Sunday, January 4, 2026

यात्रा, बाजार और बुनियादी सुविधाओं से जूझता कस्बा

यात्रा, बाजार और बुनियादी सुविधाओं से जूझता कस्बा

बड़कोट में अस्पताल मौजूद है और हाल के समय में कुछ जांच सुविधाएं शुरू हुई हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब भी बेहद कमजोर हैं। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को देहरादून रेफर किया जाता है और स्थानीय स्तर पर भरोसेमंद इलाज की सुविधा नहीं है।

बड़कोट के व्यापारी राजेश कुमार जैन बताते हैं कि हल्की बीमारी में भी यहां सही इलाज मिलना मुश्किल है। वह अपने अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि पिछले साल उन्हें बुखार हुआ था। यहां दवाइयां चलती रहीं, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई। बाद में देहरादून जाकर जांच कराई गई तो पता चला कि टाइफाइड नहीं, बल्कि फेफड़ों में संक्रमण था। उनका कहना है कि गलत इलाज से स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

राजेश के अनुसार गर्भवती महिलाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है। कई मामलों में महिलाओं को देहरादून रेफर किया जाता है और रास्ते में ही जटिलताएं हो जाती हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधा की कमी यहां स्थायी संकट बन चुकी है।

पूरे तहसील का बाजार है बड़कोट

आगे बात करते हुए राजेश बताते हैं कि बड़कोट केवल एक कस्बा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुख्य बाजार है। बड़कोट तहसील के अंतर्गत आने वाले सौ से अधिक गांवों के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए यहीं आते हैं। यमुनोत्री क्षेत्र तक के गांवों की निर्भरता बड़कोट बाजार पर है।

उनका कहना है कि छोटे गांवों में दुकानें जरूर खुली हैं, लेकिन असली खरीदारी आज भी बड़कोट से ही होती है। इसी वजह से बड़कोट का बाजार पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

यात्रा सीजन और चौपट होता कारोबार

राजेश कुमार ने बताया कि बड़कोट का व्यापार मुख्य रूप से तीर्थ यात्रा पर निर्भर है। यात्रा सीजन में लाखों श्रद्धालु आते हैं और होटल, दुकानें, ढाबे सभी चलते हैं। लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बदल गए।

उनके अनुसार यात्रा को जिस तरह नियंत्रित किया गया, उससे बड़कोट का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। जिन यात्रियों की बुकिंग बड़कोट में थी, वे दो तीन दिन बाद यहां पहुंचे या बीच रास्ते से लौट गए। होटल, दुकानें और लीज पर ली गई जमीनें घाटे में चली गईं।

राजेश कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा हाल पहले कभी नहीं देखा। उनका कहना है कि इस बार व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ और बाजार पूरी तरह बैठ गया।

जांच चौकियों से बना डर का माहौल

राजेश ने बताया कि हरिद्वार से लेकर यमुनोत्री तक यात्रियों को कई स्थानों पर रोका गया। पहचान पत्र और कागजों की बार बार जांच से यात्रियों में डर पैदा हुआ।

उनका कहना है कि कई यात्रियों ने यह सवाल करना शुरू कर दिया कि क्या यमुनोत्री जाने के लिए भी किसी तरह की अनुमति चाहिए। इस डर का सबसे ज्यादा नुकसान बड़कोट जैसे पड़ाव कस्बों को हुआ, जहां यात्री रुकते, खरीदारी करते और स्थानीय लोगों की आजीविका चलती थी।

पानी और सड़क, वर्षों पुरानी समस्याएं

बड़कोट में पानी की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। राजाराम जगूड़ी के अनुसार पंपिंग योजना की मांग वर्षों पुरानी है। जमीन का मुआवजा बढ़ चुका है और पत्राचार भी हुआ है, लेकिन काम आज तक शुरू नहीं हो पाया।

यमुनोत्री जैसे विश्व प्रसिद्ध धाम की ओर जाने वाली सड़क की हालत को लेकर भी स्थानीय लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि खराब सड़कें पहली बार आने वाले यात्रियों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं और पूरे क्षेत्र की छवि प्रभावित होती है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में पहाड़ और मैदान का फर्क

राजेश कहते हैं कि क्षेत्र में स्कूल और कॉलेज तो हैं, लेकिन व्यवस्थाएं कमजोर हैं। कहीं शिक्षक ज्यादा हैं और बच्चे कम, तो कहीं बच्चे ज्यादा और शिक्षक कम। पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी यही स्थिति है। उनका कहना है कि मैदानी इलाकों की तुलना में पहाड़ में आज भी बुनियादी सुविधाएं न के बराबर हैं और यही असमानता लोगों की सबसे बड़ी पीड़ा है।

बड़कोट की स्थिति, पूरे उत्तराखंड का सवाल

राजेश का कहना है कि बड़कोट की स्थिति केवल एक कस्बे की कहानी नहीं है। यह गढ़वाल और पूरे उत्तराखंड के उन इलाकों की तस्वीर है, जहां यात्रा, बाजार, स्वास्थ्य और शिक्षा एक दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।

लोगों को उम्मीद थी कि उत्तराखंड बनने के बाद हालात सुधरेंगे, लेकिन आज कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सच में उनकी जिंदगी आसान हुई है। बड़कोट बाजार में बैठा हर व्यक्ति यही कहता है कि समस्या केवल यात्रा की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की है।

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