Friday, June 10, 2022

मेरी जन्मभूमि धुंआ धुंआ न होती.

मेरी जन्मभूमि धुंआ धुंआ न होती.

खाने को रोटी होती
भूखे बच्चों की मां न रोती
उनकी मदिरा से कमाई न होती
आज मेरी जन्मभूमि धुंआ धुंआ न होती.

कम न रहने की ये जगह लगती
इंसान की लालच पर लगाम होती
पेड़ काट-काट कर, सूखी न ये जमीन होती
आज मेरी जन्मभूमि धुंआ धुंआ न होती.

हाथों में पत्थर की जगह क़लम होती 
धर्म की नली सर में न फंसी होती
सब की मुहब्बत भरी जुबां होती
आज मेरी जन्मभूमि धुंआ धुंआ न होती.

सत्ता की न ये मस्ती होती
जो गिर जाए न वो हस्ती होती
जमाने भर में न थू थू होती
आज मेरी जन्मभूमि धुंआ धुंआ न होती.

हिमांशु जोशी.

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