Monday, September 12, 2022

गीतों और वीएफएक्स के लिए याद रखा जाएगा ये 'ब्रह्मास्त्र'

अमिताभ बच्चन की दमखम वाली आवाज के साथ शुरु हुई फिल्म , रणवीर कपूर के जरिए दर्शकों को ब्रह्मास्त्र से जुड़ी एक काल्पनिक दुनिया में ले जाती है। फिल्म की कहानी बॉलीवुड के उसी पुराने फॉर्मूले पर आधारित है जहां एक गरीब नायक, अमीर नायिका के साथ अपने जीवन में कुछ अलग करता है। जिसकी वजह से वह फिल्म के खत्म होने तक दर्शकों का हीरो कहलाता है।
 बॉलीवुड के इसी पुराने फॉर्मूले के अंदर ब्रह्मास्त्र फिल्म में तकनीक का मिश्रण कर दिया गया है, जो देखने में नया है और शायद बॉलीवुड के दर्शक हॉलीवुड की फिल्मों में ये सब देखने के बाद अपनी फिल्मों में भी इसे अच्छी गुणवत्ता के साथ सालों से देखना चाहते थे।

वानर अस्त्र के साथ शाहरुख खान की छलांग वाला दृश्य वीएफएक्स के जादू का असर है। यह ब्रहास्त्र फिल्म को किसी भी बड़ी हॉलीवुड फिल्मों के बराबर ले आता है।

ब्रह्मास्त्र फिल्म वीएफएक्स के अपने प्रयोग के साथ अपने गीतों के लिए याद की जाएगी। 

निर्देशक अयान मुखर्जी ने जब भी रणवीर को लेकर फिल्म बनाई है, उसके गाने दर्शकों की जुबां पर हमेशा से चढ़ते आ रहे हैं। साल 2009 में आई 'वेक अप सिद' और साल 2013 की 'ये जवानी है दीवानी' इसकी उदाहरण हैं। 
लाजवाब बैकग्राउंड म्यूज़िक वाली फिल्म ब्रह्मास्त्र के गाने हिंदी और तेलुगु भाषा में यूट्यूब पर धमाल मचा रहे हैं। 'केसरिया' गीत को सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है तो 'देवा देवा' भी कम नही है, इसे अभी शुरु हुए इस सीजन के इंडियन आइडल में बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर भी सुना गया है। 'डांस का भूत' गाना अपनी कोरियोग्राफी के लिए हिट हो रहा है। 
इस गाने में ही रणवीर का रावण के पुतले के आगे आने वाला दृश्य फिल्म के शानदार छायांकन की एक झलक है। एक ऐसा ही दृश्य जिसमें वाराणसी में गंगा किनारे खड़ी नाव के पीछे दीए जल रहे हैं, दर्शकों का मन मोह लेता है।

रणवीर, आलिया और मौनी ने किया प्रभावित

रणवीर कपूर फिल्म की शुरुआत से ही अपने किरदार में डूबे हुए लगते हैं, एक साधारण व्यक्ति से कई सारी शक्तियों को प्राप्त करने वाले सुपरहीरो के सफर को उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ निभाया है। आलिया भट्ट कैमरे के सामने अपने चेहरे के भावों को कुछ इस तरह प्रकट करती हैं कि वह दर्शकों के दिल में कब उतर जाती हैं, दर्शकों को इसका पता भी नही चलता।
छोटे पर्दे से बड़े पर्दे का सफर तय करने वाली मौनी रॉय एक नकारात्मक किरदार के रूप में कई बार अपने सामने खड़े कलाकार पर भारी पड़ी हैं।
 अमिताभ बच्चन हर फिल्म में अपने संवादों के जरिए ही असर छोड़ते आए हैं पर यहां उनके लिए अच्छे संवादों का न होना ही उन्हें साधारण बनाता है, नागार्जुन और डिंपल कपाड़िया को कैमरे पर कम ही वक्त मिला है पर जितना मिला उसके लिए वह याद रहते हैं।

फिल्म के एक्शन सीन दर्शकों को फिल्म देखते मुट्ठी भींच देने पर मजबूर कर देंगे। फिल्म में कलाकारों द्वारा पहने गए परिधान अच्छे लगते हैं और खासतौर पर आलिया भट्ट बहुत ही खूबसूरत लगी हैं।

संवाद औसत तो पटकथा लेखन में भी कुछ कमी रह ही गई

फिल्म का संवाद लेखन, औसत कहा जा सकता है। शाहरुख द्वारा बोला गया संवाद 'वो शिकार ही क्या जिसमें थोड़ा शोर न हो' ठीक है तो अमिताभ द्वारा बोला गया संवाद 'एक आदमी की पहचान उसके हुलिए से नही होती, अंदर की शक्ति से होती है' औसत ही है।
'लाइट को समझा नही जाता बस महसूस किया जाता है' संवाद फिल्म के साधारण संवादों का एक और उदाहरण है।

ब्रह्मास्त्र के पटकथा लेखन में काफी रिसर्च किया गया होगा। पात्रों और अस्त्रों के नाम पर, उन अस्त्रों के काम पर खूब शोध किया हुआ लगता है। 
इस काल्पनिक दुनिया को बुनते समय आलिया और रणवीर के बीच का रिश्ता इस तरह लिखा गया है कि यह दर्शकों को कभी-कभी उबाने लगता है। आलिया भट्ट के किरदार को बिना ज्यादा सोचे समझे प्रेम के प्रति इतना समर्पित दिखाना ,आज की पीढ़ी के दर्शकों को इतना ज्यादा समझ नही आएगा। दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है, जब यह फिल्म 2019 में रिलीज होनी थी तब शायद इस बिना सोचे समझे वाले प्रेम समर्पण को पचाना आसान होता पर आज नही।

रणवीर मोह की वजह से अन्य पात्र कहीं खो गए

अगर हम इस फिल्म के पात्रों की सीधी तुलना हॉलीवुड की मशहूर श्रृंखला 'अवेंजर्स' के साथ कर दें तो दर्शक अवेंजर्स के हर पात्र से एक रिश्ता सा महसूस करते हैं पर ब्रह्मास्त्र में निर्देशक अपने रणवीर कपूर मोह से बाहर नही निकल पाए। अमिताभ बच्चन, नागार्जुन, डिंपल कपाड़िया, आलिया भट्ट जैसे बड़े कलाकारों के द्वारा निभाए गए पात्र इसी वजह से दर्शकों की पसंद नही बन पाते। फिल्म के अगले भाग 'देव' में हम फिल्म मेकर्स द्वारा इस क्षेत्र में बेहतरी की उम्मीद रख सकते हैं।

हिमांशु जोशी
@himanshu28may

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