आज नही तो कल नाम जरूर कमाएंगे शशांक घोष
प्लान ए प्लान बी के निर्देशक शशांक घोष बॉलीवुड में फिल्म 'वीरे दी वेडिंग' के लिए जाने जाते हैं. इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म को बनाने के लिए उन्होंने स्क्रीन पर रोमांस वाला माहौल बड़ी ही खूबसूरती के साथ तैयार किया है. ऑफिस का सेटअप हो या फिल्म का क्लाइमेक्स, सब कुछ देखने में अच्छा लगा है.
आंख में पट्टी बांध कर साथी की तलाश करने वाला दृश्य अनूठा है.
रिश्तों की बदलती परिभाषा पर भी उन्होंने आजकल 'एप' से बनने वाले रिश्तों को दिखाने की कोशिश करी है. यह जानते हुए भी कि हमारा समाज अभी सेक्स की बातों पर इतना खुला नही है, निर्देशक ने इस फिल्म में एक माँ को अपनी बेटी से 'सेक्स कर ले किसी के साथ' कहते हुए दिखाया है.
शशांक घोष की फिल्में भले ही आज लोगों को अच्छी न लगें पर दस साल बाद यह पसन्द की जाएंगी.
अंत तक बांधे रखती ये रोमांटिक कॉमेडी
फ़िल्म की कहानी, संगीत और संवाद शुरुआत से ही दर्शकों का ध्यान खींचने लगते हैं.
इसकी कहानी एक मैचमेकर और तलाक कराने वाले एडवोकेट के रिश्ते पर केंद्रित है. लड़ते-झगड़ते कब यह दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते हैं, इन्हें पता ही नही चलता है. फिल्म की कहानी बहुत खूबसूरत है और इसके मुख्य पात्रों के बारे में हमें फिल्म आगे बढ़ते कुछ न कुछ नया पता चलते रहता है.
इस रोमांटिक कॉमेडी से भरपूर कहानी के अंत तक दर्शकों को अनुमान नही लग पाता कि वह एक हैप्पी एंडिंग देखेंगे या कहानी के अंत से दुखी होंगे.
दमदार अभिनय के साथ बला की खूबसूरत लगी हैं तमन्ना भाटिया
फिल्म की मुख्य पात्र निराली है. निराली एक मैचमेकर है और अपने पुराने रिश्ते की वजह से किसी नए रिश्ते में नही जाना चाहती. निराली का किरदार दक्षिण भारतीय सिनेमा की सुपरस्टार तमन्ना भाटिया ने निभाया है और फिल्म में वह बला की खूबसूरत लगी हैं. अभिनय के मामले में भी वह रितेश देशमुख से एक कदम आगे लगती हैं.
शीशे के सामने खुद से बात करने वाले दृश्य में वह दमदार अभिनय करती नज़र आती हैं.
रितेश ने बॉलीवुड में अपने कॉमेडी किरदारों से ही पहचान बनाई है. फिल्म में वह तलाक कराने वाले एडवोकेट बने हैं. फिल्म में उनके किरदार को इस तरह नही बुना गया कि दर्शक रितेश को ज्यादा कॉमेडी करते देख पाते.
पूनम ढिल्लों ने एक आधुनिक मां के किरदार को निभाने में कोई कसर नही छोड़ी है.
नब्बे के दशक की याद दिलाता 'कह दो कि'
फिल्म का संगीत रिश्तों की मिठास और कड़वाहट दोनों ही दर्शकों के सामने लाने में कामयाब रहा है.
इसके गाने काफी लम्बे तक लोगों की यादों में बसे रहने का दम रखते हैं. 'टल्ली' गाना पार्टियों की शान बनेगा.
सौरभ दास का गाया 'दिल हो गया जोगिया' सुनने में अच्छा लगता है.
'कह दो कि' गाना फ़िल्म के अंत में है और यह दिखाता है कि गाना में किसी फिल्म के क्लाइमेक्स में निर्णायक हो सकता है. इसकी कोरिगोग्राफी को बड़ी ही खूबसूरती से अंजाम दिया गया है. 'कह दो कि' सुन आपको नब्बे के दशक के गानों की याद भी आने लगेगी.
काफी सोच विचार कर लिखे हुए संवाद
प्लान ए प्लान बी के संवाद बड़े प्लान बना कर लिखे गए हैं. इनमें तलाक से जुड़े संवाद बड़े प्रभावी हैं. 'न शादी गलत है न डिवोर्स, गलत शादी में रहना गलत है' इसका उदाहरण है.
कौस्तुभ के ऑफिस में काम करने वाली सेरेना का निराली से बोला हुआ संवाद 'डिवोर्स के बाद लगा कि इट्स ऑल ऑवर. फिर से प्यार करना मुश्किल होगा, मारता था वो'. उन महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता हुआ लगता है जो सामाजिक तिरस्कार के डर की वजह से मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बावजूद तलाक नही लेती हैं.
कसी पटकथा, सुंदर दृश्य और कॉस्ट्यूम डिज़ाइन
फ़िल्म की पटकथा पर अच्छा काम किया गया है. फ्लैशबैक में जाकर घटनाओं को याद करते दिखाने वाला प्रयोग प्रभावी है.
मुंबई में ढलती हुई शाम को दिखाए जाने वाले दृश्य ,छायांकन पर दमदार काम की गवाही देते हैं.
कलाकारों के मेकअप और कॉस्ट्यूम पर अच्छा काम हुआ है. तमन्ना भाटिया की वेस्टर्न ड्रेस हो या रितेश के रंगबिरंगे कपड़े, दोनों ही फ़िल्म की कहानी के हिसाब से फिट लगे हैं.
हिमांशु जोशी
@himanshu28may
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