Friday, May 14, 2021

और तुमने घर बैठे भोकाल मचा रखा है।

हरिद्वार के अंकित नेगी अपनी शादी के हफ़्ते बाद ही
बांटे घर-घर ऑक्सीजन सिलेंडर और तुमने घर बैठे वाट्सएप यूनिवर्सिटी का अधूरा ज्ञान बांट-बांट भोकाल मचा रखा है।

गंगा किनारे ही ब्लड वॉलन्टियर्स हरिद्वार के शेखर ने दिन-रात प्लाज़्मा की व्यवस्था करने में अपना सर खपा रखा है और तुमने घर बैठे नेटफ्लिक्स पर भोकाल मचा रखा है।

दिया प्लाज़्मा आठवीं बार,  बीवी की डांट और मां की मार पर भी देहरादून के मोहित शेट्टी आज भी ढूंढे प्लाज़्मा डोनर हर बार और तुमने घर बैठे आईपीएल के इंतज़ार में भोकाल मचा रखा है।

डॉक्टर है रेखा, घर से दूर, अकेले, पर हिम्मत बांध अपनी जान हथेली में रख उसने बाराकोट में अब तक सैंकडों को अकेले कोरोना की मार से बचा रखा है और तुमने घर बैठे टीवी पर चलते बेफ़िज़ूल के डिबेटों को देखते हुए भोकाल मचा रखा है।

पर्यावरणमित्र है सूरज, रुद्रपुर में रोज़ सुबह तुम्हारे फेंके मास्कों को ठिकाने लगाता वो रोज़ कोरोना से लड़ता है और तुमने दीदी और मोदी के चटकारों पर घर बैठे भोकाल मचा रखा है।

डटे हैं मज़दूर कड़ी धूप में अब भी किसी आवश्यक कार्य को पूरा करने , अपने बच्चों का पेट भरने और तुमने एसी वाले कमरों में अपने परिवार पर हाथ उठाते भोकाल मचा रखा है। 

याद करो उन वर्दी वालों को जिन्होंने अपनों के हाथ खींचने पर जलती चिताओं पर भी अपना हाथ लगा रखा है और तुमने राधे की शानदार ओपनिंग पर जश्न मना भोकाल मचा रखा है।

कैसे भूल गया वंदे मातरम ग्रुप हल्द्वानी को मैं जिन्होंने इस महामारी में भी थरथराते हाथों से मदद मांगने वाले लोगों की उम्मीदों को जिंदा रखा है और तुमने अब भी राजनीति के दांवपेंचों पर चर्चा करते भोकाल मचा रखा है।

हिमांशु।

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