हिमांशु अरोड़ा बताते हैं रिस्पना के करीब बीस किमी लंबे बहाव क्षेत्र में मृत रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अगुवाई में साल 2018 में नदी के दोनों ओर वृक्षारोपण हुआ और करीब दो लाख वृक्ष लगाने का दावा भी किया गया, पर अब वहां एक भी पेड़ नही दिखता.

देश के अग्रणी पर्यावरणविद रवि चोपड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट, 'सिटीजन फॉर ग्रीन दून' संस्था और कुछ युवाओं सहित उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले कुछ लोग इन पेड़ों के काटे जाने का विरोध कर रहे हैं. फिर भी 'चिपको' की इस धरती में चल रहा यह विरोध इन पेड़ों को बचाने के लिए काफी नही दिखता.

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