Tuesday, March 18, 2025

the ranveer show: माइक्रोफोन से मोटी कमाई तक की कहानी, जानिए कैसे बदल रही है डिजिटल आवाज़ों की दुनिया.

रणवीर अल्लाहबादिया विवाद के बाद 'पॉडकास्ट' चर्चा में है और रील्स के दिनों में यह आजीविका चलाने का नया जरिया बनकर सामने आया है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में रणवीर अल्लाहबादिया को आंशिक राहत देते हुए उन्हें कुछ शर्तों के साथ अपना पॉडकास्ट 'द रणवीर शो' फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी. यह फैसला रणवीर अल्लाहबादिया की उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने पॉडकास्ट को जारी रखने की अनुमति मांगी थी, रणवीर ने कहा था कि यह उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर 'किस्सागोई' के नए मुकाम तक

'पॉडकास्ट' शब्द आज से पंद्रह साल पहले लोगों के लिए नया था पर अब लोग इसे अपनी आजीविका का जरिया बनाने लगे हैं, इस बारे में हमने कुछ लोगों से बातचीत की पर इससे पहले 'पॉडकास्ट' को समझें तो यह एक डिजिटल ऑडियो या वीडियो कंटेंट सीरीज़ होती है, जिसे इंटरनेट के माध्यम से कभी भी डाउनलोड या स्ट्रीम किया जा सकता है. पॉडकास्ट को Spotify, Apple Podcasts, या YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है.

यह लोगों में इसलिए लोकप्रिय है क्योंकि स्मार्टफोन्स के माध्यम से लोगों तक आसानी से इसके जरिए ज्ञान या मनोरंजन की पहुंच बन रही है.

साल 2007 के दौरान भारत में जब लोग पॉडकास्ट को जानते भी नही थे, तब कला जगत के कुछ महत्वपूर्ण लोगों द्वारा 'रेडियो प्लेबैक इंडिया' पॉडकास्ट की शुरुआत की गई थी. इसके बारे में बात करते इसके फाउंडिंग मेम्बरों में से एक सजीव सारथी कहते हैं कि हमने साल 2007 में 'रेडियो प्लेबैक इंडिया' नाम से पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म बनाया था तब दिक्कत यह होती थी लोगों को पता नही होता था कि इसे चलाया कैसे जाए. आज का 'हिन्द युग्म' प्रकाशन तब एक साहित्यिक ग्रुप था, इसके एक भाग के तौर पर ही रेडियो प्लेबैक इंडिया की शुरुआत की गई थी. सजीव बताते हैं विविध भारती के जाने-माने उद्घोषक यूनुस खान जैसे बड़े नाम तब हमसे जुड़े थे. स्पॉटीफाई और इस तरह के अन्य एप आने के बाद हिंदी साहित्य, कहानी सुनाने वालों को अच्छा पैसा मिलने लगा. रेडियो प्लेबैक इंडिया ने भी कुछ समय मेंटज़ा एप के साथ काम किया.

 सजीव कहते हैं इन दिनों रील्स में कविताएं, कहानियां सुनना ट्रेंडिंग है और जिसके पास दमदार आवाज़ है और उसे पहचान मिलने लगे तो आप पॉडकास्ट में अच्छा पैसा कमा सकते हैं. 

माइक्रोफोन ने बदली जिनकी ज़िंदगिया

मुरादाबाद की रहने वाली रिचा शर्मा कहती हैं कि बेटे और बेटी को जन्म देने बाद परिवार को समय देने के लिए उन्होंने स्कूल पढ़ाना छोड़ दिया था, बच्चों के बड़े होने पर उन्होंने फिर से अपने कैरियर के बारे में सोचा और वह साल 2022 में 'मेन्टज़ा' एप से जुड़ीं. मेन्टज़ा में वह 9 पॉडकास्ट चैनलों से जुड़ी थीं और सोशल मीडिया रिप्रेजेंटेटिव के पद पर रहीं. इसके साथ वह 'रेडियो प्लेबैक इंडिया' के साथ भी काम करती रही हैं, इन दिनों रिचा 'किस्साठेल' रेडियो ड्रामा चैनल से जुड़ी हैं. रिचा कहती हैं कि वह आने वाले समय में अपने पति के साथ उनके व्यापार में हाथ बंटाते हुए पॉडकास्ट की दुनिया में भी आगे बढ़ना चाहती हैं, उन्हें पॉडकास्ट में अपना बेहतर भविष्य दिखाई देता है.


सुप्रिया पुरोहित को पॉडकास्ट से उम्मीद तो शतदल रेडियो से पॉडकास्ट की दुनिया में सक्रिय प्रज्ञा

सुप्रिया पुरोहित इन दिनों दिल्ली में रहती हैं. साल 2019 में उन्होंने 'रेडियो प्लेबैक इंडिया' पॉडकास्ट में 'कविता जंक्शन' प्रोग्राम शुरू किया था. कविता जंक्शन को अब उन्होंने रजिस्टर करवा लिया है और उसकी वेबसाइट बना कर उन्होंने अभी 'वाग्मी' नाम से पत्रिका भी निकाली है. इस वेबसाइट में पॉडकास्ट, ऑडियो बुक्स के साथ काफी कुछ देखा जा सकता है. सुप्रिया कहती हैं कि कविता जंक्शन के बेहतर भविष्य की उन्हें बहुत उम्मीदें हैं, सब उम्मीदों के मुताबिक रहा तो वह कुछ सालों बाद पॉडकास्ट की दुनिया का जाना पहचाना नाम होंगी.


मुंबई की प्रज्ञा मिश्रा कहती हैं कि साल 2018 में उन्होंने 'शतदल रेडियो' की शुरुआत की थी. इसमें वह सामाजिक विषयों पर बात करने के साथ कविताएं पढ़ती हैं, यह स्पॉटीफाई और यूट्यूब पर है. प्रज्ञा कहती हैं मुझे किताबें पढ़ने का शौक है और शतदल रेडियो पर मैं किताबों की समीक्षा भी करती हूं, पॉडकास्ट से उनकी छिटपुट आय होते रहती है. प्रज्ञा आगे कहती हैं कि अपने दोनों बच्चों को पढ़ाने के साथ वह अपने पति की क्लास 'बेंचमार्क ट्यूटोरियल' पर भी लगातार एक्टिव रहती हैं, वह वहां हिंदी और बायोलॉजी पढ़ाती हैं. अपने काम के साथ पॉडकास्ट करते हुए वह खुश हैं.

पायल गुप्ता. 

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