खेल दिवस के दिन आपको भारत में खेलों की वास्तविक स्थिति जाननी है तो अपने आसपास के किसी भी ऐसे स्कूल में घूम आइए जहां आम नागरिकों के बच्चे पढ़ते हैं, ब्रेक से लेकर स्पोर्ट्स के पीरियड तक में आपको वहां बच्चे एक दूसरे पर कूदते- फांदते दिख जाएंगे.
हमारे देश में बच्चों के खेल समय को इतनी गम्भीरता से लेने के कारण ही शायद पिछले सात ओलंपिक खेलों में भारत शीर्ष चालीस में भी जगह नही बना पाया है.इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के एक रिसर्च पेपर के अनुसार
बुधिया और फुटबॉलर ईंट ढोती
No comments:
Post a Comment