पहाड़ों में ढलान पर बने घर भूकंप में कितने सुरक्षित? नए अध्ययन ने बताई बड़ी चिंता
30 डिग्री ढलान पर बनी चार मंजिला इमारतों में सबसे ज्यादा नुकसान मिला. शोधकर्ताओं ने कहा, पहाड़ी क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए मौजूदा भूकंपरोधी नियम पर्याप्त नहीं हैं और इनके लिए अलग दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए.
पहाड़ी इलाकों में ढलान पर बने घर और इमारतें भूकंप के दौरान समतल जमीन पर बने भवनों की तुलना में ज्यादा जोखिम में हो सकती हैं. Innovative Infrastructure Solutions जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है. अध्ययन में पाया गया कि ढलान बढ़ने के साथ इमारतों को होने वाला नुकसान भी बढ़ता है. सबसे अधिक खतरा 30 डिग्री ढलान पर बनी चार मंजिला इमारतों में देखा गया.
यह अध्ययन चेन्ना राजाराम, शुभम सिंघल और जया प्रकाश वेमुरी ने किया है.
कैसे किया गया अध्ययन?
शोधकर्ताओं ने निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए तैयार एक सामान्य भवन योजना को आधार बनाया. इसके आधार पर तीन और चार मंजिला आरसीसी इमारतों के मॉडल तैयार किए गए. इनका परीक्षण समतल जमीन के साथ-साथ 10, 20 और 30 डिग्री ढलान पर किया गया.
इसके बाद इन मॉडलों पर दुनिया के सात बड़े भूकंपों के रिकॉर्ड किए गए झटकों का असर देखा गया. इनमें 1979 का इम्पीरियल वैली, 1980 का इरपिनिया, 1989 का लोमा प्रिएटा, 1999 का चाइ-चाइ और 2002 का डेनाली भूकंप शामिल थे.
ढलान बढ़ने पर क्या मिला?
अध्ययन में पाया गया कि ज्यादातर मामलों में ढलान जितनी अधिक थी, भूकंप के दौरान इमारत उतनी ही ज्यादा हिली और उसे उतना ही अधिक नुकसान पहुंचा. 30 डिग्री ढलान पर बनी इमारतों में सबसे ज्यादा असर देखा गया.
हालांकि कुछ मामलों में 10 डिग्री ढलान पर बनी इमारतों में 20 डिग्री ढलान वाली इमारतों से ज्यादा हलचल दर्ज की गई. शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका कारण ढलान पर अलग-अलग ऊंचाई के खंभे होना है, जिससे इमारत का व्यवहार बदल जाता है.
चार मंजिला इमारतों में खतरा ज्यादा क्यों दिखा?
अध्ययन के अनुसार, तीन मंजिला इमारतों की तुलना में चार मंजिला इमारतों को अधिक नुकसान हुआ. 30 डिग्री ढलान पर बनी चार मंजिला इमारतों में कई मामलों में नुकसान इतना गंभीर था कि उसे मरम्मत से परे माना गया.
इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा है कि 30 डिग्री ढलान पर चार मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुशंसा नहीं की जा सकती.
सबसे ज्यादा नुकसान कहां हुआ?
अध्ययन में पाया गया कि ढलान पर बनी इमारतों के निचले हिस्से में बने छोटे खंभों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. शोधकर्ताओं के अनुसार, भूकंप के दौरान सबसे अधिक दबाव इन्हीं खंभों पर आता है, जिससे नुकसान का खतरा बढ़ जाता है.
भवन निर्माण के नियमों में क्या बदलाव सुझाए गए?
अध्ययन में कहा गया है कि भारत के मौजूदा भूकंपरोधी भवन मानक पहाड़ी ढलानों पर बनी इमारतों के लिए अलग प्रावधान नहीं करते. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग डिजाइन दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं.
उन्होंने यह भी कहा है कि ढलान पर बनने वाली इमारतों का निर्माण शुरू करने से पहले भूकंप की स्थिति में उनके व्यवहार का विस्तृत परीक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए. साथ ही, ऐसे भवनों की डिजाइन सामान्य इमारतों की तरह नहीं, बल्कि पहाड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए.
आगे क्या करने की सिफारिश की गई है?
शोधकर्ताओं ने कहा है कि भविष्य के अध्ययनों में अलग-अलग तरह की पहाड़ी इमारतों, विभिन्न ढलानों और अलग-अलग प्रकार की मिट्टी को भी शामिल किया जाना चाहिए. इससे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अधिक सुरक्षित भवन निर्माण मानक विकसित करने में मदद मिल सकती है.
विशेषज्ञ से पूछे जा सकने वाले सवाल
1. इस अध्ययन में 30 डिग्री ढलान पर बनी चार मंजिला इमारतों में सबसे अधिक नुकसान पाया गया है. क्या यह हिमालयी क्षेत्रों में मौजूदा भवन निर्माण नियमों की समीक्षा की जरूरत की ओर इशारा करता है?
2. शोधकर्ताओं ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग भूकंपरोधी डिजाइन दिशा-निर्देश बनाने की सिफारिश की है. आपके अनुसार ऐसे नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव क्या होने चाहिए?
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