
बारिश तेज़ थी दिनेश को अपने और अपने भाई के सुरक्षित भविष्य के लिए कुछ करना ही था, वो तो इतनी तेज बारिश को देख उफ्फ भी नही कह सकता था। दिनेश ने रोडवेज के देहरादून स्थित मुख्य कार्यालय जाने की ठानी और उसने यह भी सोचा कि शायद चुनाव में घर आने वाले मंत्रीजी उसका काम करवा दें।

 टनकपुर से 360 किलोमीटर दूर देहरादून में भी दिनेश किसी मंत्री या रोडवेज के अधिकारी से नही मिल पाया। इतने छोटे बच्चे को देख गेट का संतरी ही उसे लौटा रहा था।

दिनेश वापस फिर अपने गांव में था। वो इस बारिश से तंग आ चुका था और उफ्फ ये बारिश कहते उसे इस बारिश के रुकने का इंतजार था ताकि वो कहीं मजदूरी कर घर चला सके।

एक साल बाद फिर बारिश होने को थी, पहाड़ की ककड़ी, सेब, आड़ू बेच दिनेश ने साल भर घर चला लिया था, बिट्टू के लिए घर में खूब राशन भी जमा था।

बारिश से आज घर की छत फिर टपक रही थी, गेट पर लोन न जमा करने पर घर नीलाम करने का आदेश लिए बैंक अधिकारी खड़े थे। भारी बारिश से वो पूरे भीगे हुए थे, 'उफ्फ इतनी तेज बारिश है जल्दी उसे बुलाओ' उनमें से कोई बैंक अधिकारी ये कह रहा था।

बिट्टू बहुत देर से अपने भाई को बुलाने दरवाजे पर धप धप कर मार रहा था।

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