Thursday, September 8, 2022

सड़क पर उतरने की गम्भीरता समझनी होगी।

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की कार एक्सीडेंट में हुई मौत से हमारे समाज में सड़क सुरक्षा पर रहने वाली चुप्पी कुछ दिनों के लिए टूटी है.

इस दुर्घटना पर केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के मुख्य वैज्ञानिक एस वेलमुरुगन ने पीटीआई-भाषा को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "राष्ट्रीय राजधानी में कुछ हिस्सों में सड़क के डिजाइन में असंगति देखी जा सकती है. जिसमें पूर्वी और पश्चिमी एक्सप्रेसवे, बाहरी रिंग रोड और रिंग रोड शामिल हैं. मिसाल के लिए, कुछ बिंदुओं पर 6-लेन की सड़क 4-लेन में सिमट जाती है. विभिन्न स्थानों पर असमान सतहों को भी देखा जा सकता है. ये मुद्दे वाहन चलाने के दौरान खतरा पैदा करते हैं और इन्हें दूर किया जाना चाहिए."
 उन्होंने आगे कहा कि रविवार की दुर्घटना से तीन अहम बातें निकलती हैं कि सड़कों, विशेष रूप से राजमार्गों को सुसंगत तरीके से बनाया जाना चाहिए.
सड़क पर पर्याप्त संकेत चिह्न होने चाहिए और पीछे बैठे व्यक्ति के लिए सीट बेल्ट पहनने के कानून को लागू किया जाना चाहिए.
वेलमुरुगन ने पीछे बैठे व्यक्ति को सीट बेल्ट पहनने और शहर की सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनों को सख्ती से लागू करने का भी आह्वान किया.


इस दुर्घटना के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है कि कार में बैठने वाले सभी लोगों के लिए अब सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य होगा. ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा.  उन्होंने यह भी बताया कि इसे लेकर उनके मंत्रालय की तरफ से अगले दो तीन दिन में एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया जाएगा.

साइरस मिस्त्री की मृत्यु के बाद फिर से ध्यान खींचती सड़क दुर्घटनाएं

भारतीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में सड़क हादसों पर जारी किए गए आंकड़ों से इन हादसों की भयावहता का अनुमान लगाया जा सकता है. इनके अनुसार वर्ष 2018 में लगभग डेढ़ लाख लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवायी थी.

सड़क पर वाहन चलाने की बात हो तो सीधी सड़क को सबसे सुरक्षित माना जाता है पर इन आंकड़ों के अनुसार मरने वाले डेढ़ लाख लोगों में से 97 हज़ार चालकों ने सीधी सड़क पर ही अपनी जान गंवाई थी.
 तमिलनाडु, कर्नाटक और हरियाणा में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए थे.
सड़क हादसों में मरने वाले 85 फीसदी पुरुष थे.

सीट बेल्ट न पहनने के अलावा भी सड़क हादसों के हैं बहुत से कारण.

पुलिस द्वारा सड़क कानून का सख्ती से पालन ना करवाए जाने की वजह से कई नाबालिग सड़क पर खतरनाक तरीके से वाहन चलाते दिखते रहते हैं, कई लोग बगैर हेलमेट और दोपहिया वाहन में तीन सवारी चलते हैं. ये खुद के साथ दूसरों की जान के लिए भी खतरा बन जाते हैं.
वाहनों का अपनी लेन में न चलना वाहन दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों में शामिल है.

ड्राईविंग लाइसेंस मिलने की आसान प्रकिया सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है. इस वजह से अप्रशिक्षित वाहन चालक सड़क पर उतर कर अन्य वाहनों के लिये खतरा बन जाते हैं.

हमारे देश की सड़कों पर अपनी समयावधि पार कर चुके कामचलाऊ वाहन भी बेरोकटोक दौड़ रहे हैं. सामान लादने के साथ इनमें से बहुत से वाहनों का प्रयोग सवारियों को ढोने के लिए भी किया जाता है, जो बहुत ही खतरनाक है.
सड़कों पर अतिक्रमण के साथ सड़कों की खराब गुणवत्ता के कारण बने गड्ढे भी इन हादसों के लिए जिम्मेदार हैं.

हाल ही के दिनों में सड़क पर आवारा पशुओं की वजह से सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है, अकेले हरियाणा में ही पिछले पांच सालों के अंदर आवारा पशुओं की वजह से लगभग 900 लोगों ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाई. आवारा पशुओं के गले में रेडियम पट्टी बांधकर और वाहनों की गति नियंत्रित रख इन दुर्घटनाओं पर कुछ हद तक लगाम लगाई जा सकती है.

सड़क पर बनी लाइनों के बारे में नही जानते बहुत से चालक


सड़क पर गाड़ी दौड़ा रहे अधिकतर चालकों को सड़क पर बनी पीली और सफेद लाईनों की सही जानकारी नही होती है. यह लाइनें क्षेत्र की आबादी और सड़क की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रख कर बनाई जाती हैं.



सड़क पर टूटी सफेद लाइनों का अर्थ होता है कि यदि सुरक्षित है तो आप उस पर लेन बदल सकते हैं, ओवरटेक कर सकते हैं और यू टर्न ले सकते हैं.



लम्बी सफेद लाइन का अर्थ है कि आप उस सड़क पर ओवर टेक नही कर सकते और ना ही आप वहाँ यू टर्न ले सकते हैं.



टूटी पीली लाइन का मतलब है कि आप इस लाइन पर सावधानी के साथ ओवरटेक और यू टर्न ले सकते हैं.

लम्बी पीली लाइन में आप दूसरी गाड़ियों को ओवरटेक तो कर सकते हैं पर पीली लाइन को पार करना मना होता है. यह नियम अलग-अलग राज्यों के लिये अलग-अलग भी हैं.

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के अन्य उपाय.

बढ़ते औद्योगीकरण व सुधरते जीवन स्तर ने निजी वाहनों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से इज़ाफ़ा किया है और इसी वजह से अब जनता द्वारा सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग कम किया जाता है.
 वर्ष 2018 के आंकड़ों से पता चलता है कि सार्वजनिक वाहनों में दोपहिया और हल्के वाहनों से दुघर्टना का खतरा कम होता है.

  साइकिल में चलने वालों के लिए पुरे भारत में चंडीगढ़ की तर्ज़ पर अलग लेन बनायी जा सकती हैं.
 
नियम में सख्ती लाने से कार में तो सीटबेल्ट लग जाएगी पर जो लोग प्राइवेट व सरकारी बस में ही घर से आना-जाना करते हैं, उनके लिए भी बसों में सुरक्षा उपाए लगवाना अनिवार्य करवाना होगा.

हिमांशु जोशी
@himanshu28may

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