मेरे हिस्से की दीवाली.
लगे हैं चारों तरफ़ झालर और फूट रहे पटाख़े,
कैसे फोन से कहूं अपने घर में कि मना लो तुम मेरे हिस्से की दीवाली.
शोर मचा है बच्चों का, जगमगा रहा है भारत.
तनख्वाह का हिस्सा भेज मैंने भी बोला है अपने बच्चों से फुलझड़ी जला मना लो तुम मेरे हिस्से की दीवाली.
शाम ढली है, अस्त-व्यस्त भीड़ को तरतीब से घर भेजना है मुझे.
मन ही मन सोच रहा हूं,
सुरक्षित घर पहुँचों तुम और मना लो मेरे हिस्से की दिवाली.
कसी बेल्ट और टोपी में खड़ा हूं सड़क पर, फ़िर भी उलझते जाते हो तुम मुझसे.
चुप हूं मैं क्योंकि मन ही मन सोच रहा हूं जाओ तुम घर और मना लो परिवार संग मेरे हिस्से की दीवाली.
तो कोरोना में उनके साथ को याद कर एक टुकड़ा मिठाई का उन्हें दे,
तुम कह दो 'लो जी आप भी मना लो अपने हिस्से की दिवाली'
हिमांशु जोशी
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