Sunday, January 23, 2022

उत्तराखंड के आने वाले दशक से पहले इस दशक पर बात कर लेते प्रधानमंत्री मोदी.

उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और बरसात के बीच चुनावी बिगुल भी फूंका जा चुका है। प्रदेश के राजनीतिक इतिहास को देखें तो यहां सत्ता में देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों का ही वर्चस्व रहा है।
उत्तराखंड में बेरोज़गारी इस समय सबसे बड़ा मुद्दा है पर प्रदेश के बड़े नेता उसे निपटाना छोड़ सत्ता के मोह में कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी का दामन थामते रहे हैं।

इस बार प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए बड़ी पार्टियों में कांग्रेस और बीजेपी के साथ आम आदमी पार्टी भी अपनी ताल ठोक रही है।

प्रधानमंत्री का उत्तराखंड में चुनावी दौरा और उनके दावों पर एक नज़र
 
प्रदेश की भाजपा सरकार को फ़िर से चुनाव में जीत दिलाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले एक चुनावी रैली कर गए।
हल्द्वानी में हुई चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा। इसके लिए कई विकास कार्यों पर काम करने की जरूरत पर सरकार जोर दे रही है। उत्तराखंड के लोगों का सामर्थ्य इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाएगा यह पक्का विश्वास है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश को 'जल जीवन मिशन' की सौगात दी है और उन्होंने टनकपुर-बागेश्‍वर रेल लाइन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, ऑलवेदर रोड को लेकर हो रहे काम को ऐतिहासिक बताया।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की ज़मीनी हकीकत

              ऑल वेदर रोड का एक दृश्य

ऑल वेदर रोड पर एक शोध छात्र की राय..

नैनीताल से टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट के शोध छात्र कमलेश जोशी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने महत्वपूर्ण काम में गिनाए गए कामों में से एक ऑल वेदर रोड पर कहते हैं कि पहाड़ों में विकास के खिलाफ शायद ही कोई हो लेकिन विनाश की इस शर्त पर विकास शायद ही किसी उत्तराखंडी को मंजूर हो ,जिसमें पल-पल जानमाल का खतरा बना हुआ है। उत्तराखंड को सतत विकास की नितांत आवश्यकता है जो न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी के लिए उपयोगी हो बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी बचा रहे। संसाधनों का सीमित दोहन व उपयोग सतत विकास की मूल अवधारणा है।

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की हकीकत देखी जाए तो लोगों को ऑल वेदर रोड से ज्यादा ऑल वेदर हैल्थ सर्विसेज, ऑल वेदर एजुकेशन, ऑल वेदर जॉब सैक्योरिटी तथा ऑल वेदर लिविंग कंडीशन की जरूरत है। जिस दिन ये बेसिक सुविधाएं हर मौसम में सुदूर पहाड़ी गांवों तक पहुंच जाएंगी ,उस दिन शायद ऑल वेदर रोड जैसी अवधारणाएं लोगों की समझ में आ पाएंगी।

ऐतिहासिक बताए गए टनकपुर-बागेश्‍वर रेल लाइन के काम की कहानी

प्रधानमंत्री द्वारा ऐतिहासिक बताए गए टनकपुर-बागेश्‍वर रेल लाइन के काम पर टनकपुर के युवा मयंक पन्त कहते हैं कि यह अब कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नही रहा क्योंकि रेलवे लाइन के सर्वे की बात सुन-सुन कर हम थक चुके हैं। भाजपा हो या कांग्रेस, यहां हर सरकार आती है और इस रेलवे लाइन के फाइनल सर्वे की बात कह जाती है।

प्रधानमंत्री ने अपनी रैली में कहा था प्रदेश को 'जल जीवन मिशन' की सौगात दी है, इस पर एक नज़र

वर्ष 2019 की एक खबर थी कि उत्तराखंड राज्य जल नीति-2019 के मसौदे को मंजूरी दी गई है। राज्य में शुरू होने वाली यह जल नीति प्रदेश में उपलब्ध सतही और भूमिगत जल के अलावा हर वर्ष बारिश के रूप में राज्य में गिरने वाले 79,957 मिलियन किलो लीटर पानी को संरक्षित करने की कवायद है।
जल नीति में राज्य के 3,550 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले 917 हिमनदों के साथ ही नदियों और प्रवाह तंत्र को प्रदूषण मुक्त करने और लोगों को शुद्ध पेयजल और सीवरेज निकासी सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है।

शायद इस नीति से एक साल में थोड़ा बहुत प्रभाव पड़ना शुरू हुआ होगा जिससे प्रभावित हो वर्ष 2020 में पीआईबी द्वारा दी गई एक सूचना के अनुसार केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को लिखे पत्र में आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार  उत्तराखंड को 2023 तक ‘हर घर जल राज्य’ बनाने में पूरा सहयोग देगी।
जल शक्ति मंत्री ने पत्र में बताया था कि उत्तराखंड को हर घर में नल से जल पहुंचाने की इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए इस वित्त वर्ष में केंद्र की ओर से 362॰57 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। यह राशि वर्ष 2019-20 में इस कार्य के लिए दी गई 170॰53 करोड़ के दोगुने से भी अधिक है। पत्र में बताया गया कि इस अभियान के लिए राज्य सरकार के पास इस समय इस अभियान के लिए 480.44 करोड़ की बड़ी राशि उपलब्ध है जिसमें राज्य सरकार का अंशदान और पिछले वर्ष उपयोग न लाई जा सकी राशि शामिल है।

इंडिया वाटर पोर्टल के अनुसार इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड सरकार ने बजट 2020-21 में 1165 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
1165 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के लोगों को पीने का साफ पानी मिल सकेगा।

इन आंकड़ों से ये तो साफ़ है कि योजना का बजट बढ़ता जा रहा है पर काम शायद कम ही हो रहा है।

जल जीवन मिशन की महत्ता पर प्रदेश के नौलों को पुनर्जीवित करने में लगे नौला फाउंडेशन बगवालीपोखर रानीखेत के संस्थापक अध्यक्ष बिशन सिंह कहते हैं कि पानी के लिये तरसते पहाड़ के लिये जल जीवन मिशन एक वरदान साबित होगा पर उत्तराखंड में ये जल्दबाज़ी में स्थानीय समुदायों की सहभागिता के बग़ैर लिया गया फैसला है। जिसमें योजना के सही ढंग से कार्यान्वित होने में संदेह है। जल जीवन मिशन की सार्थकता सीमित रुप से उपलब्ध भूजल के बजाय पहाड़ के परम्परागत जल स्रोतो नौलों-धारों पर आधारित होनी चाहिये, जिससे दीर्घकालीन योजना चलेगी अन्यथा हैंडपम्पों की तरह ही यह योजना भी बेकार हो जाएगी । 
स्थानीय भागीदारी ही जल संरक्षण को सही दिशा दे सकती है।

हिमांशु जोशी, उत्तराखंड।

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