Monday, September 13, 2021

पेट भरती भी नही और भूखा मारती भी नही हिंदी

क्या तुम्हें पता है रक्त के लाल रंग से सिंचित है हिंदी,
क्रांति के दौर की अहम भाषा रही है हिंदी।

हिंदुस्तानी होने का प्रतीक है हिंदी,
उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम हर दिशा की गूंज लिए है हिंदी।

अंग्रेज़ी के इस दिखावटी दौर में पेट भरती भी नही और भूखा मारती भी नही हिंदी।

कभी अटल तो कभी मोदी का भाषण है हिंदी,
जो बिकता है उसका अहम जरिया है हिंदी।

सा रे गा मा पा में छुपा हुआ संगीत है हिंदी।

तुतली जबानों से पहला शब्द है हिंदी,
कल के भारत का भविष्य है हिंदी।

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