हिंदी दिवस: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हिंदी का वैश्विक सफर
हिंदी दिवस पर वैश्विक महत्व
हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है और यह हमारी राष्ट्रीय भाषा की आधिकारिक मान्यता का सूचक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस साल यह अवसर हिंदी को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है.
साल 2025 में, जब भारत की भाषाई विविधता पर बहस तेज हो रही है, मोदी सरकार ने हिंदी को न केवल राष्ट्रीय एकता का सूत्रधार बनाया बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय संवाद का सशक्त उपकरण भी बनाया. उनके प्रयासों से हिंदी अब संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से सुनी जा रही है, जो इसे सांस्कृतिक गौरव और वैश्विक पहचान का उदाहरण बनाता है.
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी भाषण
प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी को वैश्विक मंचों पर हिंदी को सम्मान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण भाषण दिए हैं. 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में उन्होंने हिंदी में संबोधित करते हुए कोविड-19, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भारत की भूमिका बयान की और 'सेवा परमो धर्म' का संदेश भी साझा किया.
साल 2023 के जी-20 शिखर सम्मेलन में उन्होंने हिंदी में उद्घाटन भाषण देकर 'सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र विश्व पटल पर पेश किया. इसके बाद साल 2024 में यूनेस्को के कार्यक्रम में उन्होंने हिंदी कविता और लोककथाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति का परिचय दिया, जिससे हिंदी को कूटनीति और सांस्कृतिक संवाद दोनों में एक प्रभावशाली माध्यम के रूप में मान्यता मिली.
सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रचार
मोदी सरकार ने हिंदी को सरकारी कामकाज की प्रमुख भाषा बनाने पर विशेष जोर दिया है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़े और क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान भी कायम रहे.
गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल कहा कि मोदी सरकार ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है, जो भाषाई विविधता को संरक्षित करता है. नई शिक्षा नीति-2020 के तहत कक्षा 5वीं और 8वीं तक मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहन मिला और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 95% आवेदक अब मातृभाषा में परीक्षा दे रहे हैं. इसके अलावा, सरकार ने राज्यों में हिंदी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां सरकारी कर्मचारियों और छात्रों को उच्च स्तर की हिंदी शिक्षा दी जा रही है.
हिंदी शब्दसिंधु की पहल
हिंदी की शब्दावली को आधुनिक और समृद्ध बनाने के लिए मोदी सरकार ने 'हिंदी शब्दसिंधु' परियोजना शुरू की है. यह परियोजना केंद्रीय हिंदी निदेशालय और वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के सहयोग से विकसित की जा रही है. गृह मंत्री अमित शाह ने साल 2024 में 'केंद्रीय हिंदी समिति' की बैठक में घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में यह दुनिया का सबसे समृद्ध शब्दकोष बनेगा, जिसमें तकनीकी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षेत्र के शब्द शामिल होंगे. इस पहल से हिंदी की वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है, ताकि शोध और नवाचार में भाषा की भूमिका मजबूत हो.
भारतीय भाषा अनुभाग की स्थापना
सरकार ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद को सुगम बनाने के लिए जून 2025 में 'भारतीय भाषा अनुभाग' की स्थापना की. इसका उद्घाटन गृह मंत्री अमित शाह ने किया और यह राजभाषा विभाग का हिस्सा बन गया. अनुभाग प्रौद्योगिकी के माध्यम से द्विदिश अनुवाद प्रणाली विकसित करेगा, विशेष रूप से सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (C-DAC) के सहयोग से यह संभव होगा. इसका उद्देश्य अंग्रेजी पर निर्भरता कम करना और केंद्र-राज्य समन्वय को बढ़ावा देना है, ताकि सरकारी फाइलें मातृभाषा में आसानी से अनुवादित हों. इस पहल से हिंदी सरकारी और तकनीकी दस्तावेजों में भी प्रभावशाली भाषा बन गई है.
हिंदी की नई पहचान और चुनौतियां
प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से हिंदी को न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सम्मानित और प्रभावशाली भाषा के रूप में स्थापित किया गया है. 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम के तहत काशी-तमिल संगम जैसी पहलों ने हिंदी की पहचान को और मजबूत किया है.
साल 2025 में दक्षिणी राज्यों से हिंदी थोपने की आलोचना आई, लेकिन मोदी ने स्पष्ट किया कि भाजपा सभी क्षेत्रीय भाषाओं का समान सम्मान करती है. कुल मिलाकर, हिंदी अब भारतीय संस्कृति और विविधता की पहचान बन चुकी है.
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