Friday, December 24, 2021

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया... अभी तो बहुत से एप बनने बाक़ी हैं..

अंदर जब कुछ उथल पुथल मचती है, तभी लेखक की कलम चलती है।
दिन भर हमारे चारों तरफ़ जो कुछ घटित होता रहता है उसमें राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से जो कुछ भी लोगों के लिए उपयोगी हो उसी ख़बर को लिख लेने पर हम उसे न्यूज़ कह लेते हैं और कुछ ऐसी ही दुर्घटना राह चलते मेरे साथ हो चली।
हां दुर्घटना ही क्योंकि यह बुरा ही है, मेरे साथ, आपके साथ और हम सबके साथ।


ज़रा इस तस्वीर और बैग पर गौर से नज़र गढ़ा कर देखिए, झोले की गुणवत्ता आपको बदलते भारत की तस्वीर तो दिखाता है पर उसमें छपा विज्ञापन बहुत सारे सवाल छोड़ जाता है।
इन्हीं सवालों की टोह लेने मैंने उस ऑटो स्वामी से बात करी ,जिस पर यह झोला विराजमान दिखा।

मैं- भाईसाहब यह झोला कहां से आया!
ऑटो स्वामी- मोदी जी ने दिया।
मैं- सीधे मोदी जी!!
ऑटो स्वामी- हां , इसमें अनाज मिला।
मैं- तब तो यह अच्छा है, पर इतना महंगा झोला और इस पर छपा विज्ञापन। इसका खर्चा!!
ऑटो स्वामी- मेरी, आपकी और हमारी जेब से।
मैं- ये क्या बात हुई, ख़ैर तेल इत्ता महंगा हो रहा है। उस पर क्या कहोगे।
ऑटो स्वामी- ओ तो तेल कंपनियों की जिम्मेदारी है। वही बढ़ाते हैं।
मैं- अब मोदी जी नही कहा आपने, कोई नही, राम राम। खूब तरक्की कीजिए।

कोरोना काल में सरकार की भूमिका निर्विवाद रूप से तारीफ़ के काबिल रही ,जो उसने उसकी वज़ह से ही भूखे-प्यासे घर पहुंचे लोगों को पेट पालने लायक राशन पहुंचाया।
गरीब को यही तो चाहिए था, पहले 'फ्री' फिर जेब पर भारी पड़ती डेढ़ जीबी इंटरनेट वाली लत पूरी करने के बाद उसे खाने को कुछ मिल जाए ,यही उनके जीवन का फ़लसफ़ा बन गया है।

बसों, ट्रेनों,मेट्रो, अखबारों और अब राशन के बैगों तक पहुंचे इन विज्ञापनों पर किसने कितना खर्च किया इसकी चिंता तीसरे भारत के इन लोगों को तो बिल्कुल भी नही है। रही बात दूसरे भारत की तो वो रोज़ तीसरे भारत में शामिल न हो जाए इससे जूझता रहता है, ऐसे में उसे इस ख़र्चे पर विचार करने के लिए वक्त कहां। पहला भारत या इंडिया तो इसका स्पॉन्सर ही है तो उन्हें तो छोड़ ही दें।


लोकसभा में एक संसद सदस्य के लिखित सवाल के जवाब में ब्यूरो ऑफ कम्यूनिकेशन (बीओसी) ने यह जानकारी दी कि तीन वित्तीय वर्षों में न्यूजपेपर विज्ञापनों पर केंद्रीय मंत्रालयों ने कितना खर्च किया. ये इस प्रकार है:

वित्तीय वर्ष 2017-18 - 462.22 करोड़ रुपए

वित्तीय वर्ष 2018-19 - 301.03 करोड़ रुपए

वित्तीय वर्ष 2019-20 - 128.96 करोड़ रुपए

लेकिन पूछिए कि सरकारी योजनाओं और नीतियों के प्रचार के लिए इस्तेमाल होने वाला पैसा किसका है? यह आपका पैसा है, टैक्सपेयर का पैसा। ‘सरकार का पैसा’ जैसी तो कोई चीज़ होती ही नहीं, यह तो ‘टैक्सपेयर का पैसा’ होता है.

https://twitter.com/ProfVilas/status/1431133869349036035?t=p8MQCoRrXcpLdp3k5_WF3w&s=19


बांदा। 5 अगस्त को अन्न महोत्सव मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सरकारी कोटे की दुकानों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में राशन बंटेगा।



मणिपुर (Manipur) में अखबारों और स्थानीय टेलीविजन चैनलों (Newspapers And Local Television Channels) ने 15 करोड़ रुपये के बकाया विज्ञापन बिलों का भुगतान (Advertisement Bill Payment) न किए जाने को मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (Chief Minister N. Biren Singh) की प्रतिबद्धता की विफलता करार देते हुए इसके विरोध में गुरुवार को बंद रखा।

पेट खाली तो बना बुली बाई एप, आख़िर ये बुनियाद कैसे डली

तब्लीग़ी जमात कार्यक्रम के मीडिया कवरेज पर एक याचिका की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि हाल के दिनों में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे अधिक दुरुपयोग किया गया है.

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें कहा गया था कि मीडिया का एक वर्ग तब्लीग़ी जमात के मामले को लेकर सांप्रदायिक द्वेष फैला रहा था.

दिसंबर 2020 में दिल्ली की एक अदालत ने 36 विदेशी तब्लीग़ी जमात के सदस्यों को बरी करते हुए कहा कि उपस्थिति रजिस्टर भी यह साबित नहीं करता कि अभियुक्त बताई गई तारीखों पर मरकज़ में पहुँचे या मार्च 2020 के अंत तक मरकज़ में रहे.

अदालत ने स्पष्ट कहा कि "अभियोजन पक्ष 12 मार्च से 1 अप्रैल तक मरकज़ के अंदर किसी भी अभियुक्त की उपस्थिति को साबित करने में विफल रहा. ऐसा नहीं लगता कि कहीं कोई भी उल्लंघन हुआ."


जावेद भाई आप अपनी दुकान उठा लो और यहां दुकान मत लगाओ. बड़ी दिक्क़त हो रही है आप लोगों से. इन्हीं लोगों से बीमारी फैल रही है. उठाओ...उठाओ दुकान उठाओ अपनी.'- उत्तराखंड के हल्द्वानी की घटना

मुंबई साइबर पुलिस ने 'बुली बाई' मामले की मुख्य आरोपी एक महिला को उत्तराखंड से हिरासत में लिया है, जबकि बेंगलुरु के 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हिरासत में ली गई महिला इस मामले में मुख्य आरोपी है। पुलिस की टीम महिला से पूछताछ कर रही है। एक अधिकारी ने बताया कि महिला को ट्रांजिट रिमांड के लिए एक अदालत में पेश किया जाएगा और इसके बाद मुंबई लाया जाएगा।



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