कौन हो तुम मेरे लिए
उस हरे भरे मैदान में
तुम्हारे करीब था, तब ही कह लेता.
तुम ही स्वप्न हो, तुम ही वर्तमान
तुम ही मेरे दिल में हो, तुम ही जीवन.
काश कि मैं लिख पाता
कौन हो तुम मेरे लिए
उस दिन जब तुम दूर जाने लगे थे,
काश रोक लेता तुम्हें
कर लेता हिम्मत दुनिया से लड़ने की
पर सोचा नही था के चली ही जाओगी तुम
काश कि मैं लिख पाता
कौन हो तुम मेरे लिए
आज भी तुम याद करती हो
क्या सच में मुझे प्यार करती हो!
गोद में जब उसे अपनी खिलाती हो,
चेहरा मैं कभी तुमसे मिला लेता हूं, कभी-कभी अकेले आंसू भी बहा लेता हूं।
काश कि मैं लिख पाता
कौन हो तुम मेरे लिए
बस इंतज़ार है,
इस पार, जीवन के आखिरी छोर में भी
वही विश्वास जो कहता है
तुम सब कुछ हो मेरे लिए..
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