Saturday, June 5, 2021

तलवार की नोंक

महाराज का फ़रमान है, सिपाहियों की आवाज़ है हर कोई मुँह कपड़े से ढकेगा नही तो तलवार की नोंक।

घूमना बंद है, पढ़ना मंद है और मधुशाला के पास ज्यादा भीड़ लगाई तो तलवार की नोंक।

राष्ट्रभक्त कारागार में हैं, व्यापारी कंगाल है और महाराज के आदमी मालामाल हैं पर फिर भी मुंह खोला तो तलवार की नोंक।

वैद्य बाबू जड़ीबूटी लाए हैं और नए वैद्य कहीं से कुछ नया सा उपचार लाए हैं, सब में खींचतान जारी है लेकिन रोगी ने मुंह खोला तो तलवार की नोंक।

लाशों की सडांध भी अब आ रही है, गंगा हमारी लाशों को बहा रही है, किसी ने अगर ज़ोर से विलाप किया तो तलवार की नोंक।

कर वसूली अब ज़ारी है पर घर का राशन खाली है, राजा की पता नही कौन सा उत्सव मनाने की तैयारी है पर किसी ने भी मुंह खोला तो तलवार की नोंक।

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