RNI का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि समाचारपत्र प्रेस और पुस्तक पंजीयन अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रकाशित किए जाते हैं .
समाचारपत्र पंजीयन(केन्द्रीय) नियम, 1956 के अनुसार समाचारपत्र के प्रकाशन के 48 घंटे के भीतर अंक की एक प्रति प्रेस पंजीयक को डाक अथवा मेसेंजर द्वारा भेजी जाती है, फिर भी शायद उनकी नज़र ऐसी खबरों पर नही पड़ती.
भारतीय प्रेस परिषद के द्वारा भी पत्रकारिता के आचरण के मानक बनाए गए हैं पर शायद ही टीवी पर लड़ते-झगड़ते एंकर , ऐसे विज्ञापन छापने वाले समाचार पत्र इन आचरण को मानते हैं.
इन संस्थाओं के लिए आने वाली विज्ञप्तियों पर कभी नज़रे दौड़ाई हैं!
सचिन से फुटबॉल खिला लीजिए, मेसी से क्रिकेट! शायद दोनों की फैन फॉलोइंग खुद कम होती जाएगी. यही हाल मीडिया से जुड़ी संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर आने वाली विज्ञप्तियों का होता है. जहां मीडिया क्षेत्र से जुड़े योग्य व्यक्तियों को लिया जाना चाहिए, वहां 'किसी भी विषय से ग्रेजुएट' उम्मीदवारों को मौका दिया जाता है और देश की मीडिया को मजबूत बनाने की जिम्म्मेदारी सौंप दी जाती हैं.
मीडिया क्षेत्र में शोध की बुरी हालत भी किसी से छुपी नही है.
लोकतंत्र के तीन स्तम्भ जब कमज़ोर हो रहे हैं तब उसके चौथे स्तम्भ की ही जिम्म्मेदारी है कि वह डटा रहे पर इस हाल में कब तक किसी को नही पता.
हिमांशु जोशी, उत्तराखंड.
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