Tuesday, July 12, 2022

बारिश का प्यार

उसे दिल्ली बहुत पसंद था, दिल्ली पसंद होता भी क्यों नही। यही शहर तो था जिसने उसके सपनों को पंख लगाए थे, उत्तर प्रदेश के सीतापुर से निकल इंदिरा  अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक का उसका सफर आसान न था। स्कूल में क्लर्क पिताजी की सीमित तनख्वाह से बीटेक फिर दिल्ली में नौकरी।
 बड़ा मकान, कार, एसी आज ऐसा कुछ नही था, जो अमित ने जोड़ न लिया हो। एक मध्यमवर्गीय परिवार की सारी इच्छाएं वो पूरी कर चुका था।

अमित को दिल्ली में अब कुछ वक्त हो चला था, 
रोज़ के अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन तक के सफर में वो दिल्ली के लोगों को देखता। उनकी तरह कपड़े लेता, उनकी तरह बैठने की कोशिश करता। दिल्ली की सभी खूबसूरत जगहों को वो मेट्रो से नाप चुका था, पर अब भी उसको अपनी जिंदगी में कहीं खालीपन सा लगता था।

अपने स्कूल के दिनों में अमित निशा को मन ही मन पसंद करता था लेकिन शहर के सबसे बड़े कपड़ा व्यापारी की बेटी निशा उसे कहां देखती स्कूल छोड़ते ही निशा पढ़ने के लिए दिल्ली के किसी नामी कॉलेज में आ गई थी 
अमित ने कुछ दिनों तक तो निशा की फेसबुक प्रोफाइल को तलाशा लेकिन फिर निराश होकर अब वह निशा को भूल चुका था

उस साल मई में बहुत गर्मी थी, अमित के कमरे की दीवार भट्टे की तरह तप रही थी। अमित पसीना पसीना हो रहा था, उसके साथी फ्लैट मेट रात होते ही बियर पी के मस्त हो जाते थे लेकिन अमित अकेला रह जाता।

जून आ गया था और मानसून की आमद भी होने वाली थी। एक शाम अमित अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से घूमने के लिए राजीव नगर मेट्रो स्टेशन पहुंचा और कनॉट प्लेस में टहलते हुए मिंटो रोड से अमित कब जीबी रोड तक पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला।

हल्की बूंदे गिरने लगी थी शाम का वक्त और बारिश अमित को मौसम कुछ ज्यादा ही सुहाना लग रहा था।

'भाई साहब यहां आपको सब कुछ मिलेगा' आवाज सुनते ही अमित के कान खड़े हो गए। उसने जीबी रोड के बारे में सुना तो बहुत था पर यहां उसके कदम पहली बार पहुंचे थे। 
दाहिनी तरफ दुकानों के शटर गिरने लगे थे और उसके ऊपरी मंजिल में हल्के उजाले वाली खिड़कियों से झांकती कुछ महिलाएं रास्ते में आने जाने वाले लोगों को बुला रही थी।

अमित के जीवन में उसके अपने नियम थे, वो ऐसी जगह नहीं जाना चाहता था। लेकिन उसे इस दूसरी दुनिया के लोगों के बारे में जानने की इच्छा थी । जिज्ञासावश वो अपनी दाहिनी तरफ दुकानों के आगे चलने लगा। बीच में अंधेरी सीढ़ियों की शुरुआत में कुछ अधेड़ महिलाएं उसे रिझा रही थी। 

तेज़ बारिश शुरू हो गई थी। अमित अब लौटना चाहता था, लगभग पचास साल की एक महिला ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहने लगी 'चल न'
तभी एक मधुर सी आवाज़ अमित के कानों में पड़ी, एक 24-25 साल की लड़की बोली ताई छोड़ो न, भला आदमी लगता है।
ताई बोली, ए कोई भला वला नही होता, सब मर्द एक से होते हैं, भला होता तो यहां क्यों आता।

अब वो लड़की सीढ़ी से ऊपर चले गई। अमित बारिश में  भीग गया था। उसके अंदर इस मौसम में उस लड़की के लिए कुछ प्यार भरे अहसास जगने लगे थे। अमित ने भी उन सीढ़ियों का रुख कर लिया।
ऊपर पहुंचा तो लाइट, उसमें चमकते कपड़े पहनी अलग अलग उम्र की महिलाएं उसे घूर रही थी। पर अमित की नजरें उसी मधुर आवाज वाली लड़की को ही खोज रही थी। ब्लू टीशर्ट, जीन्स , गोल चेहरा, खिलखिलाती हंसी अमित बस उसे देखता ही रह गया।
पर वो कुछ लोगों के साथ अंदर कमरे में चले गई और अमित उससे कोई बात नही कर पाया।

अब अमित रोज़ शाम वहां आने लगा, उसकी नज़रें उस ब्लू टीशर्ट वाली लड़की को ही खोजती।
लेकिन एक हफ्ते तक अमित को वो नही दिखी। अमित आज रविवार ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से सुबह ही जीबी रोड पर था। भारी बारिश के बीच उसकी नज़रें उसी सीढ़ी पर टिकी थी, तभी वहां लगी एक बस के पीछे उसे किसी ने खींच लिया।

ए बाबू मैं तुझे कब से देख रहूं हूं, तू मेरी बिल्डिंग के आगे मंडराता रहता है। पता है लोग इसे क्या कहते हैं, कोठा। और मैं।।
अमित ने उसका हाथ पकड़ लिया अपने से कुछ लम्बी और भीगे बालों वाली लड़की को वो बस एकटक देखते ही जा रहा था।
मैं अमित और मुझे तुम पसंद हो, इतनी सी उम्र में तुम यहां कैसे। अमित ने कई सवाल साथ पूछ लिए।

रीमा है मेरा नाम, आओ वहां चाचा की दुकान पर चाय पीते हैं, तुम भीग गए हो।

हां हां, अमित बोला।

देखो यहां तुम जैसे बहुत लड़के आते हैं, पर अपना काम करते हैं और चले जाते हैं, तुम तो मुझे बस देखने भर आते हो। मैं तुम्हें खिड़की से रोज़ देखती थी। तुम आते रहे, तब आज मिलने आ गई। मेरे पापा बचपन में ही मुझे असम से लाकर यहां छोड़ गए थे, घरवाले अपने नही तो अब कहां जाऊं। मुझे यहीं रहना पसंद है। शरीर को अब मर्दों की आदत पड़ गई है, कुछ और काम होगा नही। मुझे पसंद मत करो। हमारी जिंदगी बस इन्हीं कोठों तक है। आप जवान हो, पढ़े लिखे दिखते हो, अपना भविष्य देखो।
चाय खत्म होते ही रीमा ने चाचा को बीस रूपए दिए और चलते बनी।

अमित तेज़ बारिश में भी आराम से जाती रीमा को देखता रहा, उसी भीगने की चिंता नही थी।

अमित उस दिन रात भर रीमा के ख्यालों में ही डूबा रहा, उसे बारिश में भीगी वो लड़की लगातार याद आ रही थी।
अगले दिन वो फिर वहां पहुंच गया, रीमा उसे देख अपने साथ एक छोटे कमरे में लेकर गई। दरवाजा बंद करते ही बोली, देखो यहां हमें ऐसे किसी से नही मिलना होता। आप यहां मत आया करिए, अमित कहता है 'ठीक है नही आऊंगा, आप अपना मोबाइल नम्बर दे दो ।

अब उन दोनों के बीच रात भर लम्बी बातें होने लगी, रीमा को अमित के बारे में सब कुछ पता चल गया था। उसका घर, परिवार, नौकरी। 
अब वो राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास मिलने लगे थे। एक दिन अमित ने रीमा से पूछा तुम्हें मुझमें सबसे ज्यादा क्या पसंद है! रीमा ने कहा सब आते थे और मेरे जिस्म को छूते उससे खेलते थे, तुम पहले थे जिसने सिर्फ मेरे मन को छुआ, मेरे स्त्री मन को।

जुलाई में अमित ने रीमा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और  न चाहते हुए भी रीमा अमित से शादी के लिए हां कह गई।

हल्की बारिश के बीच अमित और रीमा ने एक मंदिर में शादी कर ली, अमित रोहिणी में फ्लैट किराए में ले चुका था। अमित ने अपने घरवालों को भी शादी के बारे में बता दिया था और कहा था कि रीमा यहां ब्यूटीपार्लर चलाती है, उसे जल्द घर लाऊंगा।

शादी के कुछ दिन बाद, अगस्त की शुरुआत में अमित रीमा को अपने दोस्तों से मिलाने लक्ष्मीनगर के v3s मॉल लेकर गया, वहां अमित के दोस्त रीमा को देख आपस में कुछ बाते करने लगे।

वापस आने के बाद रीमा और अमित अपने फ्लैट की बालकनी में बैठे थे, हल्की बारिश थी और हल्की हवा चल रही थी।
रीमा की गोद में सर रखकर लेटे हुए अमित ने कहा तुम ब्यूटीपार्लर का कोर्स कर लो, मैं ऑफिस रहता हूँ। तुम्हारा भी घर में मन लगे रहेगा। मथुरा जाओगी तो मम्मी को कुछ करके तो दिखाओगी।
रीमा हंसते हुए बोली, मुझे बस आपके लिए खाना बनाना है। जो इंसान मुझे नर्क से स्वर्ग में लाया है, उसका ध्यान रखना ही मेरी जिंदगी का लक्ष्य है।

तभी अमित के फोन में उसके दोस्त का एक मैसेज आया 'भाई हमारी भाभी से तो मैं कई बार मिल चुका हूं'

अमित दुखी था कि रीमा का अतीत उसके और रीमा के पीछे लगा है, पर उसने रीमा से कुछ नही कहा और निर्णय ले लिया कि अब वो सीतापुर ही रहेगा। दिल्ली हमेशा के लिए छोड़ देगा।

बरसात खत्म होने को थी अगस्त के अंत में तेज़ बारिश के बीच रीमा को ट्रेन में बैठा अमित पानी की बोतल लेने उतरा तो ट्रेन चलने लगी। भाग कर ट्रेन पकड़ने के चक्कर में अमित का पैर ट्रेन की सीढ़ी से फिसल गया और ट्रेन गुजरने के बाद अमित कई हिस्सों में ट्रेन की पटरियों में बिखरा हुआ था।

लगभग छह महीने बाद 14 फरवरी का दिन था, सीतापुर में हल्की बारिश थी।
एक ब्यूटी पॉर्लर के बाहर छोटा बच्चा अपने दादू के साथ खेल रहा था।
पापा अंदर आ जाओ, दोनों भीग जाओगे  और बीमार पड़ जाओगे। दरवाजे में दादू के पीछे अंदर आते बच्चे को रीमा गोद में उठाकर चूमते हुए, तौलिया से उसका सर पोछने लगी।

ब्यूटी पॉर्लर का नाम था, अमित ब्यूटी पॉर्लर।


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