Friday, November 7, 2025

हरीश रावत

● उत्तराखंड को बने 25 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन राज्य आज भी पलायन, बेरोज़गारी और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। आपको क्या लगता है, राज्य किस मोड़ पर खड़ा है और क्या यह अपने उद्देश्य में सफल हुआ है?

हरीश- उद्देश्य था राज्य का हर घर को खुशहाल करना और हर घर तक मौलिक सुविधाएं जो एक आम व्यक्ति के जीवन के लिए आवश्यक हैं उन्हें उपलब्ध कराना. प्रयास है और कुछ क्षेत्रों में हम आगे भी बढ़े हैं, मगर हम अभी लक्ष्य से काफी दूर हैं. पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की चिंताजनक स्थिति, शिक्षा के स्तर में निरंतर आ रही गिरावट। नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता में भी गिरावट आ रही, साथ साथ कानून व्यवस्था की स्थिति में गिरावट आ रही है। हमारे लिए चिंता के बहुत से कारण हैं। पलायन को एक ही मन्त्र से नियंत्रित किया जा सकता है, जिसका अनुसरण 2014 से 2017 के प्रारंभ तक तत्कालीन सरकार ने किया।



● अगर आज आपको मौका मिले, तो किन कामों को आप तुरंत प्राथमिकता देंगे?

हरीश- मैं सर्वप्रथम उन सैकड़ों पहलुओं को फिर से जोड़ूंगा जिनको 2017 के प्रारंभ तक हमारी सरकार ने शुरू किया था, दूसरा काम ये करूँगा कि उसके आगे कैसे अन्य पहलुओं को इनके साथ जोड़ूंगा, जिससे हमारी पहलों के सार्थक निष्कर्ष आ सके।
मेरा मानना है कि देहरादून से उत्तराखण्ड के दर्द को नही समझा जा सकता , हमें कहीं न कहीं हिमालयी परिवेश में बैठ कर के राजकाज चलाना पड़ेगा। मैं उस दिशा में भी राज्यव्यापी सहमति बनाकर उस दिशा में काम करूंगा। शिक्षा के सुधार, जिसमें तकनीकी शिक्षा भी सम्मिलित है, उस पर संपूर्ण शक्ति लगाऊंगा।
शिल्प के उन्नयन की एक पूरी श्रंखला प्रारंभ करूँगा ताकि हम उन्नत और अपने मौलिक शिल्प के साथ आधुनिक तकनीक को जोड़कर, शिल्प को अपनी आय का बड़ा आधार बना सकें।
पर्यटन को पूर्णतः एक नई दृष्टि देने का काम किया जाएगा ताकि पर्यटन के क्षेत्र में कुछ अविनव शुरूआतें प्रारंभ हो सकें

● उत्तराखंड बार-बार आपदाओं का सामना कर रहा है । क्या आपको लगता है कि राज्य विकास की दौड़ में पर्यावरणीय संतुलन खो चुका है?

हरीश- एकदम इस निष्कर्ष पर पहुंचना भी उचित नही होगा।
जलवायु परिवर्तन आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या है और जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक दुष्प्रभाव इस समय मध्य हिमालय राज्यों को झेलना पड़ रहा है। इस सन्दर्भ में राष्ट्रीय नीति के साथ मध्य हिमालयी नीति का सामंजस्य स्थापित करना पड़ेगा और पर्यावरण पहलुओं पर राज्यों को पूरी तरह संवेदनशील होना चाहिए।


● कांग्रेस लगातार राज्य में सत्ता से बाहर है। क्या कारण आपको लगता है कि कांग्रेस की जनता से दूरी बन रही है!

हरीश- 
समय का चक्र है, वह इस समय भाजपा के पक्ष में है। हम राहुल गांधी के नेतृत्व में उस चक्र को अपनी दिशा की तरफ मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी सफलता भारत, लोकतंत्र और आमजन के हित में है।

● आने वाले वर्षों में आप खुद को किस भूमिका में देखते हैं, सक्रिय राजनीति में या एक मार्गदर्शक की तरह!

हरीश- भूमिका का निर्धारण पार्टी नेतृत्व करता है, व्यक्ति को अपने को तैयार रखना पड़ता है।
हां, मैं एक उत्साहवर्धक के रूप में अर्थात ढोल बजाकर उत्साहित करने वाले के रुप में अपनी भूमिका को देखना चाहूंगा। हमारे पास बहुत अच्छे नेता हैं और उन नेताओं को उत्साहित करना मेरा कर्तव्य है।

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