स्कूल की लैब में मेंढक काटते सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
बचपन से सुना था जान बचाने वाला कोई भगवान नही एक डॉक्टर है मां पापा और खुद के अरमानों को पूरा करता सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
लगभग पांच साल खुद का चेहरा भूल अपने भीतर झांकता , दिल को पत्थर बनाता और छोटे से बहुत-बहुत बड़े होता सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
किसी मां की उम्मीद तो पत्नी का भरोसा, इस टूटे फूटे शरीर को मुश्किल से जोड़ना क्योंकि यहां सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
कुछ पिशाचों से तो पूरी कौम बदनाम होती है फिर भी सीमित संसाधनों में अपना बेहतर देना क्योंकि यहां सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
एक महामारी से भाग रही थी दुनिया पर मुझे था उससे डट कर लड़ना क्योंकि यहां सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
पीपीई किट पहन सांस नही आती है और सामने कई साथियों की सांसे रुक जाती हैं फिर भी खुद का घरबार छोड़ अब बस अस्पताल रहना था क्योंकि यहां सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
प्रेयसी, पत्नी, बेटी, बेटा और पति दुनिया के सारे रिश्ते भूल उन्हें अपना डॉक्टर धर्म निभाना था क्योंकि यहां सवाल लाल नही सफेद कोट का था।
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