Tuesday, June 24, 2025

ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका पर उसका असर

ईरान का परमाणु कार्यक्रम रक्षा से अधिक आक्रामक मंसूबों और घरेलू राजनीति से प्रेरित है. शासन चरमपंथी इस्लामवाद के सहारे सत्ता को मजबूत करता है, जिसके लिए बाहरी दुश्मन की कहानी गढ़ता है. परमाणु हथियार ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने और आक्रामक नीतियां थोपने की ताकत देंगे. इससे अमेरिकी नीति को नए सिरे से सोचने की जरूरत है.

परमाणु कार्यक्रम की असल मंशा

ईरान का परमाणु कार्यक्रम मध्य पूर्व की शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा सवाल है. क्लिफ्टन डब्ल्यू. शेरिल की रिसर्च Why Iran Wants the Bomb and What it Means for US Policy के अनुसार यह कार्यक्रम रक्षात्मक जरूरतों से नहीं, बल्कि आक्रामक लक्ष्यों और घरेलू राजनीति से प्रेरित है. 
शासन अपनी निरंकुश सत्ता को चरमपंथी इस्लामवाद के सहारे बनाए रखता है, जिसके लिए बाहरी दुश्मन की छवि जरूरी है. परमाणु हथियार शासन को आक्रामक नीतियां चलाने और सत्ता को पक्का करने का हथियार देता है.

रक्षात्मक तर्कों का खोखलापन

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रक्षात्मक बताने वाले दावे कमजोर हैं. शेरिल की स्टडी के मुताबिक, 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद इराक का खतरा खत्म हो गया. सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की या पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश ईरान के लिए सैन्य खतरा नहीं हैं. इजरायल या अमेरिका का खतरा भी ईरान की भड़काऊ बयानबाजी से ज्यादा उपजता है. ऐसे में परमाणु हथियार शासन की आंतरिक वैधता और कथित दुश्मन की कहानी को जिंदा रखने के लिए हैं.

शासन की आंतरिक संरचना और दुश्मन की जरूरत

ईरान का इस्लामी गणतंत्र चरमपंथी शिया इस्लाम पर टिका है, जो धर्म और सत्ता को अलग करने से इंकार करता है. शेरिल के विश्लेषण में, सर्वोच्च नेता और मौलवी अल्लाह की इच्छा का दावा कर सत्ता को मजबूत करते हैं. यह शासन अमेरिका जैसे बाहरी 'दुश्मन' की कहानी गढ़कर अपनी सत्ता को सही ठहराता है. परमाणु हथियार इस कहानी को ताकत देते हैं, जिससे शासन बिना डर के आक्रामक नीतियां चला सकता है.

परमाणु ईरान का क्षेत्रीय खतरा

शेरिल की रिसर्च बताती है कि परमाणु हथियार मिलने पर ईरान की विदेश नीति और आक्रामक हो जाएगी. यह हिजबुल्लाह, हमास जैसे आतंकी समूहों को और समर्थन देगा, जिससे लेबनान या फिलिस्तीन में अस्थिरता बढ़ेगी. स्थिरता-अस्थिरता विरोध के चलते परमाणु हथियार बड़े युद्ध को रोक सकते हैं, लेकिन छोटे-मोटे संघर्ष और प्रॉक्सी युद्धों को हवा देंगे. क्षेत्रीय देश ईरान की ताकत के आगे झुक सकते हैं या परमाणु हथियारों की दौड़ में कूद सकते हैं.

प्रसार का खतरा और सुरक्षा चुनौतियां

शेरिल के पेपर के अनुसार, ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने से सऊदी अरब, तुर्की जैसे देश भी इस दौड़ में शामिल हो सकते हैं. इससे मध्य पूर्व में हथियारों की होड़ मचेगी. आकस्मिक विस्फोट, चोरी या आतंकियों के हाथों परमाणु सामग्री पहुंचने का खतरा बढ़ेगा. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में चरमपंथी तत्व इस जोखिम को और गंभीर बनाते हैं. यह क्षेत्र वैश्विक अस्थिरता का केंद्र बन सकता है.

अमेरिकी नीति पर असर और चुनौतियां

शेरिल का विश्लेषण कहता है कि ईरान की आक्रामक मंशा के चलते कूटनीति से समाधान मुश्किल है. अगर ईरान परमाणु हथियारों से लैस हो जाता है, तो क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवाद बढ़ेगा, जिससे अमेरिकी प्रभाव कमजोर पड़ सकता है. अमेरिका को मध्य पूर्व नीति पर नए सिरे से विचार करना होगा. कूटनीति के अलावा निवारक उपाय, रोकथाम या सैन्य कार्रवाई जैसे कठोर कदमों पर सोचना पड़ सकता है, जिनका अपना अलग जोखिम है.

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