देश में "डिजिटल डिवाइड" पर प्रकाश डालते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा,"आप डिजिटल इंडिया, डिजिटल इंडिया कहते रहते हैं, लेकिन आप जमीनी हकीकत से अवगत नहीं हैं।"
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पूछा "आप निश्चित रूप से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, लेकिन आप डिजिटल डिवाइड का जवाब कैसे देंगे? आप उन प्रवासी मजदूरों के सवाल का जवाब कैसे देते हैं, जिन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य जाना है? झारखंड के एक गरीब कार्यकर्ता को एक आम केंद्र में जाना पड़ता है "
हिंदी लाइव लॉ डॉट इन के अनुसार सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि किसी व्यक्ति को दी जाने वाली खुराक की संख्या, टीके के प्रकार और व्यक्ति की पात्रता मानदंड पर नज़र रखने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल में पंजीकरण कराना आवश्यक है। केंद्र ने यह भी कहा है कि बिना डिजिटल पहुंच वाले लोग टीके के पंजीकरण के लिए गांव के कॉमन सेंटर, दोस्तों, परिवार या गैर सरकारी संगठनों की मदद ले सकते हैं।
टीकाकरण पर ज़मीनी हकीकत
दिल्ली में सरकार द्वारा कहे इस वक्तव्य की जांच के लिए हमने वहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तराखंड में जमीनी स्तर पर कुछ सच्चाई परखी, जिससे हमें इतने हो-हल्ले के बीच चल रहे इस टीकाकरण के बारे में कुछ ज़मीनी हकीकत जानने के लिए मिले।
देहरादून के चकराता ब्लॉक स्थित गांव मशक के मातवर सिंह कहते हैं कि अभी तक गांव से छह सात किलोमीटर दूर कोटी कनासर में टीकाकरण कैम्प लग रहा था जहां खुद पंजीकरण न करा सकने वालों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था थी ,वहां दिन में 100-150 लोगों का ही टीकाकरण सम्भव हो पा रहा था जबकि 300-350 लोग टीकाकरण के लिए आ रहे थे। अब आशा कार्यकर्ताओं की ओर से बताया जा रहा है कि हर ग्राम सभा में प्रतिदिन 100 लोगों का टीकाकरण होगा, जिसमें टीकाकरण केंद्र में ही पंजीकरण की सुविधा होगी।
काम न मिलने की वज़ह से खीरी, उत्तर प्रदेश के छोटूराम अपने दो साथियों के साथ हरिद्वार से वापस घर लौटते दिखते हैं। टीके और उसके लिए अनिवार्य पंजीकरण के बारे में सवाल करने पर वह अपना फोन दिखाते हुए कहते हैं कि वह सब टीका लगाना तो चाहते हैं पर उनके लिए इसकी ऑनलाईन प्रक्रिया समझनी मुश्किल है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोशनाबाद अभी कोरोना परीक्षण से आगे ही नही बढ़ पाया है वहां कम्पनियों से आए श्रमिक कड़ी धूप में कोरोना परीक्षण के लिए पंक्तिबद्ध दिखे।
सामुदायिक केंद्र रोशनाबाद जाने पर पता लगा कि टीकाकरण कैम्प राजकीय प्राथमिक विद्यालय रोशनाबाद में लगा है, वहां पहुंचने पर उत्तर प्रदेश बुलंदशहर के राजेंद्र प्रसाद अपने साथी दलवीर सिंह के साथ विद्यालय के मुख्यद्वार पर ही मिल गए, वह दोनों टीका लगाने आए थे। अपनी प्राइवेट कंपनी के ज़ोर देने पर दोनों टीकाकरण के लिए आए तो थे पर दोनों के मन में टीकाकरण को लेकर शंका भरे सवाल थे।
दोनों ने अपना टीका पंजीकरण कैम्प में ही उपलब्ध लैपटॉप पर करवाया था।
आसपास पूछने पर पता चला कि बहुत कम लोग टीकाकरण के लिए सामने आ रहे हैं ।
मेरी सरकार वेबसाइट पर हरिद्वार में अपने पिनकोड पर 18+ के लिए भुगतान हो या मुफ़्त विकल्प दोनों पर कोवेक्सिन टीका उपलब्ध नही था।
वहीं कोविशील्ड टीका मुफ़्त में तो उपलब्ध नही था पर भुगतान पर इसके 1428 टीके उपलब्ध थे।
जनता को मुफ्त टीके दिए जाने का दावा ठोकने वाली सरकार के ऐसे अदृश्य मुफ़्त टीके जनता के लिए कितने उपयोगी हैं यह तो सरकार ही जानें जबकि अपने देश में टीकों की होने वाली जरूरत का गलत अनुमान लगा विदेशों में टीके भेजने और अपने हक के टीके विदेश भेजने पर सवाल उठाने के बाद कठघरे में खड़े करने वाली बात तो यहां की ही नही गई है!
बिना पंजीकरण भी टीकाकरण शुरू करने की मांग








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