Sunday, June 16, 2024

सोनप्रयाग

भील

खच्चर


57 साल के सोकार सिंह ग्राम कोटबांगर जिला रुद्रप्रयाग के हैं 18 साल में वह मुंबई चले गए थे चार लड़की दो लड़के। मुंबई एक साल के बाद वापस परिवार की जिम्मेदारी। अब वहां गांव लेबर, कहीं खाना। रामपुर के होटल में काम करते मिले।

सरदार टैक्सी





 41 वर्षीय कुंदन सिंह बिष्ट मिले मुझे रामपुर में एक गाड़ी से बोतल फेंकते हुए यात्री को देखकर यह कहते कि आ जाते हैं हमारे पहाड़ को खराब करने, ये गर्मी इन्हीं लोगों की वजह से हैं।
रुद्रप्रयाग के कुंदन कहते हैं कि हार्ट अटैक से 9 साल पहले इनकी माता की मृत्यु हो गई, इनके पिता घर में ही हैं। 1998 में हाईस्कूल फिर आईटीआई किया, इसके बाद बैंगलोर में टेक्निकल इंजीनियर बने और वहीं रहते कर्नाटक यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा किया। अलग अलग कम्पनियों में टेक्निकल मैनेजर, ताज होटल में रहे, कई जगह नौकरी करने के बाद वह लॉक डाउन में वापस रुद्रप्रयाग आए। वह आगे बताते हैं यहां रामपुर, सीतापुर, सोनप्रयाग के लोग सरकारी नौकरियों में जैसे टीचर, आर्मी, पुलिस में ज्यादा जाते हैं और अपनी सम्पत्ति लीज पर देते हैं। 
कोरोना काल के बाद से भीड़ ज्यादा बढ़ने लगी, इसका एक कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां बार बार आना भी है।
लीज पर होटल देने का ट्रेंड यहां पिछले तीन चार साल से ही शुरू हुआ है। एक कमरा लगभग एक लाख रुपए में छह महीने के लिए लीज पर दिया जाता है। सीज़न के छह महीने के बाद यहां के लोग खेती व दिहाड़ी पर आश्रित हो जाते हैं।
यहां आलू, धान, गेंहू, मड़वा होता है और बंदर,सुअर, मौसम, लोगों की मेहनत पर यह निर्भर करता है कि कितनी फसल होगी। 
यहां की लड़कियों की उच्च शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है और पढ़ने देहरादून, ऋषिकेश भेजा जाता है। लड़कों को युवा होते ही खुद कमाने देने का ट्रेंड है।

कुंदन कहते हैं कि अगर हमारे जिले की बात करें तो तीन लड़कों के लिए शादी करने के लिए सिर्फ एक लड़की बची है। वह भी सरकारी नौकरी वाले को ही तरजीह देती है।
बात खत्म होते होते कुंदन ने यह कहते एक दृश्य भी कैमरे पर कैद करवा लिया कि ऐसा हो तो पहाड़ों की सुंदरता लाखों साल बची रहेगी। 
कूड़ा उठाते इन सफाईकर्मियों को देखते ही इस वाहन चालक ने गाड़ी रोक दी और अपनी पानी की खाली बोतल इन्हें थमा गया।

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