पुणे पहुंचने पर मुझे भी मुंगली जी में पहाड़ की मिट्टी का असर दिखा। ऐसा अपनत्व जैसा हम सालों से एक दूसरे को जानते हों, डायरी में मुझे कहां जाना है और कब जाना है सब पहले से ही नोट किया हुआ था।
सेना के अनुशासन ने मुंगली जी को गढ़ा, दिल्ली और दुनिया की यात्राओं ने उनकी दृष्टि खोली। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। लेकिन इन सबके भीतर एक और तत्व है जो उनके व्यक्तित्व को पूर्णता देता है। वह है सेवा का स्वभाव और यह कोई सीखा गया गुण नहीं, बल्कि इसे उन्होंने खुद जिया है, सेवा की भावना का उनके अंदर खुद ही विकास होता चला गया।
पहाड़ों में पले-बढ़े लोगों का मन प्रकृति जैसा होता है। खुला, साफ और निश्छल। वहाँ दिखावा नहीं चलता, सहजता चलती है। दूसरों के काम आना पहाड़ियों की फितरत में शामिल है। यह गुण मुंगली जी में बचपन से रहा। उनके परिवार में भी यही परंपरा थी। उनके लिए सेवा केवल कर्तव्य नहीं, जीवन का अंग रही है।
मुंगली जी कहते हैं कि उनके लिए समाज सेवा, रोजगार के अवसरों के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य भी प्रमुख है। वह चाहते हैं कि पहाड़ में सभी गांवों का विकास हो, हर व्यक्ति अपने गांव में आत्मनिर्भर हो। विदेश में बहुत से पूंजीपति लोगों के साथ मेरे आत्मीय संबंध हैं, जो मुझपर भरोसा करते हैं। मुझमें क्षमता है कि मैं fdi के जरिए पहाड़ का विकास कर सकता हूं।
इन सबमें मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है, मेरे पास पर्याप्त बिजनेस है, मेरा सपना है कि हमारी देवभूमि एकदम जागृत देवभूमि हो।
सेवा का सच्चा अर्थ और ज्ञान पर सबका अधिकार
जैसे पेड़ फल देता है बिना किसी अपेक्षा के, वैसे ही मुंगली जी भी दूसरों की मदद करते हैं। गरीब परिवारों को अनाज, कपड़े और दवाइयाँ देना। जरूरतमंद बच्चों की फीस भरना, किताबें देना, ट्यूशन का इंतजाम करना। संकट में चुपचाप पहुँच जाना। भूखे, बेघर लोगों के लिए भोजन का इंतजाम करना। सब कुछ बिना किसी एहसान के भाव से होता चला जाता है।
मुंगली जी मानते हैं कि शिक्षा किसी की बपौती नहीं। हर बच्चे का हक है। उनके स्कूल में कई बच्चे ऐसे आते हैं जिनके पास फीस देने के पैसे नहीं होते। लेकिन वे उन्हें कभी मना नहीं करते। उन्होंने कहा "यदि किसी के मन में सीखने की सच्ची चाह है तो गरीबी उसके रास्ते में रुकावट नहीं बननी चाहिए।"
उनके स्कूल से निकले कई बच्चे आज अच्छे पदों पर हैं, सफल हैं। वे खुद स्वीकार करते हैं कि बिना मुंगली जी के उनका जीवन कुछ और होता।
युवाओं से मुंगली जी का लगाव खास है। युवावस्था जीवन का सबसे नाजुक और निर्णायक समय है। इस उम्र में एक सही बात जीवन की दिशा बदल सकती है, और एक गलत संगति सब बिगाड़ सकती है। मुंगली जी का युवाओं को संदेश है "बच्चों, यह वह उम्र है जब एक सही शब्द तुम्हारा पूरा रास्ता रोशन कर सकता है और एक गलत कदम तुम्हें भटका सकता है।"
मुंगली जी के द्वारा किए गए कार्य किसी पत्थर पर अंकित नहीं हैं न उन्होंने कभी ये चाहा कि लोग उन्हें एक प्रचारक के रूप में जानें। उन्हें कभी कोई पुरस्कार नहीं मिला, उन्होंने पुरस्कार की चाह भी नहीं रखी। एडमंड हिलेरी, जनरल बी सी जोशी, पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और भी कई अद्भुत शख्सियतों के साथ रहने वाला व्यक्ति खुद भी साधारण तो नहीं हो सकता।
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