Thursday, June 18, 2026

International Olympic Day: पौड़ी की धाकड़ तड़ियाल सिस्टर्स, जिन्होंने जूडो मैट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक बनाई पहचान

*International Olympic Day: पौड़ी की धाकड़ तड़ियाल सिस्टर्स, जिन्होंने जूडो मैट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक बनाई पहचान*

International Olympic Day हर साल 23 जून को मनाया जाता है. यह दिन 23 जून 1894 को International Olympic Committee (IOC) की स्थापना की याद में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को खेलों, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना है. आज हम उत्तराखंड के पौड़ी जिले से निकली तड़ियाल सिस्टर्स की कहानी को आपके सामने लाएंगे जो सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद  जूडो और मार्शल आर्ट्स में अपनी पहचान बना रही हैं.
 इन चार बहनों के पिता राजेंद्र सिंह तड़ियाल डिफेंस में रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं. मां लाजवंती तड़ियाल भी पौड़ी की ही हैं और एथलेटिक्स से जुड़ी रही हैं.

उस दौर में लड़कियों का जूडो और मार्शल आर्ट्स जैसे खेलों में जाना आम बात नहीं थी. लेकिन स्पोर्ट्स बैकग्राउंड वाले इस परिवार ने सामाजिक सोच से ज्यादा अपनी बेटियों के सपनों को महत्व दिया और खेल से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली में शिफ्ट हो गया. स्नेहा तड़ियाल के अनुसार दिल्ली जैसे शहर में पिता की सीमित कमाई के साथ खेल को चुनना आसान नहीं था. कई बार चारों बहनें केवल दो सौ रुपये लेकर घर से बाहर किसी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जाती थीं और वहां से पदक जीतकर लौटती थीं.

*सुचिका तड़ियाल ने सबसे पहले रास्ता बनाया*

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सुचिका तड़ियाल ने कम उम्र में ही जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू कर दी थी. बाद में वह आठ बार की राष्ट्रीय जूडो चैंपियन बनीं. उन्होंने कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप और साउथ एशियन गेम्स में भी भारत के लिए पदक जीते.

इसके बाद उन्होंने जू-जित्सु और फिर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की तरफ कदम बढ़ाया. ग्रीस में आयोजित JJIF जू-जित्सु वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता.

अब वह अंतरराष्ट्रीय MMA सर्किट में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. BRAVE Combat Federation जैसे मंचों पर उतरकर उन्होंने भारतीय महिला फाइटर्स की नई पहचान बनाई है.

उनकी खासियत ग्रैपलिंग और सबमिशन तकनीक मानी जाती है. यही वजह है कि उन्हें भारत की उभरती हुई महिला MMA फाइटर्स में गिना जाता है. दिल्ली के जूडो मैट से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय फाइट एरीना तक पहुंच चुका है.

*एक और तड़ियाल का शांत स्वभाव लेकिन आक्रामक खेल*

ताइविथा तड़ियाल ने भी जूडो में अपनी अलग पहचान बनाई. उन्होंने 2018 में जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में अंडर-44 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था. इसके बाद 2019 में विशाखापट्टनम इंडिया चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया.

उनकी फाइटिंग शैली में संतुलन और ग्रिप कंट्रोल को खास माना जाता है.

*कोचिंग की दुनिया में नाम बना रही एक तड़ियाल सिस्टर*

शालिनी तड़ियाल ने शुरू से ही दिल्ली के जेएलएन स्टेडियम में ट्रेनिंग के दौरान तकनीक और फिटनेस पर लगातार काम किया.

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उन्होंने खेल की तकनीकी बारीकियों पर ज्यादा ध्यान दिया. उन्होंने जापान में हुई एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी भाग लिया, हालांकि वहां उन्हें पदक हासिल नहीं हो सका. आज वह जूडो कोच के तौर पर अपनी पहचान बना रही हैं.

*स्नेहा तड़ियाल ने खेल से वर्दी तक का सफर तय किया*

स्नेहा तड़ियाल ने भी अपनी बड़ी बहनों की तरह जूडो से खेल सफर शुरू किया. पिता राजेंद्र सिंह उन्हें हॉकी का गोलकीपर बनते देखना चाहते थे, लेकिन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ट्रेनिंग के दौरान स्नेहा ने प्रतियोगी जूडो में हिस्सा लिया और जूडो के दांव-पेंच में महारत हासिल कर ली.

उन्होंने 13वीं विश्व सीनियर कुराश चैंपियनशिप 2022 (पुणे, महाराष्ट्र) में +87 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया. स्नेहा ने जिम्नास्टिक में भी हाथ आजमाया है. खेलो इंडिया के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए उन्होंने 38वें राष्ट्रीय खेलों में असंगत बार्स (Uneven Bars) में रजत और फ्लोर एक्सरसाइज (Floor Exercise) में कांस्य पदक जीता.

इन दिनों स्नेहा तड़ियाल उत्तराखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर सेवाएं दे रही हैं.

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