Thursday, June 2, 2022

'फिटनेस की डोज आधा घण्टा रोज' कंक्रीट युग में अब सेहत को अब साइकिल का ही सहारा.

3 जून 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने साइकिल उपयोग को बढ़ावा देने के लिये पहली बार विश्व साईकिल दिवस मनाने की शुरुआत की थी। आज यह चौथी बार मनाया जा रहा है.

इस बार विश्व साइकिल दिवस ऐसे समय में आया है जब हम बॉलीवुड के मशहूर गायक कृष्णकुमार कुनाथ की असमय मृत्यु के दुख में डूबे हुए हैं. गायक के के की 53 वर्ष में हार्ट अटैक से हुई इस मृत्यु को असामान्य बताया जा रहा है पर मेरे विचार से आज के समय को देखते इस मृत्यु को असामान्य नही कहा जा सकता.

हम सबको पता है कि लोगों का खानपान और रहनसहन अब पहले जैसा नही रहा, खाने का सामान मिलावट भरा है तो युवाओं की शारीरिक गतिविधियां शून्य हो चुकी हैं. कोरोना काल के बाद से वर्क फ्रॉम होम और मोबाइल पर पढ़ाई ने लोगों को घर के अंदर ही कैद कर लिया है.

मोबाइल से लगाव और खेलने के लिए जगह की कमी की वजह से बच्चे अब गलियों में खेलते नही दिखते.
युवाओं में लिपिड लेवल बढ़ रहा है, शरीर बाहर से दिखता तो ठीक है पर हृदय बीमार हो जाता है.

28 मई को किए टेस्ट में मेरा लिपिड लेवल भी 500 से ऊपर है, जबकि सामान्यतः यह 150 पर ही होना चाहिए.
टेस्ट नही होता तो मैं इस बात से अनजान रहता और मुझे कभी भी हृदय सम्बन्धी समस्या सामने आ सकती थी.
 अब लिपिड लेवल को सामान्य लाने में मुझे एक दो महीने तक शारीरिक गतिविधियों के साथ दवाइयों पर निर्भर रहना होगा.
 मैंने तो टेस्ट करा लिया पर शायद बहुत से लोग ये नही कराते और अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं.

 लिपिड का अर्थ फैट होता है। हमारे शरीर के बाहर के पार्ट में फैट मौजूद होने के साथ खून की नली में भी फैट मौजूद होती है.
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए खून में मौजूद फैट की मदद से कोलेस्ट्रोल, वीएलडीएल, एलडीएल, एचडीएल, ट्राईग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रोल का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट को खाली पेट करवाने की सलाह दी जाती है, ताकि रिपोर्ट में फैट की वैल्यू सही-सही मिल सके.
यदि इसकी मात्रा बढ़ जाए को खून की नली में फैट जमा होने की संभावना होती है, जिस वजह से हार्ट की नलियों में फैट जमा होने के कारण हार्ट डिजीज, हार्ट अटैक, स्ट्रोक हार्ट जैसी बीमारी होने की संभावना रहती है. इसे कंट्रोल में रखने के लिए चाहिए कि हम एक्सरसाइज करते रहें और तला भुना खाने से दूर रहें.

खेल के मैदान गायब इसलिए साइक्लिंग हो गई है जरूरी

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज, खेलकूद जरूरी है पर नगरीकरण के इस दौर में शहरों, गांवों में कंक्रीट का जाल बिछाने पर ही जोर दिया जा रहा है. मोबाइल में कैद बच्चे, युवा या वृद्ध जन अगर कोई शारीरिक गतिविधि करना भी चाहते हैं तो इसके लिए जगह की कमी है.

अगर आप खेल के मैदान बढ़ने की उम्मीद में हैं तो ये जान लेना जरूरी है कि साल 2021 में केंद्र सरकार ने खेल बजट में 8.16% की कटौती की थी. खेलों के लिए बजटीय आवंटन 2,596.14 करोड़ रुपये था, जो पूर्व के मुकाबले 230.78 करोड़ रुपये कम है. सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में भी खेलने की जगह नही है. अखिल भारतीय स्कूल शिक्षा सर्वेक्षण के द्वारा 2016 में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार देश के 62% सरकारी स्कूलों में प्लेग्राउंड नही है.

इन सब कमियों के बाद भी आपको अपने स्वास्थ्य से समझौता नही करना चाहिए, देश में सड़कों की कमी नही है और अपना स्वास्थ्य सही रखने के लिए आप उसमें साइक्लिंग का आनन्द उठा सकते हैं.

यूरोपीय देशों में 18वीं शताब्दी के दौरान जन्म ले चुकी साईकिल का रखरखाव बहुत ही आसान है. साईकिल की चेन में समय-समय पर तेल डालते रहने, पहियों में समय से हवा भरते रहने, समय-समय पर साईकिल के नट बोल्टों को कस कर, उसके ब्रेकों का ध्यान रख, समय से साईकिल की सफाई कर उसे जंग मुक्त रख कर और पहिये का पंक्चर बनाने का ज्ञान रख साईकिल को लम्बे समय तक प्रयोग में लाया जा सकता है.

वर्ल्ड बैंक वेबसाइट के अनुसार इस समय दुनिया भर में 1 बिलियन से अधिक साइकिलें हैं और वैश्विक आबादी का 50% से अधिक हिस्सा साइकिल चलाना जानता है. वेबसाइट के अनुसार दुनिया भर में हर सेकंड चार बाइकों का उत्पादन होता है और इन्हें हर दो सेकंड में कोई न कोई खरीद ही लेता है. कोरोना के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने की खूब बात हुई है, सार्वजनिक वाहनों में बेतहाशा भीड़ के इस दौर साइकिल सामाजिक दूरी बनाए रखने का सस्ता एवं सुलभ जरिया भी है.

साईकिल सवारों की सुरक्षा के लिये मुख्य सड़क से अलग लेन का निर्माण ज्यादा संख्या में सुनिश्चित किया जाए तो खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के 'फिटनेस की डोज आधा घण्टा रोज' मंत्र को जमीनी स्तर पर पूरा किया जा सकता है.

हिमांशु जोशी
@himanshu28may

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