Thursday, May 21, 2026

धाकड़ हैं - धाकड़ हैं : छोरी तो पौढ़ी की भी धाकड़ हैं

*धाकड़ हैं छोरियां पौड़ी की : दिल्ली के जूडो मैट से अंतरराष्ट्रीय एरीना तक तड़ियाल सिस्टर्स*

माता - पिता की जिद और बेटियों के समर्पण ने भारत को चार ऐसी खिलाड़ी दी हैं, जो आज दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रही हैं. दूरस्थ क्षेत्रों में स्पोर्ट्स की सीमित पहुंच के बीच ऐसी कहानी लाखों युवाओं को खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं.

*घर से बाहर सीमित खर्चे के बावजूद पदक*

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले की रहने वाली तड़ियाल बहनों का सफर दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से शुरू होकर अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है. हरियाणा की फोगट बहनों की तरह ही खेल जगत में 'तड़ियाल सिस्टर्स' के नाम से मशहूर इन चार बहनों के पौड़ी में रहने वाले पिता राजेंद्र सिंह तड़ियाल डिफेंस में रहे और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं. मां लाजवंती तड़ियाल भी पौड़ी की ही हैं और एथलेटिक्स से जुड़ी रहीं.

उस दौर में लड़कियों का जूडो और मार्शल आर्ट्स जैसे खेलों में जाना आम बात नहीं थी. लेकिन स्पोर्ट्स बैकग्राउंड वाले इस परिवार ने सामाजिक सोच से ज्यादा अपनी बेटियों के सपनों को महत्व दिया और खेल से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली में शिफ्ट हो गए. अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए स्नेहा तड़ियाल ने बताया कि दिल्ली जैसे शहर में पिता की सीमित कमाई के साथ स्पोर्ट्स को चुनना आसान नहीं था, कई बार हम चारों बहनें दो सौ रुपए लेकर भी घर से बाहर किसी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गए हैं और वहां से पदक जीतकर भी आते थे.

*सुचिका तड़ियाल ने सबसे पहले रास्ता बनाया*

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उन्होंने कम उम्र में ही जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू कर दी थी. बाद में वह आठ बार की राष्ट्रीय जूडो चैंपियन बनीं. कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप और साउथ एशियन गेम्स में भी भारत के लिए पदक जीते.

इसके बाद उन्होंने जू जित्सु और फिर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की तरफ कदम बढ़ाया. ग्रीस में आयोजित JJIF जू जित्सु वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता.

अब वह अंतरराष्ट्रीय MMA सर्किट में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. BRAVE Combat Federation जैसे मंचों पर उतरकर उन्होंने भारतीय महिला फाइटर्स की नई पहचान बनाई है.

उनकी खासियत ग्रैपलिंग और सबमिशन तकनीक मानी जाती है. यही वजह है कि उन्हें भारत की उभरती हुई महिला MMA फाइटर्स में गिना जाता है.

दिल्ली के जूडो मैट से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय फाइट एरीना तक पहुंच चुका है.

*एक और तड़ियाल का शांत स्वभाव लेकिन आक्रामक खेल*

ताइविथा तड़ियाल ने भी जूडो में अपनी अलग पहचान बनाई. उन्होंने 2018 में जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में U-44 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था और इसके बाद 2019 में विशाखापट्टनम इंडिया चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी जीता. 

उनकी फाइटिंग शैली में संतुलन और ग्रिप कंट्रोल को खास माना जाता है. 

*कोचिंग की दुनिया में नाम बना रही एक तड़ियाल सिस्टर*

शालिनी तड़ियाल ने शुरू से ही दिल्ली के जेएलएन स्टेडियम में ट्रेनिंग के दौरान तकनीक और फिटनेस पर लगातार काम किया.

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उन्होंने खेल की तकनिकी बारीकियों पर ज्यादा ध्यान दिया, उन्होंने जापान में हुए एशियन चैंपियनशिप जूनियर में भाग लिया पर वहां शालिनी को कोई पदक हासिल नहीं हुआ. आज वह जूडो कोच के तौर पर स्थापित हैं.

*स्नेहा तड़ियाल ने खेल से वर्दी तक का सफर तय किया*

स्नेहा तड़ियाल ने भी अपनी बड़ी बहनों की तरह जूडो से खेल सफर शुरू किया. पिता राजेंद्र सिंह उन्हें हॉकी का गोलकीपर बनते देखना चाहते थे लेकिन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ट्रेनिंग के दौरान स्नेहा ने प्रतियोगी जूडो में हिस्सा लिया और जुडो के दांवपेंच में परफेक्ट बन गईं. 

उन्होंने 13वीं विश्व सीनियर कुराश चैंपियनशिप 2022 (पुणे, महाराष्ट्र) में +87 किग्रा भार वर्ग में रजत (Silver) पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया था. स्नेहा जिम्नास्टिक में हाथ आजमा रही हैं और उन्होंने खेलो इंडिया (Khelo India) के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों में असंगत बार्स (Uneven Bars) में रजत और फ्लोर एक्सरसाइज (Floor Exercise) में कांस्य पदक जीता है.

इन दिनों स्नेहा तड़ियाल उत्तराखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर सेवाएं दे रही हैं.

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