Thursday, May 20, 2021

वो आलेख चबूतरों में गिरता है तेरे।

क़लम को छू दो तो जादू हूं मैं,
एक माइक पकड़ लो तो बेकाबू हूं।

दूसरों को आइना दिखा दू वो बला हूं मैं,
कहने को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ हूं मैं।

बहुत सी क्रांतियों का जनक हूं मैं,
भगत सिंह जैसों की सनक हूं मैं।

खुद का पेट पालने की सोचो तो एक ज़रिया हूं,
परिवार पालने की सोचो तो रोटी नमक हूं।

क्या फ़र्क पड़ता है क़लम में जादू है मेरे,
जो दुनिया बदल सकता है वो आलेख चबूतरों में गिरता है तेरे।

जहां करंट दौड़े वहां गोदी मीडिया के रूप में जाना जाता हूं,
बाकि रद्दी बन रोटियों को लपेटने के काम आता हूं।

जैसा भी हूं लाखों की उम्मीदों का सहारा हूं,
सच कह जाऊं तो बचपन से ही सही राह दिखाने वाला हूं।

अब एक-एक शब्द बिकने लगे हैं मेरे,
बस अपना एजेंडा चलाने का जरिया हूं रात सवेरे।

मत बिकने दो इन शब्दों को तुम भी साथ आओ मेरे,
गांधी जी के सपनों का भारत साकार हो इसके लिए ठीक पीछे खड़े हो जाओ मेरे।


हिमांशु जोशी, उत्तराखंड।

No comments:

Post a Comment

आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?

*आस्था के साथ जिम्मेदारी भी: बद्रीनाथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने क्या कहा?* गर्मियों के मौसम में स्कूलों की छुट्टियों के साथ ही उत्तराखंड में चार...