इसे पढ़कर पाठकों के मन में जल विद्युत परियोजनाओं के औचित्य पर भी सवाल उठने लगता है कि कैसे कुछ लोग सिर्फ अपने लाभ के लिए हजारों लोगों का घर तो उजाड़ते हैं और साथ ही एक संस्कृति के साथ-साथ उसके इतिहास को मिटा दिया जाता है.
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