जमातियों ने किया बेड़ा गर्क।
जमातियों ने काम बिगाड़ा।
मौलाना साद ने कोरोना फैलाया।
अखबारों और न्यूज़ चैनलों में कुछ इस तरह के शीर्षक थे जब भारत में कोरोना अपने शुरुआती चरण में था।
लोगों ने मीडिया की इस सीख को बहुत जल्दी लिया और नफ़रत भरी फ़ेक न्यूज ने इसमें आग में घी का काम किया। देश भर में मुस्लिम समुदाय के दुकानदारों, ठेलेवालों का बहिष्कार किया जाना शुरू हुआ और मौजूदा हालात में यह कहना मुश्किल है कि मीडिया के बोए इस नफ़रत के बीज को हम कब तक काटेंगे।
आज शराब के ठेकों में लगी इस भीड़ को देख मुझे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का लॉकडाउन लगाने से पहले देश को किया सम्बोधन याद आ गया।
किसी भी समाज, देश का अगुआ या नेता उन्हें सिर्फ सही रास्ता
दिखा सकता है, वह उनमें किसी परिस्थिति से लड़ने के लिये ऊर्जा भर सकता है पर अंत में खेल के मैदान की तरह जहाँ कोच का सिखाया तभी काम आ सकता है जब मैदान पर सारे खिलाड़ी मिल कर कोच की बनायी रणनीति पर अमल करें और विपक्षी पर विजय प्राप्त करें जनता को भी अपने नेता, सरकार के आदेशों का पालन कर देश को मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकालना चाहिये।
लॉकडाउन के दौरान पुलिस, डॉक्टरों व सफ़ाई कर्मचारियों पर देश भर में हमले किए गये शायद यह सब करने वालों को ये नही पता था कि वो जिन पर हमला कर रहे हैं वह लोग अपना घर परिवार छोड़ कर जनता को इस कोरोना वायरस से बचाने के लिये दिन रात जुटे हुये हैं।
अब भी समय है भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से पचास हज़ार के आसपास पहुंच चुकी है। अपने देश की परिस्थितियों से हम अच्छी तरह वाकिफ हैं कि किस तरह हमें आज़ादी मिली किस तरह हमने अपनी मेहनत से अपने देश को आज अमेरिका, चीन जैसी महाशक्तियों के बराबर लाकर खड़ा किया।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने की मूर्खता हमारे देश को वर्षों पीछे ले जा सकती है। मौतों के आंकड़े सिर्फ एक स्कोर कार्ड की तरह लाखों भी पहुंच सकते हैं और उसमें आप भी शामिल हो सकते हैं।
अब ये हमारे देश की जनता पर ही है कि वो फिर से देश के विकास में सहायक होगी या अपनो की कब्र खोदने में।
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